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Haryana: सात दिन में पांच जगह जली पराली, 10 हजार जुर्माना वसूला
Mon, 07 Oct 2024 10:15 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 07 Oct 2024 10:15 PM IST
सार
जिले के रेड जोन में शामिल गांवों के खेतों पर प्रशासन की पैनी नजर है। पराली जलने से रोकने के लिए उपमंडल, ब्लॉक तथा ग्रामस्तर पर समिति का गठन किया गया है।
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खेमाखेड़ी गांव के खेतों में धान के अवशेषों में आगजनी की घटना के बाद पहुंची कृषि विभाग की टीम।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
हरियाणा के जींद जिले में एक अक्तूबर से अब तक पांच जगह धान के अवशेष जलाने की घटना सामने आ चुकी है। सबूत मिलने पर कृषि विभाग ने छह किसानों से 10 हजार रुपये जुर्माना वसूला है। वहीं रेड जोन में शामिल जिले के गांवों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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एक सप्ताह में कृषि विभाग को सैटेलाइट के माध्यम से छह जगह धान की फसल के अवशेष जलाने की सूचना मिली है। इस पर विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की है तो जानकारी सही पाई है। टीमों को रसीदां में एक एकड़, खेड़ा खेमावती में एक एकड़, सुरबरा में एक एकड़, राजगढ़ ढोबी में एक एकड़ और मंगलपुर गांव में दो एकड़ में धान के अवशेष में आग लगी हुई मिली है। इसके बाद प्रति एकड़ के हिसाब से जुर्माना लगाकर वसूला गया है।
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धान की फसल के अवशेष को जलाने से रोकने के लिए उपमंडल, ब्लॉक तथा ग्रामस्तर पर समितियां गठित की गई हैं, जोकि प्रत्येक क्षेत्र में पैनी नजर बनाई हुई हैं। कोई किसान फसल अवशेष में आग लगाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। इसमें एफआईआर एवं जुर्माने का प्रावधान है। विभाग ने हर गांव में मुनादी भी करवा रहा है, ताकि किसान पराली में आग न लगाएं।
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फसल अवशेष में आग लगाने पर दो एकड़ तक 25 सौ, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार तथा पांच एकड़ से अधिक भूमि पर अवशेष जलाने पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना और कारागार की सजा का प्रावधान किया गया है।
पिछले साल के रेड जोन वाले गांवों पर भी नजर
गत वर्ष रेड जोन में शामिल गांवों पर प्रशासन की नजर रहेगी। इन गांवों में सख्ती के चलते अवशेष जलाने के मामलों में कुछ कमी जरूर आई थी। कृषि विभाग ने रेड जोन में 24 गांवों को रखा था। सबसे ज्यादा गांव नरवाना क्षेत्र के शामिल थे। इनमें भाणा ब्राह्मण, दनौदा कलां, दनौदा खुर्द, धमतान साहिब, गुरथली, कालवन, खरल, पिपलथा, राजगढ़ ढोबी, सच्चाखेड़ा, उझाना शामिल थे। जींद का एकमात्र गांव किनाना और सफीदों का मुआना गांव रेड जोन में शामिल थे। उचाना क्षेत्र के पांच गांव बड़नपुर, छात्तर, डूमरखां कलां, करसिंधु, उचाना खुर्द शामिल थे। अलेवा के बधाना, बिघाना, डाहोला, दुड़ाना, नगूरां और पेगां रेड जोन में शामिल थे।
4 अक्तूबर को खेड़ा खेमावती में जलाए थे अवशेष
चार अक्तूबर को खेड़ा खेमावती गांव के किसान सुरेश के दो एकड़ में धान की फसल के अवशेष जलाने की घटना हुई थी। इस पर किसान से 2500 रुपये जुर्माना वसूला गया। सफीदों के उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सुशील कुमार, वैज्ञानिक एवं फ्लाइंग स्क्वाड अलका श्रीवास्तव, कृषि पर्यवेक्षक शमशेर सिंह, बीटीएम मंजीत कुमार ने खेड़ा खेमावती में हरसेक से मिली जानकारी के आधार पर जांच करने पर पाया था कि दो एकड़ में फसल का अवशेष जलाया गया था।
जिले में अब तक पांच जगह धान के अवशेष जलाने की घटनाएं हुई हैं। ऐसा करने वाले किसानों से दस हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है। पराली में आग लगाने की घटना पर अंकुश लगाने के लिए उपमंडल, ब्लॉक तथा ग्रामस्तर पर समितियां गठित की गई हैं, जो प्रत्येक क्षेत्र में पैनी नजर बनाई हुई हैं। -सुरेंद्र मलिक, उप निदेशक, कृषि विभाग, जींद।