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कैसे लगेगी आस्था की डुबकी, पिंडारा तीर्थ में नहीं पर्याप्त पानी
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Mon, 27 Mar 2017 12:10 AM IST
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सुखा पड़ा तीर्थ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चैत्र मास की अमावस्या का विशेष स्नान सोमवार सुबह 10 बजे से प्रारंभ होगा। वहीं पितृ कर्म के लिए मंगलवार को सुबह आठ बजे से 08:27 बजे तक स्नान किया जाएगा, लेकिन इस खास स्नान के लिए पांडू पिंडारा तीर्थ पर आने वाले लोगों को निराशा हाथ लग सकती है। कारण है पिंडतारक तीर्थ में पर्याप्त पानी न होना। पिंडतारक तीर्थ में बहुत ही कम पानी है और हालत यह है कि महिला घाट सहित कई घाट तो सूख चुके हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को यहां निराशा हाथ लग सकती है।
तीर्थ के लिए लोगों का कहना है कि यहां पानी हमेशा शुद्ध माना जाता है, लेकिन इस पानी में स्नान नहीं किया जा सकता। प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। घाटों की सफाई नहीं की जाता।
अमावस्या के दिन और खासतौर पर सोमवती अमावस्या को पिंडतारक तीर्थ में स्नान का खास महत्व है। वहीं पंडितों के अनुसार चैत्र मास की अमावस्या को तीर्थ में स्नान का महत्व और भी बढ़ जाता है। हालांकि इस बार अमावस्या को लेकर लोग असमंजस में हैं, लेकिन पंडित इसे भी शास्त्रों के अनुसार वर्गीकृत कर रहे हैं। ऐसे में सोमवार को भी स्नान का योग बन रहा है। सोमवार पितृ कार्यों के लिए स्नान का खास महत्व है। करीब सात एकड़ में बने पिंडारा तीर्थ को शुरू से ही प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है।
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पांडवों से जुड़ी है कथा
मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने पितृ के तर्पण के लिए पिंडारा तीर्थ पर आए थे। यहां वे 12 साल तक सोमवती अमावस्या का इंतजार करते रहे, लेकिन सोमवती अमावस्या का योग नहीं बना। ऐसे में यहां अमावस्या और विशेषतौर पर सोमवती अमावस्या के दिन स्नान का खास महत्व है।
आस्था का बड़ा केंद्र
पांडू पिंडारा आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां लोग राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से स्नान और पिंड दान करने के लिए आते हैं। इसके बावजूद यह तीर्थ स्थान प्रशासन की उपेक्षा का शिकार है।
पितृ कार्य करें सोमवार को
इस बार अमावस्या के स्नान का योग दो दिन बन रहा है। ऐसे में पितृ कार्य सोमवार को किए जा सकते हैं। वैसे स्नान कर पुण्य के लिए मंगलवार को स्नान किया जा सकता है। दोनों दिनों के स्नान का अपना महत्व है। -पंडित देवीदयाल शास्त्री।
मंगलवार को करें स्नान
चैत्र मास की अमावस्या के दिन स्नान का खास महत्व है। इस बार यह योग मंगलवार को सुबह आठ बजे से 08:27 बजे तक बन रहा है। वैसे अमावस्या का योग सोमवार सुबह साढ़े दस बजे से शुरू होगा। इस दिन संवत भी बदल रहा है। मंगलवार को सुबह 08:27 बजे के बाद संवत 2074 शुरू हो जाएगा। ऐसे में नए वर्ष के लिए यह स्नान शुभ माना जाता है। इससे नए वर्ष के अनुष्ठान खास फलदायक होते हैं। -सतीश शस्त्री।
नहीं मिल रही सुविधा
यहां कर्मकांड करने वालों से प्रशासन फीस लेता है, लेकिन सुविधा नहीं दी जा रही हैं। अब तीर्थ का जो हाल है, यहां स्नान करना असंभव है। जो भी श्रद्धालु आते हैं, उनको बहुत बुरा लगता है। -पवन, श्रद्धालु
गंदा हो चुका है पानी
