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जिंदा आदमी का दो बार डेथ सर्टिफिकेट बनाया, अब पुलिस करेगी जांच
Updated Sun, 15 Jan 2017 12:14 AM IST
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हिसार जिला के उमरा गांव निवासी 27 वर्षीय युवक का दो बार फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनाने के मामले की जांच अब पुलिस करेगी। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी शिकायत पुलिस को दी है। वहीं इस प्रकार का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। हैरानी की बात है कि दो बार सर्टिफिकेट जिस युवक के नाम से जारी हुआ है वह अभी जिंदा है। अब स्वास्थ्य विभाग से यह गड़बड़ झाला ना उगलते बन रहा है, ना ही निगलते।
जींद के नागरिक अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार दो नवंबर 2016 को हिसार जिले के उमरा गांव निवासी 27 वर्षीय नरेश की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई। सरकारी रिकार्ड के अनुसार इसके बाद तीन नवंबर को नरेश के शव का पोस्टमार्टम किया गया। तीन दिसंबर को वास्तव में चार शवों के पोस्टमार्टम हुए हैं, जबकि रिकार्ड में पांच पोस्टमार्टम दिखाए गए हैं। दूसरी बार एक माह बाद एक दिसंबर को फिर से नरेश की मौत दिखाई गई है। इसमें नरेश के पिता के हवाले से लिखा गया है कि वे शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते। इसके बावजूद दोबारा मौत का सर्टिफिकेट जारी करने की मांग की गई है।
ऐसे सामने आया मामला
मामला उस वक्त सामने आया, जब सर्टिफिकेट जारी करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर की नजर इस रिकार्ड पर पड़ी। इसके बद अधिकारियों को अवगत करवाया गया। अधिकारियों की जांच में सामने आया कि वास्तव में नरेश का पोस्टमार्टम हुआ ही नहीं।
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अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण में नागरिक अस्पताल के प्रबंधन पर ही सवाल उठ रहे हैं। हालांकि जिस दिन नरेश का पोस्टमार्टम हुआ है, रजिस्टर की एंट्री में अलग पेन और लिखावट से नाम लिखा गया है। पोस्टमार्टम की एंट्री वाला रजिस्टर अस्पताल के किसी कर्मचारी के मार्फत ही किसी तक पहुंचा है। यह जांच के बाद ही साफ होगा।
पुलिस से की है शिकायत
मामला संज्ञान में आने के बाद इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस को शिकायत दी गई है। अब पूरे मामले की जांच पुलिस करेगी। इसके बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
- डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, जींद।
नहीं मिली शिकायत
यह शिकायत मेरे संज्ञान में नहीं आई है। यदि कोई मामला आता है तो पुलिस उस पर कार्रवाई करेगी।
- कुलवंत सिंह, सिविल लाइन चौकी प्रभारी।
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जींद के नागरिक अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार दो नवंबर 2016 को हिसार जिले के उमरा गांव निवासी 27 वर्षीय नरेश की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई। सरकारी रिकार्ड के अनुसार इसके बाद तीन नवंबर को नरेश के शव का पोस्टमार्टम किया गया। तीन दिसंबर को वास्तव में चार शवों के पोस्टमार्टम हुए हैं, जबकि रिकार्ड में पांच पोस्टमार्टम दिखाए गए हैं। दूसरी बार एक माह बाद एक दिसंबर को फिर से नरेश की मौत दिखाई गई है। इसमें नरेश के पिता के हवाले से लिखा गया है कि वे शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते। इसके बावजूद दोबारा मौत का सर्टिफिकेट जारी करने की मांग की गई है।
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ऐसे सामने आया मामला
मामला उस वक्त सामने आया, जब सर्टिफिकेट जारी करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर की नजर इस रिकार्ड पर पड़ी। इसके बद अधिकारियों को अवगत करवाया गया। अधिकारियों की जांच में सामने आया कि वास्तव में नरेश का पोस्टमार्टम हुआ ही नहीं।
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अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण में नागरिक अस्पताल के प्रबंधन पर ही सवाल उठ रहे हैं। हालांकि जिस दिन नरेश का पोस्टमार्टम हुआ है, रजिस्टर की एंट्री में अलग पेन और लिखावट से नाम लिखा गया है। पोस्टमार्टम की एंट्री वाला रजिस्टर अस्पताल के किसी कर्मचारी के मार्फत ही किसी तक पहुंचा है। यह जांच के बाद ही साफ होगा।
पुलिस से की है शिकायत
मामला संज्ञान में आने के बाद इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस को शिकायत दी गई है। अब पूरे मामले की जांच पुलिस करेगी। इसके बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
- डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, जींद।
नहीं मिली शिकायत
यह शिकायत मेरे संज्ञान में नहीं आई है। यदि कोई मामला आता है तो पुलिस उस पर कार्रवाई करेगी।
- कुलवंत सिंह, सिविल लाइन चौकी प्रभारी।