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Jind News: सीआरएसूय की जमीन पर उगाई गेहूं की फसल, उठे सवाल
Wed, 23 Apr 2025 01:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 23 Apr 2025 01:00 AM IST
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जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति न होने के चलते अनेक प्रकार की खामियां सामने आ रही हैं। इनकी संभाल करने वाला कोई नहीं है। आए दिन छात्र संगठन पत्रकारों को ईमेल भेज कर खामियों से अवगत करवा रहे हैं।
मंगलवार को इनसो के छात्र नेता मोनू मलिक ने सीएम, वीसी व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को ई-मेल भेज कर आरोप लगाया कि चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में बेर के बाग का ठेका तो दिया हुआ है। परंतु ठेकेदार अथवा विश्वविद्यालय प्रशासन के इशारों पर अवैध रूप से गेहूं व सरसों की फसल उगाई गई है। यदि गेहूं और सरसों की फसल जो यूनिवर्सिटी की जमीन पर लगाई गई है। इसको ठेके पर दिया जाता तो यूनिवर्सिटी को लाखों रुपये की आमदनी होती। विश्वविद्यालय की पुरानी कैंटीन के पास बन रही लाइब्रेरी के पीछे गेहूं की फसल उगाई गई है। अब इसको काट कर बेचने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त पुरुष हॉस्टल के साथ नर्सरी के आसपास सरसों की फसल उगाई गई। विश्वविद्यालय ने न तो इसके लिए ठेके का कोई नोटिस जारी किया और न ही किसी प्रकार की बोली लगाई गई। इससे बिल्कुल स्पष्ट है कि यह फसल विश्वविद्यालय के प्रभावशाली व्यक्तियों के संरक्षण से लगाई गई है। मोनू मलिक ने डीसी से भी इस फसल को अपने कब्जे में लेने व इसकी बोली लगवा कर इसका पैसा विश्वविद्यालय के खजाने में जमा करवाने की मांग की है।
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मंगलवार को इनसो के छात्र नेता मोनू मलिक ने सीएम, वीसी व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को ई-मेल भेज कर आरोप लगाया कि चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में बेर के बाग का ठेका तो दिया हुआ है। परंतु ठेकेदार अथवा विश्वविद्यालय प्रशासन के इशारों पर अवैध रूप से गेहूं व सरसों की फसल उगाई गई है। यदि गेहूं और सरसों की फसल जो यूनिवर्सिटी की जमीन पर लगाई गई है। इसको ठेके पर दिया जाता तो यूनिवर्सिटी को लाखों रुपये की आमदनी होती। विश्वविद्यालय की पुरानी कैंटीन के पास बन रही लाइब्रेरी के पीछे गेहूं की फसल उगाई गई है। अब इसको काट कर बेचने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त पुरुष हॉस्टल के साथ नर्सरी के आसपास सरसों की फसल उगाई गई। विश्वविद्यालय ने न तो इसके लिए ठेके का कोई नोटिस जारी किया और न ही किसी प्रकार की बोली लगाई गई। इससे बिल्कुल स्पष्ट है कि यह फसल विश्वविद्यालय के प्रभावशाली व्यक्तियों के संरक्षण से लगाई गई है। मोनू मलिक ने डीसी से भी इस फसल को अपने कब्जे में लेने व इसकी बोली लगवा कर इसका पैसा विश्वविद्यालय के खजाने में जमा करवाने की मांग की है।
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