हालांकि तीर्थ का पानी हमेशा शुद्ध माना जाता है, लेकिन इस पानी में स्नान नहीं किया जा सकता। प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। घाटों की भी सफाई नहीं हो रही है। इससे यहां श्रद्धालु भी कम आ रहे हैं। -रतिराम, श्रद्धालु
भरवाया जाएगा पानी
तीर्थ में पानी भरवाने के लिए ट्यूबवेल चलवाया था, लेकिन पानी क्यों नहीं भरा गया इसका पता किया जाएगा। गांव के सरपंच को बोलकर तीर्थ में तुरंत पानी की व्यवस्था की जाएगी। -सतबीर सिंह कुंडू, एसडीएम, जींद।
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तीर्थ के लिए लोगों का कहना है कि यहां पानी हमेशा शुद्ध माना जाता है, लेकिन इस पानी में स्नान नहीं किया जा सकता। प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। घाटों की सफाई नहीं की जाता।
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अमावस्या के दिन और खासतौर पर सोमवती अमावस्या को पिंडतारक तीर्थ में स्नान का खास महत्व है। वहीं पंडितों के अनुसार चैत्र मास की अमावस्या को तीर्थ में स्नान का महत्व और भी बढ़ जाता है। हालांकि इस बार अमावस्या को लेकर लोग असमंजस में हैं, लेकिन पंडित इसे भी शास्त्रों के अनुसार वर्गीकृत कर रहे हैं। ऐसे में सोमवार को भी स्नान का योग बन रहा है। सोमवार पितृ कार्यों के लिए स्नान का खास महत्व है। करीब सात एकड़ में बने पिंडारा तीर्थ को शुरू से ही प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है।
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पांडवों से जुड़ी है कथा
मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने पितृ के तर्पण के लिए पिंडारा तीर्थ पर आए थे। यहां वे 12 साल तक सोमवती अमावस्या का इंतजार करते रहे, लेकिन सोमवती अमावस्या का योग नहीं बना। ऐसे में यहां अमावस्या और विशेषतौर पर सोमवती अमावस्या के दिन स्नान का खास महत्व है।
आस्था का बड़ा केंद्र
पांडू पिंडारा आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां लोग राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से स्नान और पिंड दान करने के लिए आते हैं। इसके बावजूद यह तीर्थ स्थान प्रशासन की उपेक्षा का शिकार है।
पितृ कार्य करें सोमवार को
इस बार अमावस्या के स्नान का योग दो दिन बन रहा है। ऐसे में पितृ कार्य सोमवार को किए जा सकते हैं। वैसे स्नान कर पुण्य के लिए मंगलवार को स्नान किया जा सकता है। दोनों दिनों के स्नान का अपना महत्व है। -पंडित देवीदयाल शास्त्री।
मंगलवार को करें स्नान
चैत्र मास की अमावस्या के दिन स्नान का खास महत्व है। इस बार यह योग मंगलवार को सुबह आठ बजे से 08:27 बजे तक बन रहा है। वैसे अमावस्या का योग सोमवार सुबह साढ़े दस बजे से शुरू होगा। इस दिन संवत भी बदल रहा है। मंगलवार को सुबह 08:27 बजे के बाद संवत 2074 शुरू हो जाएगा। ऐसे में नए वर्ष के लिए यह स्नान शुभ माना जाता है। इससे नए वर्ष के अनुष्ठान खास फलदायक होते हैं। -सतीश शस्त्री।
नहीं मिल रही सुविधा
यहां कर्मकांड करने वालों से प्रशासन फीस लेता है, लेकिन सुविधा नहीं दी जा रही हैं। अब तीर्थ का जो हाल है, यहां स्नान करना असंभव है। जो भी श्रद्धालु आते हैं, उनको बहुत बुरा लगता है। -पवन, श्रद्धालु
गंदा हो चुका है पानी
हालांकि तीर्थ का पानी हमेशा शुद्ध माना जाता है, लेकिन इस पानी में स्नान नहीं किया जा सकता। प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। घाटों की भी सफाई नहीं हो रही है। इससे यहां श्रद्धालु भी कम आ रहे हैं। -रतिराम, श्रद्धालु
भरवाया जाएगा पानी
तीर्थ में पानी भरवाने के लिए ट्यूबवेल चलवाया था, लेकिन पानी क्यों नहीं भरा गया इसका पता किया जाएगा। गांव के सरपंच को बोलकर तीर्थ में तुरंत पानी की व्यवस्था की जाएगी। -सतबीर सिंह कुंडू, एसडीएम, जींद।