{"_id":"6a13487398906d138f052384","slug":"god-is-attained-only-by-walking-the-righteous-path-and-engaging-in-acts-of-benevolence-rishi-sukhdev-jind-news-c-199-1-sroh1006-153952-2026-05-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"सही मार्ग पर चलकर परोपकार करने से ही मिलते हैं प्रभु : ऋषि सुखदेव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सही मार्ग पर चलकर परोपकार करने से ही मिलते हैं प्रभु : ऋषि सुखदेव
विज्ञापन
24जेएनडी03-कला धाम मंदिर में जरूरतमंदों को राशन वितरित करते सुखदेव महाराज। स्रोत श्रद्धालु
- फोटो : खूटेहना प्राथमिक स्वास्य केंद्र पर मरीजों को देखते चिकित्सक।
जींद। रोहतक रोड स्थित कला धाम मंदिर में ऋषि सुखदेव महाराज के पावन सानिध्य में रविवार को सर्व सुख शांति और विश्व कल्याण के लिए महामंत्र अखंड जाप किया गया। इस दौरान जरूरतमंदों के लिए मासिक राशन वितरित भंडारा लगाया गया।
ऋषि सुखदेव महाराज ने कहा कि सारा विश्व प्रभु भगवान को याद करता है लेकिन परोपकारी वह होता है जिसको परमपिता प्रभु भगवान याद करते हैं। परम सत्य ज्ञान द्वारा धर्म के सही मार्ग पर चलकर परोपकार करने से ही परमपिता प्रभु भगवान की प्राप्ति संभव है।
जब कोई इंसान किसी व्यक्ति को कोई वस्तु मुफ्त देकर और कोई शिक्षक या गुरु अपने शिष्य को निशुल्क शिक्षा देकर बदले में धन या कोई मान सम्मान की इच्छा रखता है तो वह केवल उपकार है, परोपकार नहीं।
विज्ञापन
परोपकार केवल वहीं है, जो बिना किसी इच्छा और निस्वार्थ भाव से संपूर्ण तन मन धन से समर्पित होकर सभी मनुष्यों की भलाई और विश्व कल्याण के लिए कार्य करें।
ऋषि सुखदेव महाराज ने कहा कि यह मानव जीवन भगवान ने स्वार्थ के लिए नहीं दिया, बल्कि सभी मनुष्यों की भलाई और परोपकार के लिए ही दिया है। इसलिए सभी मनुष्यों को परम सत्य ज्ञान द्वारा परमपिता प्रभु भगवान से जुड़कर सारे विश्व में ही प्रभु प्रेम, आनंद और खुशियों को बांटते हुए परोपकारी हो जाना चाहिए।
संपूर्ण कला धाम परिसर एवं आस पास का वातावरण भक्ति भाव से गूंज उठा। अंत में कार्यक्रम में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
विज्ञापन
ऋषि सुखदेव महाराज ने कहा कि सारा विश्व प्रभु भगवान को याद करता है लेकिन परोपकारी वह होता है जिसको परमपिता प्रभु भगवान याद करते हैं। परम सत्य ज्ञान द्वारा धर्म के सही मार्ग पर चलकर परोपकार करने से ही परमपिता प्रभु भगवान की प्राप्ति संभव है।
विज्ञापन
जब कोई इंसान किसी व्यक्ति को कोई वस्तु मुफ्त देकर और कोई शिक्षक या गुरु अपने शिष्य को निशुल्क शिक्षा देकर बदले में धन या कोई मान सम्मान की इच्छा रखता है तो वह केवल उपकार है, परोपकार नहीं।
विज्ञापन
परोपकार केवल वहीं है, जो बिना किसी इच्छा और निस्वार्थ भाव से संपूर्ण तन मन धन से समर्पित होकर सभी मनुष्यों की भलाई और विश्व कल्याण के लिए कार्य करें।
ऋषि सुखदेव महाराज ने कहा कि यह मानव जीवन भगवान ने स्वार्थ के लिए नहीं दिया, बल्कि सभी मनुष्यों की भलाई और परोपकार के लिए ही दिया है। इसलिए सभी मनुष्यों को परम सत्य ज्ञान द्वारा परमपिता प्रभु भगवान से जुड़कर सारे विश्व में ही प्रभु प्रेम, आनंद और खुशियों को बांटते हुए परोपकारी हो जाना चाहिए।
संपूर्ण कला धाम परिसर एवं आस पास का वातावरण भक्ति भाव से गूंज उठा। अंत में कार्यक्रम में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।