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Jind News: खाद विक्रेताओं ने प्रयोगशाला का भ्रमण कर जाना मिट्टी जांच का महत्व
Fri, 08 Aug 2025 11:38 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 08 Aug 2025 11:38 PM IST
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18जेएनडी06-सफीदों स्थित मिट्टी-पानी जांच प्रयोगशाला का भ्रमण करते हुए प्रशिक्षणार्थी। स्रोत हमे
जींद। हमेटी में उर्वरक प्रबंधन पर प्रशिक्षण ले रहे खाद विक्रेता प्रशिक्षणार्थियों ने शुक्रवार को फैसिलिटेटर डॉ. हरभगवान कंबोज के नेतृत्व में कृषि विभाग की सफीदों स्थित प्रयोगशाला का शैक्षणिक भ्रमण किया। यहां उन्हें मिट्टी पानी की जांच का महत्व, जांच करने का तरीका और जांच आधार पर बनाए जाने वाले मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में जानकारी ली।
डॉ. हरभगवान कंबोज ने बताया कि फसलों में हमेशा संतुलित मात्रा में सही तरीके से रासायनिक व गैर रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। असंतुलित तरीके से अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से खेत की मिट्टी की भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है।
रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग करने से किसान का फालतू में होने वाला खर्चा भी बचेगा व भूमिगत जल प्रदूषित होने से बचेंगे। हमेटी के प्रशिक्षण सलाहकार डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि ज्यादातर किसान बगैर मिट्टी जांच करवाए रासायनिक उर्वरकों का देखा देखी अंधाधुंध प्रयोग करते हैं। इससे फसलों में कीट व बीमारियों का प्रकोप भी ज्यादा होता है।
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इसके लिए किसान जहरीले कीटनाशकों का छिड़काव करता है जिससे पर्यावरण प्रदूषण, लाभकारी कीटों को नुकसान, खाद्यान्न में जहर की मात्रा कई समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इसलिए किसान हमेशा अपने खेत की मिट्टी की जांच अवश्य करवाए और विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही उचित रसायनिक उर्वरकों का सही मात्रा में प्रयोग करें।
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डॉ. हरभगवान कंबोज ने बताया कि फसलों में हमेशा संतुलित मात्रा में सही तरीके से रासायनिक व गैर रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। असंतुलित तरीके से अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से खेत की मिट्टी की भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है।
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रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग करने से किसान का फालतू में होने वाला खर्चा भी बचेगा व भूमिगत जल प्रदूषित होने से बचेंगे। हमेटी के प्रशिक्षण सलाहकार डॉ. सुभाष चंद्र ने कहा कि ज्यादातर किसान बगैर मिट्टी जांच करवाए रासायनिक उर्वरकों का देखा देखी अंधाधुंध प्रयोग करते हैं। इससे फसलों में कीट व बीमारियों का प्रकोप भी ज्यादा होता है।
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इसके लिए किसान जहरीले कीटनाशकों का छिड़काव करता है जिससे पर्यावरण प्रदूषण, लाभकारी कीटों को नुकसान, खाद्यान्न में जहर की मात्रा कई समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इसलिए किसान हमेशा अपने खेत की मिट्टी की जांच अवश्य करवाए और विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही उचित रसायनिक उर्वरकों का सही मात्रा में प्रयोग करें।