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केंद्र सरकार के तीन अध्यादेशों के विरोध में 15 से 19 तक किसान देंगे धरना
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जाट धर्मशाला में आयोजित बैठक में मौजूद गुरनाम सिंह चढूनी व अन्य किसान संगठनों के सदस्य।
- फोटो : Jind
केंद्र सरकारी की ओर से लाए गए तीन कृषि अध्यादेशों के विरोध में 15 से 19 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रतिदिन धरने दिए जाएंगे। 20 सितंबर को प्रदेश में तीन घंटे तक सड़कों को जाम किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो 27 सितंबर तक प्रदेश में यात्रा करके लोगों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा। यह निर्णय रविवार को जींद की जाट धर्मशाला में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में हुई 19 किसान संगठनों की बैठक में लिया गया।
चढूनी ने कहा कि किसानों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने की मांग और व्यापारियों द्वारा खरीदी गई किसानों की फसल के पैसे की गारंटी सरकार की हो। यह दोनों मांगें मान ली जाएं तो किसान इन अध्यादेशों का विरोध नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर उनकी यह मांगें नहीं मानी गई तो वह पुलिस की लाठियां खाने के लिए तैयार हैं। इसके विरोध में 27 सितंबर से प्रदेश में यात्रा शुरू करके इस आंदोलन को राष्ट्रीय आंदोलन बनाया जाएगा। चढूनी ने कहा कि किसानों के आंदोलन को कमजोर करने के लिए सरकार साजिश रच रही है, लेकिन वह किसानों को किसी साजिश का शिकार नहीं होने देंगे।
अनिल विज के खिलाफ अमर्यादित शब्द का इस्तेमाल किया
चढूनी ने कहा कि किसानों पर लाठियां बरसाई गईं और प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज इससे मना कर रहे हैं। उन्होंने गृहमंत्री के प्रति अमर्यादित शब्द का इस्तेमाल करते हुए गैरजिम्मेदार मंत्री बताया। चढूनी ने कहा कि सरकार ने साजिश के तहत सिविल ड्रेस में पुलिस को भेजकर किसानों पर लाठियां बरसवाईं। इस तरह सरकार ने किसानों की हत्या करने की साजिश रची है।
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भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही किसानों को लूटा
चढूनी ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही किसान को लूटने का काम किया है। जब प्रदेश में कांग्रेस का राज था तो पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ कपड़े निकालकर किसानों की मांगों को लागू करवाने के लिए आंदोलन करते थे, लेकिन प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार बनी तो एक बार भी किसानों की मांगों को लागू करने की बात नहीं की है।
प्रदेश में सांसदों की कमेटी को बताया ढकोसला
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस बिल के लागू होने से पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने तीन सांसदों की एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी किसानों को गुमराह करने के लिए बनाई है। यह मामला केंद्र सरकार का है। केंद्र सरकार इस बिल को लागू करने से पहले किसानों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करे और दूसरा खरीदी गई फसल की राशि के भुगतान के बारे में खुद गारंटर बने।
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चढूनी ने कहा कि किसानों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने की मांग और व्यापारियों द्वारा खरीदी गई किसानों की फसल के पैसे की गारंटी सरकार की हो। यह दोनों मांगें मान ली जाएं तो किसान इन अध्यादेशों का विरोध नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर उनकी यह मांगें नहीं मानी गई तो वह पुलिस की लाठियां खाने के लिए तैयार हैं। इसके विरोध में 27 सितंबर से प्रदेश में यात्रा शुरू करके इस आंदोलन को राष्ट्रीय आंदोलन बनाया जाएगा। चढूनी ने कहा कि किसानों के आंदोलन को कमजोर करने के लिए सरकार साजिश रच रही है, लेकिन वह किसानों को किसी साजिश का शिकार नहीं होने देंगे।
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अनिल विज के खिलाफ अमर्यादित शब्द का इस्तेमाल किया
चढूनी ने कहा कि किसानों पर लाठियां बरसाई गईं और प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज इससे मना कर रहे हैं। उन्होंने गृहमंत्री के प्रति अमर्यादित शब्द का इस्तेमाल करते हुए गैरजिम्मेदार मंत्री बताया। चढूनी ने कहा कि सरकार ने साजिश के तहत सिविल ड्रेस में पुलिस को भेजकर किसानों पर लाठियां बरसवाईं। इस तरह सरकार ने किसानों की हत्या करने की साजिश रची है।
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भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही किसानों को लूटा
चढूनी ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही किसान को लूटने का काम किया है। जब प्रदेश में कांग्रेस का राज था तो पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ कपड़े निकालकर किसानों की मांगों को लागू करवाने के लिए आंदोलन करते थे, लेकिन प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार बनी तो एक बार भी किसानों की मांगों को लागू करने की बात नहीं की है।
प्रदेश में सांसदों की कमेटी को बताया ढकोसला
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस बिल के लागू होने से पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने तीन सांसदों की एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी किसानों को गुमराह करने के लिए बनाई है। यह मामला केंद्र सरकार का है। केंद्र सरकार इस बिल को लागू करने से पहले किसानों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करे और दूसरा खरीदी गई फसल की राशि के भुगतान के बारे में खुद गारंटर बने।