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Jind News: पिता का साया उठ जाने पर भी राजपाल का नहीं टूटा हौसला

Wed, 07 Jan 2026 12:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Wed, 07 Jan 2026 12:30 AM IST
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Even after the death of his father, Rajpal did not lose heart.
06जेएनडी07: राजपाल रेढू । - फोटो : तेंदुए के हमले में घायल वीरेंद्र पाल।
जींद। राजपाल रेढू का जीवन संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भरता की ऐसी कहानी है, जो हर युवा को सपनों के लिए डटे रहने का संदेश देती है। साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था लेकिन उन्होंने हर कठिनाई को अपनी ताकत बनाया।
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राजपाल रेढू ने खेल जीवन की शुरुआत वर्ष 2009 में कोच जितेंद्र बांगड़ के मार्गदर्शन में की। क्रिकेट खेल में अधिक रुचि थी लेकिन समय के साथ उन्होंने थ्रोबॉल को पेशेवर खेल के रूप में चुना। पिता रघुबीर रेढू ग्रुप डी सरकारी कर्मचारी थे। राजपाल का बचपन गांव शाहपुर के खेतों में बीता। परिवार साधारण था लेकिन खेल के प्रति उनका जुनून असाधारण था। बेहतर प्रशिक्षण की तलाश में उन्होंने शिवाजी स्टेडियम पानीपत में कोच राजेश टुर्ण के पास अभ्यास शुरू किया।
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यहां उनकी तकनीक, फिटनेस और आत्मविश्वास में सुधार हुआ। जीवन ने उस समय कठिन परीक्षा ली जब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की पूरी जिम्मेदारी राजपाल के कंधों पर आ गई। इस मुश्किल दौर में भी उन्होंने हार नहीं मानी। परिवार का सहारा बनने के लिए उन्होंने निजी स्कूलों में कोचिंग देना शुरू किया।
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उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। फिलहाल लैक्रोस खेल में सक्रिय रूप से प्रशिक्षण दे रहे हैं। सीनियर हरियाणा लैक्रोस टीम के मुख्य कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके प्रशिक्षित खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीते हैं और कुछ खिलाड़ियों का चयन भारतीय टीम के लिए भी हुआ है। राजपाल रेढू की जीवन यात्रा यह साबित करती है कि सच्ची सफलता परिस्थितियों से नहीं, बल्कि जज्बे और मेहनत से तय होती है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच जितेंद्र बांगड़, डॉ. राजेश टुर्ण और सोमनाथ सैनी को दिया।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीन स्वर्ण पदक जीते
राजपाल रेढू ने थ्रोबॉल में निरंतर प्रगति की और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय थ्रोबॉल प्रतियोगिताओं में तीन स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई। खेल के साथ उन्होंने शिक्षा को भी समान महत्व दिया। राजपाल ने फिजिकल एजुकेशन में मास्टर्स की डिग्री हासिल की और टीजीटी और पीजीटी, एचटीईटी और की पढ़ाई की। इससे उन्होंने खेल और शिक्षा दोनों को समान रखा।
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