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हवन से शुद्ध होता है वातावरण और बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जा : स्वामी वजीरानंद
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फोटो 31जेएनडी26-श्री गोशाला बाबा फुल्लू साध उचाना खुर्द में पत्रिका का विमोचन करते हुए स्वामी व
- फोटो : 1
उचाना। उचाना खुर्द स्थित श्री गोशाला बाबा फुल्लू साध में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दैनिक यज्ञ मंत्र युक्त पत्रिका का विमोचन किया गया। पत्रिका का विमोचन गोशाला संचालक स्वामी वजीरानंद सरस्वती ने किया। इस पत्रिका का प्रकाशन सर्वजातीय दाड़न खाप के प्रधान रणधीर श्योकंद ने अपने पिता पिरथी सिंह एवं माता तारावती की पावन स्मृति में करवाया है।
स्वामी वजीरानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति में हवन का विशेष महत्व है। श्री गोशाला बाबा फुल्लू साध में पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से प्रत्येक रविवार नियमित रूप से हवन किया जा रहा है। इसके अलावा प्रमुख पर्वों और धार्मिक अवसरों पर भी विशेष हवन आयोजित किए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि पत्रिका में दैनिक यज्ञ में प्रयोग होने वाले मंत्रों का संकलन किया गया है, जिससे कोई भी व्यक्ति अपने घर पर विधि-विधान से हवन कर सकता है। उन्होंने कहा कि हवन धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी माध्यम है। इससे वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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स्वामी वजीरानंद ने गुरु के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु के मार्गदर्शन से व्यक्ति को जीवन में सही दिशा मिलती है। इस अवसर पर रणधीर श्योकंद, राजा डूमरखा, रमेश नंबरदार मखंड, सतपाल दरोली खेड़ा, रामफल और महावीर काकड़ोद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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स्वामी वजीरानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति में हवन का विशेष महत्व है। श्री गोशाला बाबा फुल्लू साध में पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से प्रत्येक रविवार नियमित रूप से हवन किया जा रहा है। इसके अलावा प्रमुख पर्वों और धार्मिक अवसरों पर भी विशेष हवन आयोजित किए जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि पत्रिका में दैनिक यज्ञ में प्रयोग होने वाले मंत्रों का संकलन किया गया है, जिससे कोई भी व्यक्ति अपने घर पर विधि-विधान से हवन कर सकता है। उन्होंने कहा कि हवन धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी माध्यम है। इससे वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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स्वामी वजीरानंद ने गुरु के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु के मार्गदर्शन से व्यक्ति को जीवन में सही दिशा मिलती है। इस अवसर पर रणधीर श्योकंद, राजा डूमरखा, रमेश नंबरदार मखंड, सतपाल दरोली खेड़ा, रामफल और महावीर काकड़ोद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।