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जाट आरक्षण आंदोलन - नेताओं के निशाने पर रही सरकार
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Thu, 02 Feb 2017 12:36 AM IST
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नारेबाजी करते हुए धरने पर पहुंचते लोग।
- फोटो : jind
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जाट आरक्षण और अन्य मांगों को लेकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने बुधवार को चौथे दिन भी ईक्कस गांव में धरना दिया। इस दौरान जाट नेताओं ने भाजपा और केंद्र तथा प्रदेश की सरकार पर निशाना साधा। वहीं, जुलाना से विधायक परमेंद्र सिंह ढुल भी समर्थन देने पहुंचे। धरने की अध्यक्षता गुलकनी गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक छोटूराम शर्मा ने की। समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य कैप्टन रणधीर सिंह चहल ने बताया कि वीरवार को जांगड़ा समाज से एक व्यक्ति धरने की अध्यक्षता करेंगे। बुधवार को समिति के प्रदेशाध्यक्ष सूबे सिंह ढाका, प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक और गुरुग्राम के जिलाध्यक्ष रणजीत सिंह सहरावत भी पहुंचे।
सर छोटूराम जयंती के कारण बुधवार को अन्य दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ रही। इस दौरान जाट नेताओं ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। जाट नेताओं ने कहा कि सरकार जाटों पर जबरदस्ती करने का प्रयास नहीं करे। नेताओं ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने से पहले प्रदेश में किसी प्रकार का जातीय भेदभाव नहीं था, लेकिन भाजपा ने सत्ता में आते ही भाईचारा खराब करवा दिया।
वीरभान ढुल का सवाल, क्या अदालत को मानती है सरकार
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष वीरभान ढुल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार जाट आरक्षण का मामला अदालत में होने की बात कह कर इसे टाल रही है। ढुल ने पूछा कि सुप्रीम कोर्ट एसवाईएल पर फैसला दे चुका है। यदि सरकार को अदालत को इतना ही ख्याल है तो पानी क्यों नहीं आ रहा।
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गुरुग्राम के जिलाध्यक्ष ने खापों को ललकारा
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के गुरुग्राम के जिलाध्यक्ष रणजीत सिंह सहरावत ने बिना नाम लिए कहा कि जाट कौम में भी कुछ खरपतवार पैदा हो गई है। कुछ लोग स्वयं को जाट कौम का स्वयंभू नेता बताकर सरकार के साथ मिले हुए हैं। इनका बहिष्कार किया जाए। सहरावत ने पूछा कि जब जाट युवाओं की चिता की राख भी ठंडी नहीं हुई थी तो उन लोगों ने सरकार को किस बात के लड्डू खिलाए। गौरतलब है कि कुछ नेताओं ने पिछले साल हुए आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री को लड्डू खिलाया था। इस दौरान जोश में सहरावत कई असभ्य शब्दों का प्रयोग भी कर गए।
विधायक बोले इनेलो का समर्थन
बुधवार को जुलाना से विधायक परमेंद्र सिंह ढुल भी धरने पर पहुंचे। उन्होंने धरने का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार सिर्फ जाटों को बरगला रही है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह रिकार्डिंग भी सुनवाई, जिसमें उन्होंने चुनाव से पहले वादे किए थे।
धरना स्थल पर हुआ हवन
बसंत पंचमी होने के कारण बुधवार धरने से पहले हवन किया गया। इस दौरान धरने पर प्रसाद भी वितरित किया गया। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कैप्टन रणधीर सिंह चहल ने बताया कि अब प्रतिदिन यहां प्रसाद वितरित किया जाएगा।
सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने बनाई दूरी
