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सवा पांच लाख पशुओं को लगाए जाएंगे गलघोंटू के टीके
Updated Sat, 30 Jul 2016 12:53 AM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
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निडाना गांव में गलघोंटू की बीमारी के चलते हुई 20 पशुओं की मौत के बाद पशुपालन विभाग की नींद टूट गई है। अब पशुपालन विभाग ने शुक्रवार से पूरे जिले में गलघोंटू बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है। जिले में कुल 5 लाख 30 हजार पशु हैं और सभी को बीमारी से बचाव के लिए इंजेक्शन लगाना सुनिश्चित किया जा रहा है। पशुपालन विभाग के अधिकारी मान रहे हैं कि विभाग की लापरवाही के चलते ही निडाना गांव के किसानों को इतना बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा है। अब पूरे जिले को इससे बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब पशुपालन विभाग ने एक सप्ताह में सभी 5 लाख 30 हजार पशुओं के टीकाकरण की योजना बनाई है।
क्या है गल घोंटू बीमारी
लाला लाजपत राय पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नरेश जिंदल के अनुसार गल घोंटू बीमारी वायरल के कारण होती है। यह बीमारी अक्सर बारिश के मौसम में ही होती है। इसकी चपेट में आने वाले पशु के मुंह से लार गिरने लगती हैं और बुखार व अफारा होता है। गलघोंटू बीमारी पशुओं के लिए जानलेवा होती है, इसीलिए इससे बचाव के लिए पशुपालन विभाग बारिश के मौसम से पहले मई-जून में ही टीकाकरण करता है।
करीब 30 प्रतिशत पशुओं को नहीं लगे टीके
पशुपालन विभाग के सूत्रों के अनुसार जिला में मई-जून के महीने में गलघोंटू बीमारी से बचने के लिए टीकाकरण अभियान तो चलाया गया, लेकिन सभी पशुओं को यह इंजेक्शन नहीं लगे। सूत्रों के अनुसार करीब 30 प्रतिशत पशु ऐसे हैं, जिनको टीका नहीं लगा है।
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विभाग ने नकारा भ्रष्टाचार
यह मामला सामने आने के बाद टीकाकरण अभियान में भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी दिख रही हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी इससे मना कर रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि हो सकता है, पशु चिकित्सकों ने पशुओं को टीका लगाने की बजाए, इंजेक्शन बाजार में बेच दिए हों, लेकिन उप पशुपालन निदेशक डॉ. रविंद्र नरवाल के अनुसार इस प्रकार का कोई मामला सामने नहीं आया है।
लापरवाही करते हैं किसान
पशु चिकित्सकों के अनुसार गलघोंटू के टीके लगवाने में किसान लापरवाही करते हैं। किसानों का मानना है कि टीका लगने से पशुओं में दूध कम होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। एक-दो दिन दूध कम हो सकता है, लेकिन यह पशु के जीवन के लिए आवश्यक है।
एक सप्ताह में पूरा होगा टीकाकरण
निश्चित रूप से पहले टीकाकरण में लापरवाही हुई है, लेकिन अब जिले के सभी पांच लाख 30 हजार पशुओं को गलघोंटू बीमारी से बचाव के टीके लगाए जाएंगे। पशुपालकों को भी यह टीका लगवाना चाहिए।
- डॉ. रविंद्र नरवाल, उप पशुपालन निदेशक, जींद।
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क्या है गल घोंटू बीमारी
लाला लाजपत राय पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नरेश जिंदल के अनुसार गल घोंटू बीमारी वायरल के कारण होती है। यह बीमारी अक्सर बारिश के मौसम में ही होती है। इसकी चपेट में आने वाले पशु के मुंह से लार गिरने लगती हैं और बुखार व अफारा होता है। गलघोंटू बीमारी पशुओं के लिए जानलेवा होती है, इसीलिए इससे बचाव के लिए पशुपालन विभाग बारिश के मौसम से पहले मई-जून में ही टीकाकरण करता है।
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करीब 30 प्रतिशत पशुओं को नहीं लगे टीके
पशुपालन विभाग के सूत्रों के अनुसार जिला में मई-जून के महीने में गलघोंटू बीमारी से बचने के लिए टीकाकरण अभियान तो चलाया गया, लेकिन सभी पशुओं को यह इंजेक्शन नहीं लगे। सूत्रों के अनुसार करीब 30 प्रतिशत पशु ऐसे हैं, जिनको टीका नहीं लगा है।
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विभाग ने नकारा भ्रष्टाचार
यह मामला सामने आने के बाद टीकाकरण अभियान में भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी दिख रही हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी इससे मना कर रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि हो सकता है, पशु चिकित्सकों ने पशुओं को टीका लगाने की बजाए, इंजेक्शन बाजार में बेच दिए हों, लेकिन उप पशुपालन निदेशक डॉ. रविंद्र नरवाल के अनुसार इस प्रकार का कोई मामला सामने नहीं आया है।
लापरवाही करते हैं किसान
पशु चिकित्सकों के अनुसार गलघोंटू के टीके लगवाने में किसान लापरवाही करते हैं। किसानों का मानना है कि टीका लगने से पशुओं में दूध कम होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। एक-दो दिन दूध कम हो सकता है, लेकिन यह पशु के जीवन के लिए आवश्यक है।
एक सप्ताह में पूरा होगा टीकाकरण
निश्चित रूप से पहले टीकाकरण में लापरवाही हुई है, लेकिन अब जिले के सभी पांच लाख 30 हजार पशुओं को गलघोंटू बीमारी से बचाव के टीके लगाए जाएंगे। पशुपालकों को भी यह टीका लगवाना चाहिए।
- डॉ. रविंद्र नरवाल, उप पशुपालन निदेशक, जींद।