{"_id":"68715521eb340d3bf904514b","slug":"guru-provides-an-opportunity-for-introspection-and-direction-setting-jind-news-c-199-1-sroh1006-137650-2025-07-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: आत्मचिंतन और दिशा निर्धारण का अवसर प्रदान करता है गुरु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: आत्मचिंतन और दिशा निर्धारण का अवसर प्रदान करता है गुरु
Fri, 11 Jul 2025 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 11 Jul 2025 11:47 PM IST
विज्ञापन
11जेएनडी11-सीआरएसयू में गुरु पूर्णिमा पर्व का शुभारंभ करते कुलपति प्रो. रामपाल सैनी। स्रोत विवि
जींद। युवा व सांस्कृतिक निदेशालय और भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वावधान में चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में गुरु पूर्णिमा पर्व पर समारोह का आयोजन किया। इसमें मुख्यातिथि कुलगुरु प्रो. रामपाल सैनी और मुख्य वक्ता के तौर पर डीसीआरयूएसटी मुरथल के पूर्व कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने शिरकत की।
मुख्यातिथि कुलपति प्रो. सैनी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा वह पर्व है जो आत्मचिंतन और दिशा निर्धारण का अवसर प्रदान करता है। जब सूचनाओं की भरमार हो, तब सच्चा ज्ञान और विवेक आवश्यक हो जाता है। शिक्षकों की भूमिका अब केवल शिक्षण तक सीमित नहीं, वह विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा, पथप्रदर्शक और मूल्यप्रदाता होने चाहिए।
उन्होंने मुख्य वक्ता प्रो. राजेंद्र अनायत के प्रेरणादायक विचारों की सराहना करते हुए कहा कि उनका संबोधन गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत पुनर्पुष्टि है। शिक्षा के इस पवित्र मंदिर में एक सफाई कर्मचारी से लेकर कुलपति तक हर व्यक्ति की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। इस मौके पर डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. विशाल वर्मा, डॉ. अनिल, डॉ. भावना, डॉ. कविता, निदेशक डॉ. विजय कुमार, डॉ. अरुण और प्रो. आनंद मालिक मौजूद रहे।
विज्ञापन
भारतीय संस्कृति में ईश्वरतुल्य माने गए गुरु
मुख्य वक्ता प्रो. अनायत ने कहा कि गुरु भारतीय संस्कृति में ईश्वरतुल्य माने गए हैं, वह ब्रह्मा की भांति निर्माण करते हैं, विष्णु की भांति पालन करते हैं और शिव की भांति शिष्य के अवगुणों का संहार करते हैं। कुलसचिव प्रो. लवलीन मोहन ने सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय में उनके आगमन को गौरवपूर्ण बताया। हम सभी मिलकर विद्यार्थियों को एक स्वच्छ, सुविधाजनक और ज्ञान-परक वातावरण प्रदान करते हैं। गुरु केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि दर्शन, नीति, कला, विज्ञान और व्यावहारिक कौशल भी सिखाता है।
विज्ञापन
मुख्यातिथि कुलपति प्रो. सैनी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा वह पर्व है जो आत्मचिंतन और दिशा निर्धारण का अवसर प्रदान करता है। जब सूचनाओं की भरमार हो, तब सच्चा ज्ञान और विवेक आवश्यक हो जाता है। शिक्षकों की भूमिका अब केवल शिक्षण तक सीमित नहीं, वह विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा, पथप्रदर्शक और मूल्यप्रदाता होने चाहिए।
विज्ञापन
उन्होंने मुख्य वक्ता प्रो. राजेंद्र अनायत के प्रेरणादायक विचारों की सराहना करते हुए कहा कि उनका संबोधन गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत पुनर्पुष्टि है। शिक्षा के इस पवित्र मंदिर में एक सफाई कर्मचारी से लेकर कुलपति तक हर व्यक्ति की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। इस मौके पर डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. विशाल वर्मा, डॉ. अनिल, डॉ. भावना, डॉ. कविता, निदेशक डॉ. विजय कुमार, डॉ. अरुण और प्रो. आनंद मालिक मौजूद रहे।
विज्ञापन
भारतीय संस्कृति में ईश्वरतुल्य माने गए गुरु
मुख्य वक्ता प्रो. अनायत ने कहा कि गुरु भारतीय संस्कृति में ईश्वरतुल्य माने गए हैं, वह ब्रह्मा की भांति निर्माण करते हैं, विष्णु की भांति पालन करते हैं और शिव की भांति शिष्य के अवगुणों का संहार करते हैं। कुलसचिव प्रो. लवलीन मोहन ने सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय में उनके आगमन को गौरवपूर्ण बताया। हम सभी मिलकर विद्यार्थियों को एक स्वच्छ, सुविधाजनक और ज्ञान-परक वातावरण प्रदान करते हैं। गुरु केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि दर्शन, नीति, कला, विज्ञान और व्यावहारिक कौशल भी सिखाता है।