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रोहतक रोड धंसने के मामले में अभी और उखड़ेंगी जांच की परतें
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रोहतक रोड पर रात करीब साढ़े नौ बजे जांच करने पहुंचे अधिकारी। संवाद
- फोटो : Jind
जींद। पिछले करीब तीन साल से प्रशासन, नेताओं व लोगों के लिए जी का जंजाल बने रोहतक रोड का काम अभी भी पूरा नहीं हो पाएगा। जुलाई में बारिश के कारण धंसे रोहतक रोड को हालांकि लोक निर्माण विभाग ने चलने लायक बना दिया था, लेकिन अब जांच के लिए इसे फिर से खोदा जाएगा। वीरवार देररात करीब साढ़े नौ बजे अधिकारियों की टीम जांच के लिए पहुंची। लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों ने कहा कि इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग की एनओसी लेनी होगी। इसके अलावा मौके पर खोदाई के लिए बड़ी मशीन भी उपलब्ध नहीं मिली। ऐसे में टीम लौट आई। अब दोबारा से टीम किसी दिन यहां खोदाई करने जाएगी।
वीरवार रात को जांच के लिए गए एडीसी साहिल गुप्ता के जनस्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग व नगर परिषद के अधिकारी भी पहुंचे। यहां गहरी खोदाई कर सड़क निर्माण और डाली गई बारिश के पानी की पाइपलाइन की जांच की जानी है। ऐसे में छोटी मशीन से काम नहीं बना और टीम लौट आई। इसको लेकर मौके पर ही एडीसी साहिल गुप्ता ने अधिकारियों को फटकार भी लगाई।
अमरूत योजना की पाइपलाइन पर है विवाद
दरअसल शहर में बारिश के पानी निकासी के लिए अमरूत योजना के तहत पाइपलाइन डाली जा रही है। करीब तीन साल पहले यह काम शुरू हुआ था। इसके साथ ही रोहतक रोड पर खोदाई शुरू हुई, लेकिन तीन साल तक मामला लटका रहा। इसको लेकर रोहतक रोड के लोग कई बार आंदोलन कर चुके हैं। ऐसे में यहां सड़क बना तो दी गई, लेकिन जुलाई में आई बारिश में पूरी सड़क धंस गई। इसके बाद यह मामला काफी विवादों में रहा।
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करीब 35 फुट गहरे में दबाई गई है पाइप
रोहतक रोड बारिश के पानी की निकासी की लाइन का अंतिम छोर है। ढलान के अनुसार यहां करीब 35 फुट गहरे में पाइपलाइन डाली गई है। ऐसे यहां के लोगों को खतरा है कि यदि यह लाइन सही प्रकार से नहीं चल पाती तो उनके घरों को भी दिक्कत हो सकती है। वहीं इस मामले में नगर परिषद, जनस्वास्थ्य विभाग व लोक निर्माण विभाग एक दूसरे पर टाल रहे हैं।
विधानसभा की कमेटी कर रही है जांच
रोहतक रोड व मिनी बाईपास के धंसने के मामले की जांच विधानसभा की सब्जेक्ट कमेटी कर रही है। इसके अलावा डीसी द्वारा स्थानीय स्तर पर भी जांच करवाई जा रही है। विधानसभा की सब्जेक्ट कमेटी ने चार अगस्त को यहां निरीक्षण किया था और इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग के तीन, नगर परिषद के तीन व लोक निर्माण विभाग के दो अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि अभी तक सब्जेक्ट कमेटी की अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन कमेटी ने तीनों विभागों के एसीएस की मौजूदगी में अपने स्तर स्थिति ठीक करने के निर्देश करीब एक महीना पहले दिए थे।
जांच के लिए खोदाई से पहले करनी होगी पूरी तैयारी
दरअसल रोहतक रोड पर फिलहाल काफी वाहनों का दबाव रहता है। प्रतिदिन करीब दस हजार से अधिक वाहन इस रोड से निकलते हैं। ऐसे में यहां जांच के लिए खोदाई करने से पहले प्रशासन को काफी तैयारी करनी होगी। सड़क के नीचे नगर परिषद की पाइप लाइन के अलावा जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा भी सीवर लाइन डाली गई है। ऐसे में विभाग से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा यहां यातायात को नियंत्रित करने के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की जानी है।
नगर परिषद, जींद के एक्सईएन सुमित कुमार ने कहा कि रोहतक रोड मामले में एडीसी की अध्यक्षता में जांच चल रही है। जांच के लिए रोहतक रोड पर खोदाई की जानी है। इसके लिए संबंधित विभागों से बात कर रहे हैं।
