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Jind News: 55 की उम्र में भी नहीं थमे कदम, रोज पांच किलोमीटर दौड़ रहीं ओमपति धनखड़
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जींद। उम्र महज एक आंकड़ा है, यह बात 55 वर्षीय ओमपति धनखड़ अपनी मेहनत और अनुशासन से साबित कर रही हैं। वह प्रतिदिन सुबह चार बजे पुलिस लाइन पहुंचकर पांच किलोमीटर दौड़ लगाती हैं और वर्षभर नियमित अभ्यास करती हैं।
फिटनेस और खेल के प्रति उनका जुनून ऐसा है कि आज भी वह 100 और 200 मीटर की दौड़ में युवतियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। जिले में आयोजित महिला वर्ग की प्रतियोगिताओं में ओमपति धनखड़ लगातार 100, 200 और 400 मीटर दौड़ में पदक जीत रही हैं। तीन माह पहले केरल में आयोजित मास्टर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने 100 मीटर दौड़ में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम किया था।
इसके अलावा डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भी वह स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। ओमपति धनखड़ का कहना है कि नियमित अभ्यास और अनुशासन ही उनकी सफलता का राज है। वह वर्षभर बिना किसी रुकावट के अभ्यास करती हैं और हर प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करती हैं।
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उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि 55 वर्ष की उम्र में भी वह ट्रैक पर युवाओं जैसी फुर्ती के साथ दौड़ती नजर आती हैं। उनके परिवार का भी उन्हें पूरा सहयोग मिलता है। शहर से बाहर होने वाली प्रतियोगिताओं में परिजन उनका उत्साह बढ़ाते हैं और स्वयं उन्हें प्रतियोगिता स्थल तक लेकर जाते हैं। वहीं शहर में आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं में वह खुद पहुंचकर हिस्सा लेती हैं।
महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा धनखड़
ओमपति धनखड़ की उपलब्धियां जिले की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनका मानना है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और नियमित मेहनत की जाए तो उम्र कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।
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फिटनेस और खेल के प्रति उनका जुनून ऐसा है कि आज भी वह 100 और 200 मीटर की दौड़ में युवतियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। जिले में आयोजित महिला वर्ग की प्रतियोगिताओं में ओमपति धनखड़ लगातार 100, 200 और 400 मीटर दौड़ में पदक जीत रही हैं। तीन माह पहले केरल में आयोजित मास्टर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने 100 मीटर दौड़ में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम किया था।
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इसके अलावा डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भी वह स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। ओमपति धनखड़ का कहना है कि नियमित अभ्यास और अनुशासन ही उनकी सफलता का राज है। वह वर्षभर बिना किसी रुकावट के अभ्यास करती हैं और हर प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करती हैं।
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उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि 55 वर्ष की उम्र में भी वह ट्रैक पर युवाओं जैसी फुर्ती के साथ दौड़ती नजर आती हैं। उनके परिवार का भी उन्हें पूरा सहयोग मिलता है। शहर से बाहर होने वाली प्रतियोगिताओं में परिजन उनका उत्साह बढ़ाते हैं और स्वयं उन्हें प्रतियोगिता स्थल तक लेकर जाते हैं। वहीं शहर में आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं में वह खुद पहुंचकर हिस्सा लेती हैं।
महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा धनखड़
ओमपति धनखड़ की उपलब्धियां जिले की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनका मानना है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और नियमित मेहनत की जाए तो उम्र कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।