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Jind News: किसानों को सब्जी, फल व फूलों की खेती को अपनाने पर दिया जोर
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जींद। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की तरफ से नई अनाज मंडी सफीदों में मंगलवार को फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तरीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक एवं लाभकारी फसलों की ओर प्रेरित कर उनकी आय में वृद्धि करना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बागवानी विभाग के एचडीओ सफीदों अभिषेक ने किसानों को विभिन्न बागवानी योजनाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने सब्जी, फल एवं फूलों की खेती को अपनाने के लाभ और सरकार की ओर से प्रदान की जा रही अनुदान योजनाओं के बारे में अवगत कराया।
किसानों को दलहन, तिलहन, मोटे अनाज एवं बागवानी फसलों को अपनाने की सलाह दी गई। बदलते जलवायु परिदृश्य एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए फसल चक्र में परिवर्तन समय की आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि रबी फसलों में बढ़ते तापमान एवं कीट प्रकोप से होने वाले नुकसान की रोकथाम संबंधी नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को समेकित कीट प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा समय पर सिंचाई प्रबंधन अपनाने का आह्वान किया।
पशुपालन को आय का सहायक स्रोत बताते हुए डेयरी, भेड़-बकरी पालन एवं अन्य गतिविधियों के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी। कार्यक्रम में जिला स्तर के विभिन्न गांवों से लगभग 600 किसानों ने भाग लेकर विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम में बागवानी विभाग के एचडीओ सफीदों अभिषेक ने किसानों को विभिन्न बागवानी योजनाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने सब्जी, फल एवं फूलों की खेती को अपनाने के लाभ और सरकार की ओर से प्रदान की जा रही अनुदान योजनाओं के बारे में अवगत कराया।
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किसानों को दलहन, तिलहन, मोटे अनाज एवं बागवानी फसलों को अपनाने की सलाह दी गई। बदलते जलवायु परिदृश्य एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए फसल चक्र में परिवर्तन समय की आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि रबी फसलों में बढ़ते तापमान एवं कीट प्रकोप से होने वाले नुकसान की रोकथाम संबंधी नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को समेकित कीट प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा समय पर सिंचाई प्रबंधन अपनाने का आह्वान किया।
पशुपालन को आय का सहायक स्रोत बताते हुए डेयरी, भेड़-बकरी पालन एवं अन्य गतिविधियों के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी। कार्यक्रम में जिला स्तर के विभिन्न गांवों से लगभग 600 किसानों ने भाग लेकर विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।