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जींद के विकास की एक बात तक नहीं, बस स्टेडियम का नाम बदलकर चले गए सीएम
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Sun, 16 Oct 2016 12:33 AM IST
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जींद में आयोजित भगवान वाल्मीकि जयंती समारोह में लोगों को अभिवादन स्वीकार करते मुख्यमंत्री व अन्य नेता।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पूर्व सरकारों पर जींद के विकास में उपेक्षा का दम भरने वाली भाजपा सरकार के समय में भी जींद के लोगों को निराशा ही हाथ लग रही है। शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर एक माह में तीसरी बार जींद आए, लेकिन यहां के विकास की कोई बात तक नहीं हो पाई। ऐसे में जींद के लोग इस सरकार में भी स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सफीदों रोड स्थित खेल परिसर का नाम एकलव्य के नाम से करने की घोषणा कर चले गए। इससे कांग्रेसियों में रोष है।
जींद के विकास की घोषणा का था दावा
रैली के संयोजक सामाजिक अधिकारिता न्याय मंत्री कृष्ण बेदी ने रैली के मंच से 50 घोषणाओं का दावा किया था। इसमें जींद के विकास के लिए भी कई घोषणा होने की बात कही जा रही थी। ऐसे में जींद के लिए कोई घोषणा नहीं होने से लोग मुख्यमंत्री के जींद दौरे पर सवाल उठा रहे हैं।
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ये परियोजनाएं ठंडे बस्ते में
गौरतलब है कि जींद में दो साल पहले मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज, पॉलीटेक्निक कॉलेज, नागरिक अस्पताल में एमआरआई मशीन, भिवानी व हांसी रोड पर आरओबी, अटल पार्क, बाईपास के निर्माण सहित कई घोषणाएं की थी। ये सभी परियोजना ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। सिर्फ मेडिकल कॉलेज के मामले में ही कागजी काम हुआ है। ऐसे में जींद के लोगों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री कोई बड़ी सौगात जींद को देंगे। इस मौके पर प्रदेश सचिव जवाहर सैनी, जिला अध्यक्ष अमरपाल राणा, महिला मोर्चा की हिजलाध्यक्ष पुष्पा तायल, जिला उपाध्यक्ष डॉ. राज सैनी, पूर्व जिलाध्यक्ष ओपी पहल, प्रवक्ता पुरुषोत्तम शर्मा, पूर्व सांसद सुरेंद्र बरवाला मौजूद रहे।
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कब-कब हुई सीएम की यात्रा
मुख्यमंत्री ने 11 सितंबर को खेल स्टेडियम में ही रैली में शिरकत की थी। तब भी लोगों को काफी उम्मीद थी, लेकिन कोई नई घोषणा नहीं हो पाई। इसके बाद चार अक्टूबर को फिर से मुख्यमंत्री बीड़ बड़ा वन में पार्क का उद्घाटन करने आए, लेकिन कोई घोषणा नहीं हुई। अब शनिवार को एक माह में तीसरी यात्रा में भी जींद के लिए सरकार के खजाने की चाबी नहीं लगी।
जींद की जनता निराश
मुख्यमंत्री का दौरा किसी भी क्षेत्र के लिए खास मौका होता है। वहां विकास की रूपरेखा तय होती है। विकास की बात होती है, लेकिन मुख्यमंत्री के इस दौरे से ऐसा कुछ नहीं हुआ। जींद की जनता को सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है।
डॉ. हरिचंद मिढ़ा, विधायक जींद।
सिर्फ नाम बदलने वाली सरकार
सरकार के पास विकास का कोई कार्यक्रम नहीं है। अब तक कोई नई परियोजना जींद में शुरू नहीं की है। सिर्फ कांग्रेस की सरकार के समय की परियोजनाओं के रिबन काटे जा रहे हैं और नाम बदले जा रहे हैं। स्टेडियम का नाम बदलना सरकार की ओछी मानसिकता का परिचय है।
जगबीर ढिगाना, प्रदेश सचिव कांग्रेस।
पहले पूरी होंगी पुरानी घोषणा
सरकार जींद के विकास को लेकर गंभीर है। सिर्फ घोषणाओं में विश्वास नहीं है। ऐसे में पहले पुरानी घोषणाओं को पूरा किया जाएगा। जहां तक स्टेडियम का नाम बदलने की बात है, इसका निर्माण भाजपा के समय में ही हुआ है। कांग्रेस के समय सिर्फ परियोजना शुरू की गई थी।
अमरपाल राणा, जिलाध्यक्ष भाजपा।
विरोध के ऐलान से अलर्ट रहा प्रशासन, देवीदास को रखा नजरबंद
एससी ए महापंचायत के अध्यक्ष देवीदास वाल्मीकि को प्रशासन ने भिवानी रोड स्थित उनके घर में ही मुख्यमंत्री का कार्यक्रम समाप्त होने तक नजरबंद रखा। गौरतलब है कि देवीदास ने कार्यक्रम का विरोध करने ऐलान किया था। देवीदास वाल्मीकि का कहना है कि सरकार एससी ए वर्ग के आरक्षण को बहाल नहीं कर रही है। ऐसे में वाल्मीकि समुदाय की भावना आहत हैं।
