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Teachers day: 70 साल पहले दादी ने जलाई ज्ञान की अलख, आज तीसरी पीढ़ी बच्चों का संवार रही भविष्य

Mon, 05 Sep 2022 03:02 AM IST
भूपेंद्र सिंह प्रमोद राठी, संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
प्रमोद राठी, संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 05 Sep 2022 03:02 AM IST
सार

जुलानी की स्व. रूकमणी की प्रेरणा से तीन बेटे, चार पौत्र-पौत्री और एक पुत्रवधू शिक्षक बने हैं। एक बेटे को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ज्ञानी जैल सिंह के हाथों राष्ट्रपति अवॉर्ड मिला था। 

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Family of Rukmani has been shaping the future of children in in studies for three generations
स्व. रूकमणी। स्व. रामकुमार। जसमेर सिंह। युद्धवीर सहारण। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हरियाणा के जींद जिले के गांव जुलानी की महिला रूकमणी ने अपने पांच बेटों को पढ़ाकर नौकरी लगवाया, जिनमें तीन बेटे पढ़कर शिक्षक बनें। उन्हीं की प्रेरणा से उसके चार पौत्र-पौत्री और पुत्रवधू आज शिक्षक बनकर बच्चों का भविष्य रोशन कर रहे हैं। रूकमणी आज भी गांव में शिक्षिका के रूप में मिसाल हैं, उनके द्वारा पढ़ाए हुए गांव के कई व्यक्ति बड़े-बड़े पदों तक पहुंचे। अब वे सेवानिवृत्त होकर घर आ चुके हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सेवाओं के लिए उनका एक बेटा रामकुमार राष्ट्रपति अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

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वर्ष 1991 में दुनिया छोड़ चुकी रूकमणी आजादी के समय की पांचवीं पास थी। उस समय तो लड़कियों का पढ़ना-लिखना तो दूर घर से बाहर निकलने पर भी पाबंदी थी। अपने मायके पाली नारनौंद (हिसार) से पांचवी पढ़कर आई रूकमणी ने वर्ष 1952-53 में अपनी ससुराल जुलानी की चौपाल में नि:शुल्क पढ़ाना शुरू किया था।
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उस समय पढ़ाई के बारे में कम ही लोग जागरूक थे। शुरुआत में दो-चार बच्चे ही पढ़ने के लिए आते थे। अपने छह बेटों को भी शुरुआती शिक्षा उसी ने दी थी। बड़ा बेटा सतबीर पशु चिकित्सक बन गया। उससे छोटा रामकुमार जेबीटी अध्यापक, जसमेर सिंह भी जेबीटी अध्यापक, जगमेंद्र सिंह कला अध्यापक, बिजेंद्र सिंह रेलवे पुलिस में चयनित हो गया। सबसे छोटा भूपेंद्र सिंह को नौकरी नहीं मिली तो वह खेती-बाड़ी करने लगा।

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चार पौत्र-पौत्री और पुत्रवधू फैला रहे ज्ञान का उजियारा  
रूकमणी के परिवार में उनके दो पौत्र, दो पौत्री और एक पुत्रवधू शिक्षक बनकर बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। रूकमणी के पौत्र और जसमेर सिंह के पुत्र युद्धवीर सहारण जेबीटी अध्यापक हैं और वह दिल्लूवाला गांव में सेवाएं दे रहा हैं। रामकुमार के पुत्र कर्ण सिंह भी जेबीटी अध्यापक है और वह बरसोला स्कूल में तैनात हैं। उनकी पत्नी सुमन देवी भी जेबीटी अध्यापिका है और वह ढांडाखेड़ी में बच्चों को पढ़ा रही है। रूकमणी की पौत्री सुमन झांझ कलां स्थित स्कूल में प्राध्यापिका है। रूकमणी के सबसे छोटे बेटे भूपेंद्र सिंह बेटी अनिता देवी भी जेबीटी अध्यापक है उनकी ड्यूटी गांव ललिता खेड़ा में है। 

राष्ट्रपति अवार्ड से हो चुके हैं सम्मानित
रूकमणी के बेटे रामकुमार ने शिक्षक  के तौर पर बिटानी, कलावती, जुलानी के अलावा कई गांवों में अपनी सेवाएं दी थीं। उन्होंने अपने भाई जसमेर सिंह के साथ जुलानी में बच्चों को पढ़ाया। वह स्कूल में ही रहकर बच्चों को दिन और रात पढ़ाते थे। उसकी बदौलत से हर साल कई बच्चे मेरिट लेकर पास होते थे। इस उपलब्धि पर वर्ष 1985 में दिल्ली के विज्ञान भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ज्ञानी जैल सिंह ने उन्हें राष्ट्रपति अवॉर्ड देकर सम्मानित किया था। 

दादी की प्रेरणा से शिक्षित हुआ परिवार
अलेवा क्षेत्र के गांव दिल्लूवाला के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में तैनात अध्यापक युद्धवीर सहारण का कहना है कि उनकी दादी की प्रेरणा से उनका परिवार शिक्षित हुआ। उनके परिवार में शुरुआत से ही शिक्षा की तरफ रूझान रहा। उसकी बदौलत से आज परिवार में दस से ज्यादा सदस्य अलग-अलग विभागों में तैनात हैं। 

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