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अंग्रेजी साहित्य की गहराई में उतरना आवश्यक : मलिक
Sat, 01 Mar 2025 12:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 01 Mar 2025 12:24 AM IST
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28जेएनडी01-राजकीय महाविद्यालय में मौजूद विद्यार्थी व स्टाफ सदस्य। स्रोत कॉलेज
जींद। राजकीय महाविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के इतिहास पर आधारित पॉवर पॉइंट प्रतियोगिता का आयोजन प्राचार्य डॉ. सत्यवान मलिक की अध्यक्षता में किया गया। प्रतियोगिता में एमए प्रथम वर्ष से नीलम ने प्रथम स्थान, एमए प्रथम वर्ष से अंशु रानी ने द्वितीय स्थान और अंग्रेजी ऑनर्स तृतीय वर्ष से सविता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्राचार्य ने कहा कि अंग्रेजी साहित्य का विकास अंग्रेजी समाज के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसमें प्राचीन से आधुनिक काल तक हुए बदलावों की झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी साहित्य के प्रत्येक युग का नाम किसी केंद्रीय साहित्यकार, शासक या साहित्यिक आंदोलन के आधार पर रखा गया है और प्रत्येक काल की अपनी विशिष्ट विशेषताएं होती हैं। डॉ. शमशेर ने कहा कि साहित्य मानव आचरण को न केवल दर्शाता है, बल्कि उसे सुंदर भी बनाता है। उप प्राचार्य डॉ. मुनीष और विभागाध्यक्ष प्रो. ज्योति श्योराण ने कहा कि अंग्रेजी साहित्य के इतिहास को समझे बिना उसका समग्र ज्ञान संभव नहीं है। अंग्रेजी साहित्य का विकास सामाजिक परिवर्तन के साथ-साथ होता रहा है और इसकी गहराई में उतरना आवश्यक है। इस मौके पर डॉ. विशाल रेढू, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. वेद प्रकाश और डॉ. संतोष, प्रो. मुकेश रेढू और डॉ. राजकमल भी मौजूद रहे।
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प्राचार्य ने कहा कि अंग्रेजी साहित्य का विकास अंग्रेजी समाज के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसमें प्राचीन से आधुनिक काल तक हुए बदलावों की झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी साहित्य के प्रत्येक युग का नाम किसी केंद्रीय साहित्यकार, शासक या साहित्यिक आंदोलन के आधार पर रखा गया है और प्रत्येक काल की अपनी विशिष्ट विशेषताएं होती हैं। डॉ. शमशेर ने कहा कि साहित्य मानव आचरण को न केवल दर्शाता है, बल्कि उसे सुंदर भी बनाता है। उप प्राचार्य डॉ. मुनीष और विभागाध्यक्ष प्रो. ज्योति श्योराण ने कहा कि अंग्रेजी साहित्य के इतिहास को समझे बिना उसका समग्र ज्ञान संभव नहीं है। अंग्रेजी साहित्य का विकास सामाजिक परिवर्तन के साथ-साथ होता रहा है और इसकी गहराई में उतरना आवश्यक है। इस मौके पर डॉ. विशाल रेढू, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. वेद प्रकाश और डॉ. संतोष, प्रो. मुकेश रेढू और डॉ. राजकमल भी मौजूद रहे।
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