क्या है विवाद
देवीदास वाल्मीकि के अनुसार पहले एससी ए व बी श्रेणी का प्रावधान था। इसमें वाल्मीकि समुदाय को हर क्षेत्र में पूरा प्रतिनिधित्व मिल रहा था, लेकिन पिछले लंबे समय से ए व बी श्रेणी को एक साथ जोड़ दिया गया है। अब यह मामला अदालत में विचाराधीन है। ऐसे में सरकार को अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए वर्गीकरण बहाल करना चाहिए।
सरकार चाहती है टकराव
भगवान वाल्मीकि सभी के हैं। ऐसे में हम कार्यक्रम की मर्यादा को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते थे, लेकिन सरकार ने आपातकाल जैसा वातावरण बना दिया है। पहले एससी ए महापंचायत ने एक जनवरी से आंदोलन की योजना बनाई थी, लेकिन अब आंदोलन जल्दी करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति का बैकलॉग भरने की बात कही है, लेकिन वर्गीकरण की बहाली के बिना बैकलॉग भरने का कोई अर्थ नहीं बनता।
देवीदास वाल्मीकि, अध्यक्ष एससी ए महापंचाय।
बीरेंद्र सिंह ने सीएम से की दलित वोट साधने की अपील
इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह सीएम के मंच पर अपने जाने पहचाने अंदाज में नजर आए। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि प्रदेश में 81 प्रतिशत लोग गरीब हैं और इनमें सर्वाधिक संख्या दलितों की है। ऐसे में इनकी ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। दलितों के वोट से जिन लोगों ने सत्ता पाई, उन्होंने ही इनसे मुंह मोड़ लिया। बीरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि आपको तो पता नहीं चुनाव लड़ना है या नहीं, लेकिन म्हारा काम चाल जाएगा।
दलितों के विकास का बताया मंत्र
चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि जिसके पास पैसा है, उनकी हर कोई यहां तक कि सरकार भी सुनती है। भगवान वाल्मीकि ने रामराज्य की कल्पना की थी, जिसमें बराबरी होती है। उन्होंने मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 60 साल के बुजुर्गों को बुढ़ापा पेंशन देती है, लेकिन दलित वर्ग के लोग तो 60 साल तक जी ही नहीं पाते। ऐेसे में उनकी पेंशन 55 वर्ष की आयु में कर दी जाए। इसी में घणखरा (अधिकतर) सौदा फीट हो जागा। उन्होंने कहा कि जब वे कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष थे, तब उन्होंने पार्टी के घोषणापत्र में यह वादा किया था, लेकिन उस समय के मुख्यमंत्री ने उनके साथ धोखा किया। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि सिख एलाई रेजिमेंट में मजहबी सिखों की भर्ती होती है। ऐसे में मुख्यमंत्री जी आप रक्षा मंत्री से बात कर इसमें वाल्मीकि समाज को भर्ती करवाने की व्यवस्था करें। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि वे इस बात के लिए लड़ सकते हैं। पंजाब के युवा इसमें ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसीलिए हरियाणा के अनुसूचित जाति के युवाओं को भी इस रेजिमेंट में मौका मिले ताकि यहां के युवा भी सेना में शामिल हो सकें।
करनाल को करवाओ रिजर्व हलका
चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि फिलहाल जो विधानसभा के हलके अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व हैं, उनका लाभ नहीं मिल पाता। अनुसूचित जाति के लोग अधिकतर बड़े शहरों में हैं। ऐसे में वहां के हलकों को रिजर्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि करनाल को रिजर्व कर दिया जाए तो वहां से वाल्मीकि समाज का उम्मीदवार ही जीतेगा। चौधरी बीरेंद्र सिंह ने मांग की कि निर्माण कार्यों की परियोजनाओं में अनुसूचित जाति के लोगों को पांच करोड़ रुपये तक ठेकों में आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर सीएम की वाह वाह हो जागी और काम म्हारा भी चाल जागा। शराब के ठेकों में भी अनुसूचित जाति के लोगों का आरक्षण निर्धारित कर दिया जाए, ताकि इस दलित वर्ग के लोग भी आर्थिक तौर पर मजबूत हो सके। इसके अलावा जो सफाई के ठेके दिए जाते हैं उनको पूरी तरह अनुसूचित जाति के लोगों को देने की व्यवस्था की जाए।