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Jind News: जोश बरकरार...रामलीला का सबसे बड़ा आकर्षण बने 70 वर्ष के कलाकार रामनिवास
Sun, 14 Sep 2025 11:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 14 Sep 2025 11:36 PM IST
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14जेएनडी11: रामनिवास जैन।
नरवाना। रामलीला का नाम आते ही दर्शकों की आंखों में देवी-देवताओं के दिव्य रूप, ऐतिहासिक प्रसंग और दमदार संवाद गूंजने लगते हैं। अगर यह चर्चा नरवाना की रामलीला की हो तो रामनिवास जैन का जिक्र न हो, ऐसा हो नहीं सकता। लगभग 70 वर्ष की आयु में भी उनका वही पुराना जोश और दमखम बरकरार है जो दर्शकों को हर बार मंत्रमुग्ध कर देता है।
पिछले पचास वर्षों से रामनिवास जैन लगातार मंचन से जुड़े हुए हैं। विश्वामित्र, बूढ़ा मारीच और परशुराम जैसे किरदारों को उन्होंने इस तरह जिया है कि दर्शक उन्हें असली रूप में देखने का अनुभव करते हैं। उनकी संवाद अदायगी और चेहरे पर उमड़ती भाव-भंगिमाएं हर बार दर्शकों को रामयुग की याद दिला देती हैं।
यही कारण है कि नरवाना की रामलीला रामनिवास जैन के बिना अधूरी है। रामनिवास जैन के मंच पर आते ही उनका व्यक्तित्व पूरी तरह बदल जाता है। जब वह तपस्वी विश्वामित्र बनते हैं तो उनकी गंभीरता और वाणी का तेज दर्शकों को प्रभावित कर देता है। बूढ़े मारीच के रूप में छल और धूर्तता से भरा उनका अभिनय दर्शकों को चौंका देता है। जब वह परशुराम बनकर मंच पर आते हैं तो उनके जोशीले और तेजस्वी रूप से रामलीला का वातावरण गूंज उठता है।
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स्थानीय दर्शक कहते हैं कि नरवाना की रामलीला का असली आकर्षण रामनिवास जैन ही हैं। उनके बिना मंचन फीका पड़ जाता है। उनकी मेहनत और लगन नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा है। बच्चे और युवा भी उन्हें देखकर अभिनय और संवाद कला सीखते हैं।
मंडी में आढ़त का काम करते हैं रामनिवास
व्यवसाय से रामनिवास जैन मंडी में आढ़त का काम करते हैं और कमीशन एजेंट भी हैं। दिनभर की व्यस्तता और कारोबार के बावजूद उनका अभिनय प्रेम कभी कम नहीं हुआ। वह खुद कहते हैं कि रामलीला मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। जब तक शरीर साथ देगा, मैं इस सेवा को निभाता रहूंगा।
मंच संचालन भी करते हैं रामनिवास
रामनिवास जैन सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रहते। वह मंच संचालन की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। मंच से आने वाले दृश्यों की जानकारी देना, संवादों को और प्रभावशाली बनाना और बीच-बीच में दर्शकों का आभार व्यक्त करना यह सब वह सहजता से करते हैं। उनकी इस शैली से रामलीला का हर दृश्य और अधिक जीवंत और रोचक हो जाता है।
प्रमुख किरदार
विश्वामित्र–गंभीरता और तपस्वी छवि का सजीव रूप
बूढ़ा मारीच–छल और धूर्तता से भरा दमदार अभिनय
परशुराम–जोशीला, तेजस्वी और गुस्सैल चरित्र का सटीक प्रदर्शन
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पिछले पचास वर्षों से रामनिवास जैन लगातार मंचन से जुड़े हुए हैं। विश्वामित्र, बूढ़ा मारीच और परशुराम जैसे किरदारों को उन्होंने इस तरह जिया है कि दर्शक उन्हें असली रूप में देखने का अनुभव करते हैं। उनकी संवाद अदायगी और चेहरे पर उमड़ती भाव-भंगिमाएं हर बार दर्शकों को रामयुग की याद दिला देती हैं।
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यही कारण है कि नरवाना की रामलीला रामनिवास जैन के बिना अधूरी है। रामनिवास जैन के मंच पर आते ही उनका व्यक्तित्व पूरी तरह बदल जाता है। जब वह तपस्वी विश्वामित्र बनते हैं तो उनकी गंभीरता और वाणी का तेज दर्शकों को प्रभावित कर देता है। बूढ़े मारीच के रूप में छल और धूर्तता से भरा उनका अभिनय दर्शकों को चौंका देता है। जब वह परशुराम बनकर मंच पर आते हैं तो उनके जोशीले और तेजस्वी रूप से रामलीला का वातावरण गूंज उठता है।
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स्थानीय दर्शक कहते हैं कि नरवाना की रामलीला का असली आकर्षण रामनिवास जैन ही हैं। उनके बिना मंचन फीका पड़ जाता है। उनकी मेहनत और लगन नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा है। बच्चे और युवा भी उन्हें देखकर अभिनय और संवाद कला सीखते हैं।
मंडी में आढ़त का काम करते हैं रामनिवास
व्यवसाय से रामनिवास जैन मंडी में आढ़त का काम करते हैं और कमीशन एजेंट भी हैं। दिनभर की व्यस्तता और कारोबार के बावजूद उनका अभिनय प्रेम कभी कम नहीं हुआ। वह खुद कहते हैं कि रामलीला मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। जब तक शरीर साथ देगा, मैं इस सेवा को निभाता रहूंगा।
मंच संचालन भी करते हैं रामनिवास
रामनिवास जैन सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रहते। वह मंच संचालन की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। मंच से आने वाले दृश्यों की जानकारी देना, संवादों को और प्रभावशाली बनाना और बीच-बीच में दर्शकों का आभार व्यक्त करना यह सब वह सहजता से करते हैं। उनकी इस शैली से रामलीला का हर दृश्य और अधिक जीवंत और रोचक हो जाता है।
प्रमुख किरदार
विश्वामित्र–गंभीरता और तपस्वी छवि का सजीव रूप
बूढ़ा मारीच–छल और धूर्तता से भरा दमदार अभिनय
परशुराम–जोशीला, तेजस्वी और गुस्सैल चरित्र का सटीक प्रदर्शन