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Jind News: किसान नेताओं के आदेश का करते रहे इंतजार
Sat, 02 Mar 2024 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 02 Mar 2024 12:20 AM IST
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जींद। दातासिंह वाला बॉर्डर पर लगातार शांति चल रही है। शुक्रवार को भी दिनभर किसान शांति से रहे और अपनी तैयारियों में लगे रहे। बॉर्डर पर किसान अब उनके नेताओं की तरफ से आने वाले आदेशों का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जो भी आदेश आएंगे वह उसके अनुसार कार्य करने के लिए तैयार हैं। वहीं दूसरी तरफ पुलिस भी पूरा दिन मुस्तैद रही। किसान दिनभर अपने काम भी निपटाते रहे। कुछ लोग कपड़े धो रहे थे तो कुछ सफाई करते नजर आए।
किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़, दलजीत सेरसा, नफे सिंह ने कहा कि वह लोग दिल्ली कूच के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। जल्द ही किसान इस बारे में फैसला लेंगे कि क्या करना है। इसके बाद ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगी। यदि वह लोग दिल्ली नहीं जा सके तो फिर यहीं पर डेरा जमाए बैठे रहेंगे। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती तक तक यहीं पर डटे रहेंगे। किसानाें ने कहा कि जिस प्रकार डेढ़ साल तक दिल्ली बॉर्डर पर बैठे थे, उसी प्रकार इस बॉर्डर को भी उन्होंने अब अपना घर बना लिया है। आसपास के लोगों का खूब प्यार मिल रहा है। यहां पर उन्हें किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं है। किसानों की लड़ाई अपने हक के लिए है। वह किसी सरकार या व्यक्ति के खिलाफ नहीं हैं। उनको अपनी मांग पूरी करवानी है। यदि उनकी मांग अभी पूरी हो जाती है तो वह लौट जाएंगे।
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छोटी-छोटी टोलियों में बैठकर होता रहा मंथन
कुछ देर के लिए लोगों की बड़ी जनसभा हुई। इसके बाद किसान छोटी-छोटी टोलियों में बैठकर मंथन करते नजर आए। किसान दिनभर आंदोलन को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा करते रहे। इसके अलावा किस प्रकार सरकार उनकी मांग पूरी कर सकती है इस पर विचार किया जाता है। युवा किसान हरदीप नैन ने बताया कि सरकार किसानों को कुचलना चाहती है। यदि इस देश से किसान खत्म हो गया तो फिर देश का अस्तित्व ही नहीं बचेगा। किसान यदि संपन्न होगा तो देश भी संपन्न होगा। लेकिन सरकार को यह बात समझ में नहीं आ रही है।
लंगर में भी रहती है दिनभर भीड़
बॉर्डर पर इस समय लगभग 10 हजार किसान हैं, इसलिए दो-तीन जगह लंगर की व्यवस्था की गई है। दिनभर बॉर्डर पर लंगर चलता रहता है। लंगर बनाने वाले दिनभर लंगर बनाते हैं। सुबह के बाद शाम के लंगर की तैयारियां शुरू हो जाती है। आसपास के गांवों से दूध तथा लस्सी भी आती रहती है। किसानों का कहना है कि आसपास के गांवों के लोग उनका भरपूर सहयोग कर रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि जो भी आदेश आएंगे वह उसके अनुसार कार्य करने के लिए तैयार हैं। वहीं दूसरी तरफ पुलिस भी पूरा दिन मुस्तैद रही। किसान दिनभर अपने काम भी निपटाते रहे। कुछ लोग कपड़े धो रहे थे तो कुछ सफाई करते नजर आए।
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किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़, दलजीत सेरसा, नफे सिंह ने कहा कि वह लोग दिल्ली कूच के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। जल्द ही किसान इस बारे में फैसला लेंगे कि क्या करना है। इसके बाद ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगी। यदि वह लोग दिल्ली नहीं जा सके तो फिर यहीं पर डेरा जमाए बैठे रहेंगे। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती तक तक यहीं पर डटे रहेंगे। किसानाें ने कहा कि जिस प्रकार डेढ़ साल तक दिल्ली बॉर्डर पर बैठे थे, उसी प्रकार इस बॉर्डर को भी उन्होंने अब अपना घर बना लिया है। आसपास के लोगों का खूब प्यार मिल रहा है। यहां पर उन्हें किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं है। किसानों की लड़ाई अपने हक के लिए है। वह किसी सरकार या व्यक्ति के खिलाफ नहीं हैं। उनको अपनी मांग पूरी करवानी है। यदि उनकी मांग अभी पूरी हो जाती है तो वह लौट जाएंगे।
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छोटी-छोटी टोलियों में बैठकर होता रहा मंथन
कुछ देर के लिए लोगों की बड़ी जनसभा हुई। इसके बाद किसान छोटी-छोटी टोलियों में बैठकर मंथन करते नजर आए। किसान दिनभर आंदोलन को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा करते रहे। इसके अलावा किस प्रकार सरकार उनकी मांग पूरी कर सकती है इस पर विचार किया जाता है। युवा किसान हरदीप नैन ने बताया कि सरकार किसानों को कुचलना चाहती है। यदि इस देश से किसान खत्म हो गया तो फिर देश का अस्तित्व ही नहीं बचेगा। किसान यदि संपन्न होगा तो देश भी संपन्न होगा। लेकिन सरकार को यह बात समझ में नहीं आ रही है।
लंगर में भी रहती है दिनभर भीड़
बॉर्डर पर इस समय लगभग 10 हजार किसान हैं, इसलिए दो-तीन जगह लंगर की व्यवस्था की गई है। दिनभर बॉर्डर पर लंगर चलता रहता है। लंगर बनाने वाले दिनभर लंगर बनाते हैं। सुबह के बाद शाम के लंगर की तैयारियां शुरू हो जाती है। आसपास के गांवों से दूध तथा लस्सी भी आती रहती है। किसानों का कहना है कि आसपास के गांवों के लोग उनका भरपूर सहयोग कर रहे हैं।