लोगों को सुविधा व नाकाम अधिकारियों को सजा ही लक्ष्य
जींद से भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। तीनों ही विभाग जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की हालत देख कर सब्जेक्ट कमेटी से जांच करवाई जा रही है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई होगी। मेरा उद्देश्य है कि लोगों को सुविधा मिले और गड़बड़ी करने वालों को सजा मिले।
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वीरवार रात को जांच के लिए गए एडीसी साहिल गुप्ता के जनस्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग व नगर परिषद के अधिकारी भी पहुंचे। यहां गहरी खोदाई कर सड़क निर्माण और डाली गई बारिश के पानी की पाइपलाइन की जांच की जानी है। ऐसे में छोटी मशीन से काम नहीं बना और टीम लौट आई। इसको लेकर मौके पर ही एडीसी साहिल गुप्ता ने अधिकारियों को फटकार भी लगाई।
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अमरूत योजना की पाइपलाइन पर है विवाद
दरअसल शहर में बारिश के पानी निकासी के लिए अमरूत योजना के तहत पाइपलाइन डाली जा रही है। करीब तीन साल पहले यह काम शुरू हुआ था। इसके साथ ही रोहतक रोड पर खोदाई शुरू हुई, लेकिन तीन साल तक मामला लटका रहा। इसको लेकर रोहतक रोड के लोग कई बार आंदोलन कर चुके हैं। ऐसे में यहां सड़क बना तो दी गई, लेकिन जुलाई में आई बारिश में पूरी सड़क धंस गई। इसके बाद यह मामला काफी विवादों में रहा।
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करीब 35 फुट गहरे में दबाई गई है पाइप
रोहतक रोड बारिश के पानी की निकासी की लाइन का अंतिम छोर है। ढलान के अनुसार यहां करीब 35 फुट गहरे में पाइपलाइन डाली गई है। ऐसे यहां के लोगों को खतरा है कि यदि यह लाइन सही प्रकार से नहीं चल पाती तो उनके घरों को भी दिक्कत हो सकती है। वहीं इस मामले में नगर परिषद, जनस्वास्थ्य विभाग व लोक निर्माण विभाग एक दूसरे पर टाल रहे हैं।
विधानसभा की कमेटी कर रही है जांच
रोहतक रोड व मिनी बाईपास के धंसने के मामले की जांच विधानसभा की सब्जेक्ट कमेटी कर रही है। इसके अलावा डीसी द्वारा स्थानीय स्तर पर भी जांच करवाई जा रही है। विधानसभा की सब्जेक्ट कमेटी ने चार अगस्त को यहां निरीक्षण किया था और इसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग के तीन, नगर परिषद के तीन व लोक निर्माण विभाग के दो अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि अभी तक सब्जेक्ट कमेटी की अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन कमेटी ने तीनों विभागों के एसीएस की मौजूदगी में अपने स्तर स्थिति ठीक करने के निर्देश करीब एक महीना पहले दिए थे।
जांच के लिए खोदाई से पहले करनी होगी पूरी तैयारी
दरअसल रोहतक रोड पर फिलहाल काफी वाहनों का दबाव रहता है। प्रतिदिन करीब दस हजार से अधिक वाहन इस रोड से निकलते हैं। ऐसे में यहां जांच के लिए खोदाई करने से पहले प्रशासन को काफी तैयारी करनी होगी। सड़क के नीचे नगर परिषद की पाइप लाइन के अलावा जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा भी सीवर लाइन डाली गई है। ऐसे में विभाग से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा यहां यातायात को नियंत्रित करने के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की जानी है।
नगर परिषद, जींद के एक्सईएन सुमित कुमार ने कहा कि रोहतक रोड मामले में एडीसी की अध्यक्षता में जांच चल रही है। जांच के लिए रोहतक रोड पर खोदाई की जानी है। इसके लिए संबंधित विभागों से बात कर रहे हैं।
लोगों को सुविधा व नाकाम अधिकारियों को सजा ही लक्ष्य
जींद से भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। तीनों ही विभाग जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की हालत देख कर सब्जेक्ट कमेटी से जांच करवाई जा रही है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई होगी। मेरा उद्देश्य है कि लोगों को सुविधा मिले और गड़बड़ी करने वालों को सजा मिले।