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एक मत से गिरा अविश्वास प्रस्ताव, पद पर बनीं रहेंगी पदमा
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Tue, 02 May 2017 12:49 AM IST
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जिला परिषद की बैठक में भाग लेते जिला परिषद सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला परिषद चेयरपर्सन पदमा सिंगला के खिलाफ पार्षदों द्वारा लगाया गया अविश्वास प्रस्ताव सोमवार को एक मत से गिर गया। अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए 18 जिला परिषद सदस्यों की जरूरत थी, लेकिन बैठक में विरोधी खेमे के केवल 17 पार्षद ही पहुंच पाए। इसलिए एक मत से अविश्वास प्रस्ताव गिर गया और चेयरपर्सन पदमा सिंगला की कुर्सी बच गई। अविश्वास प्रस्ताव में नौ पार्षदों के नहीं पहुंच पाने के कारण पंचायती राज के नियमानुसार पदमा सिंगला को बहुमत मान लिया गया। इससे पहले 12 अप्रैल को जिला परिषद के 20 सदस्यों ने डीसी विनय सिंह से मिलकर जिला परिषद चेयरपर्सन पदमा सिंगला के खिलाफ शपथ पत्र देकर अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए बैठक का समय मांगा था।
डीसी ने चेयरपर्सन को विश्वास हासिल करने के लिए एक मई का समय दिया है। सोमवार को लगभग 11 बजे जिला परिषद के सभागार में डीसी विनय सिंह की अध्यक्षता में बैठक की शुरुआत हुई। प्रशासन ने बैठक के नियमानुसार लगभग 12 बजे तक पार्षदों का इंतजार किया। बैठक में 17 पार्षद ही पहुंच पाए। इसके बाद डीसी ने मतदान की प्रक्रिया शुरू की। बैठक में मौजूद सभी 17 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाला, लेकिन उनका दो-तिहाई बहुत साबित नहीं हो सका और एक मत के अंतर से अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। इसके बाद डीसी ने अविश्वास प्रस्ताव के गिर जाने की घोषणा की और कहा कि चेयरपर्सन पदमा सिंगला अपने पद पर बनी रहेंगी।
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समय पर दिया एक पार्षद ने धोखा
जिला परिषद के वाइस चेयरमैन उमेद सिंह रेढू ने कहा कि बैठक से पहले उनके पास 18 पार्षदों का पूर्ण रुप से सहयोग था, लेकिन मौके पर एक पार्षद ने धोखा दे दिया और अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
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हर छह महीने में लेकर आएंगे अविश्वास प्रस्ताव
वार्ड 16 से पार्षद अमित निडानी ने कहा कि चेयरपर्सन की भेदभावपूर्ण नीति के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा। 26 में से 17 पार्षद चेयरपर्सन के खिलाफ खड़े हैं। उनकी लड़ाई जारी रहेगी और छह महीने बाद फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा।
विकास पर फिर लगी मोहर
जिला परिषद चेयरपर्सन पदमा सिंगला ने कहा कि उनके साथ तो पहले ही पार्षदों का बहुमत है, लेकिन कुछ लोगों ने एक-दो पार्षद को बहलाने-फुसलाने का काम किया था लेकिन विकास को देखते हुए फिर से उनके विश्वास पर मोहर लगी है।
फिर चर्चा में आए वार्ड छह के पार्षद
जिला परिषद के वार्ड छह से पार्षद मोनू दनौदा फिर से चर्चा में रहे। जिस समय प्रधान का चुनाव किया जाना था, उस समय मोनू दनौदा ने किसी के भी पक्ष में अपना मतदान नहीं किया। इस कारण पदमा सिंगला को 13 और दूसरे पक्ष को 12 वोट मिले थे। एक वोट से उन्हें प्रधान का पद मिला था। सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव में भी मोनू दनौदा बैठक में नहीं पहुंचे और अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
बैठक में ये जिला पार्षद रहे उपस्थित
अविश्वास प्रस्ताव की बैठक में वार्ड एक से सुभाषचंद्र, वार्ड दो से राजेंद्र, वार्ड तीन से पिंकी, वार्ड चार से बलजीत, वार्ड सात से सुमन देवी, वार्ड आठ से मंजीत कुमार, वार्ड नौ से मुकेश, वार्ड 10 से जितेंद्र, वार्ड 11 से दिनेश, वार्ड 12 से कुमारी गुंजन दलाल, वार्ड 13 से उमेद सिंह, वार्ड 14 से सतपाल, वार्ड 16 से अमित निडानी, वार्ड 17 से दिनेश, वार्ड 18 से विकास, वार्ड 19 से गीता व वार्ड 25 से प्रवीण उपस्थित रहे।
जिला परिषद जींद में 26 पार्षद हैं। इनमें से 20 जिला पार्षदों ने चेयरपर्सन पदमा सिंगला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की थी। इस पर कार्यवाही करते हुए एक मई को अविश्वास प्रस्ताव को लेकर मतदान करवाने की तिथि निर्धारित की गई थी। इस तरह की विशेष बैठक बुलाने के लिए जिला पार्षदों का 50 प्रतिशत कोरम पूरा होना जरूरी होता है। 17 जिला पार्षद बैठक में पहुंचे हैं। इस लिहाज से अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान करवाया गया। अविश्वास प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत होना जरूरी होता है। इस लिहाज से 18 पार्षदों का अविश्वास प्रस्ताव पारित करना जरूरी था, लेकिन 17 पार्षद ही इसके विरुद्ध मतदान कर सके। परिणाम स्वरूप अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है। -विनय सिंह, डीसी जींद
अविश्वास प्रस्ताव के बाद झड़प
डीआरडीए में जैसे ही जिला परिषद चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा तो उसके समर्थकों ने खुशी में नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इसके बाद प्रस्ताव में भाग लेकर आ रहे जिला पार्षदों की तरफ से नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इसके बाद दोनों ही पक्षों के समर्थकों के बीच में झगड़ा शुरू हो गया। इस दौरान मामला बढ़ता देखकर पुलिस ने बीच बचाव किया और दोनों ही पक्षों के लोगों को अलग-अलग किया।