मंगलवार को जाट नेताओं द्वारा दो सरकारी कर्मचारियों से रिकार्ड छीनने के बाद बुधवार को सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के लोगों ने धरने से दूरी बनाए रखी। धरने से कुछ दूरी पर एक खाली खेत में हालांकि दर्जनों सरकारी कर्मचारी तैनात रहे, लेकिन धरने में नहीं घुसे। यहां तक कि प्रशासन द्वारा रिकार्डिंग के लिए भेजे एक फोटोग्राफर ने भी जाट नेताओं से अनुमति लेकर रिकार्डिंग की।
मीडिया पर भी बरसे जाट नेता
धरने के मंच से समिति के जिलाध्यक्ष वीरभान ढुल ने मीडिया पर भी भड़ास निकाली। ढुल ने कहा कि अब इस लड़ाई में पूंजीपति उनके खिलाफ हो गए हैं। यही कारण है कि धरने पर कम लोग दिखाए जा रहे हैं।
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सर छोटूराम जयंती के कारण बुधवार को अन्य दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ रही। इस दौरान जाट नेताओं ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। जाट नेताओं ने कहा कि सरकार जाटों पर जबरदस्ती करने का प्रयास नहीं करे। नेताओं ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने से पहले प्रदेश में किसी प्रकार का जातीय भेदभाव नहीं था, लेकिन भाजपा ने सत्ता में आते ही भाईचारा खराब करवा दिया।
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वीरभान ढुल का सवाल, क्या अदालत को मानती है सरकार
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष वीरभान ढुल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार जाट आरक्षण का मामला अदालत में होने की बात कह कर इसे टाल रही है। ढुल ने पूछा कि सुप्रीम कोर्ट एसवाईएल पर फैसला दे चुका है। यदि सरकार को अदालत को इतना ही ख्याल है तो पानी क्यों नहीं आ रहा।
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गुरुग्राम के जिलाध्यक्ष ने खापों को ललकारा
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के गुरुग्राम के जिलाध्यक्ष रणजीत सिंह सहरावत ने बिना नाम लिए कहा कि जाट कौम में भी कुछ खरपतवार पैदा हो गई है। कुछ लोग स्वयं को जाट कौम का स्वयंभू नेता बताकर सरकार के साथ मिले हुए हैं। इनका बहिष्कार किया जाए। सहरावत ने पूछा कि जब जाट युवाओं की चिता की राख भी ठंडी नहीं हुई थी तो उन लोगों ने सरकार को किस बात के लड्डू खिलाए। गौरतलब है कि कुछ नेताओं ने पिछले साल हुए आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री को लड्डू खिलाया था। इस दौरान जोश में सहरावत कई असभ्य शब्दों का प्रयोग भी कर गए।
विधायक बोले इनेलो का समर्थन
बुधवार को जुलाना से विधायक परमेंद्र सिंह ढुल भी धरने पर पहुंचे। उन्होंने धरने का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार सिर्फ जाटों को बरगला रही है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह रिकार्डिंग भी सुनवाई, जिसमें उन्होंने चुनाव से पहले वादे किए थे।
धरना स्थल पर हुआ हवन
बसंत पंचमी होने के कारण बुधवार धरने से पहले हवन किया गया। इस दौरान धरने पर प्रसाद भी वितरित किया गया। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कैप्टन रणधीर सिंह चहल ने बताया कि अब प्रतिदिन यहां प्रसाद वितरित किया जाएगा।
सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने बनाई दूरी
मंगलवार को जाट नेताओं द्वारा दो सरकारी कर्मचारियों से रिकार्ड छीनने के बाद बुधवार को सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के लोगों ने धरने से दूरी बनाए रखी। धरने से कुछ दूरी पर एक खाली खेत में हालांकि दर्जनों सरकारी कर्मचारी तैनात रहे, लेकिन धरने में नहीं घुसे। यहां तक कि प्रशासन द्वारा रिकार्डिंग के लिए भेजे एक फोटोग्राफर ने भी जाट नेताओं से अनुमति लेकर रिकार्डिंग की।
मीडिया पर भी बरसे जाट नेता
धरने के मंच से समिति के जिलाध्यक्ष वीरभान ढुल ने मीडिया पर भी भड़ास निकाली। ढुल ने कहा कि अब इस लड़ाई में पूंजीपति उनके खिलाफ हो गए हैं। यही कारण है कि धरने पर कम लोग दिखाए जा रहे हैं।