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Jind News: गुरु हरकृष्ण साहिब का प्रकाशोत्सव श्रद्धा से मनाया

Sun, 20 Jul 2025 01:51 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Sun, 20 Jul 2025 01:51 AM IST
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Guru Harkrishna Sahib's Prakash Utsav celebrated with devotion
19जेएनडी19-भाई जसबीर सिंह रमदसिया का हजूरी रागी जत्था गुरबाणी कीर्तन गायन करते हुए। स्रोत साध-स
जींद। आठवीं पातशाही व बाला प्रीतम गुरु हरकृष्ण साहिब का प्रकाशोत्सव गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब में श्रद्धा से मनाया गया। प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा साहिब में धार्मिक दीवान सजाया गया जिसमें बाहर से ढाढी जत्थों, धर्म प्रचारकों व रागी जत्थों ने गुरु हरकृष्ण साहिब के जीवन से संबंधित प्रसंगों को सुना कर संगतों को निहाल किया गया।
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दीवान के आरंभ में गुरुद्वारा साहिब के रागी भाई जसबीर सिंह रमदसिया, भाई कर्मजीत सिंह, भाई मनप्रीत सिंह के रागी जत्थे द्वारा गुरबाणी शब्द गायन किए गए हैं। गुरुद्वारा साहिब के हेडग्रंथी व प्रसिद्ध कथावाचक ज्ञानी गुरविंदर सिंह रत्तक ने अपने प्रवचनों में गुरु साहिब की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी तरह का परोपकारी कार्य करते समय हमें ऊंच-नीच का भेदभाव नही करना चाहिए।
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आध्यात्मिक दृष्टि से गुरु को रूप की संज्ञा दी गई है न कि शरीर की। गुरुजी ने अपना सारा जीवन दूसरों की सेवा में लगा कर मानवता की सेवा की मिसाल कायम की। इसके बाद धर्म प्रचार कमेटी से आए भाई जसबीर सिंह के ढाढी जत्थे ने अपनी ढाढी के वारों में गुरु हरकृष्ण साहिब की जीवनी को पिरोकर संगतों को सुना कर निहाल कर दिया। धार्मिक दीवान के अंत में गुरुद्वारा छठी एवं नौंवी पातशाही गुहला चीका से आए भाई गुरप्रीत सिंह के रागी जत्थे ने निरोल गुरबाणी कीर्तन गायन करके संगतों का मन मोह लिया। दीवान की समाप्ति पर गुरु का अटूट लंगर संगतों में बरताया गया।
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पांच साल की उम्र में ही मिली गुरु की उपाधि

गुरुघर के प्रवक्ता बलविंदर सिंह ने गुरु हर कृष्ण साहिब की जीवनी के बारे में बताया कि गुरुजी का जन्म कीरतपुर साहिब में सातवें गुरु हरराय के घर हुआ था। छोटी उम्र में उनकी आध्यात्मिक विशेषताओं को देखते हुए गुरु हरराय ने पांच वर्ष की आयु में गुरु हर कृष्ण साहिब को गुरु की उपाधि प्रदान की। इस तरह गुरु हरकृष्ण सिख गुरुओं में सबसे छोटी उम्र के गुरु बने। अपने दिल्ली प्रवास के दौरान गुरु हरकृष्ण साहिब ने आध्यात्मिक योग से हजारों दीन और दुखियों की सेवा करके उन्हें दुख मुक्त किया।
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