{"_id":"676461c7bf5bd8505a0a583f","slug":"due-to-shortage-of-doctors-how-will-civil-hospital-pass-the-investigation-of-kayakalp-team-jind-news-c-199-1-sroh1009-127285-2024-12-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: चिकित्सकों की कमी से कायाकल्प टीम की जांच में कैसे पास होगा नागरिक अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: चिकित्सकों की कमी से कायाकल्प टीम की जांच में कैसे पास होगा नागरिक अस्पताल
Thu, 19 Dec 2024 11:41 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 19 Dec 2024 11:41 PM IST
विज्ञापन
19जेएनडी24: अस्पताल का बंद पड़ा आक्सीजन प्लांट और बिना पार्किंग मुख्य गेट पर खड़ी गाड़ियां। संव
जींद। नागरिक अस्पताल जींद में आज कायाकल्प की टीम दूसरी बार जांच करने के लिए आ रही है। टीम के पहुंचने से पहले ही अस्पताल परिसर और वार्डों की व्यापक सफाई की गई। टीम को व्यवस्थाएं दुुरुस्त दिखाने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंथन किया।
अस्पताल के हालात ठीक दिखाने के लिए आपातकालीन कक्ष, सभी वार्ड के अलावा लैब, दवाखाने में व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के बाद कायाकल्प टीम अस्पताल को रैंक देगी। अगर 80 से अधिक नंबर अस्पताल को मिलते हैं तो अस्पताल को बजट मिलेगा। टीम में एमओ सीएचसी भूना डाॅ. योगेश यादव, डाॅ. घनश्याम, सीएचसी भूना से डाॅ. हीना शामिल रहेंगी।
स्वच्छ भारत के तहत कायाकल्प कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसमें अस्पतालों में आपसी प्रतिस्पर्धा से स्वच्छता, गुणवत्ता और बेहतर सुविधाओं एवं सेवाओं में बढ़ोतरी करवाना है। टीम की तरफ से इंफेक्शन नियंत्रण, इंफ्रास्ट्रक्चर, साफ-सफाई, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, शौचालयों की स्वच्छता की जांच की जाती है। इसके बाद टीम की तरफ से 100 नंबर से रैंक दिए जाते हैं। अस्पताल प्रशासन को उसी रैंक के आधार पर नगद पुरस्कार मिलता है।
विज्ञापन
ऑक्सीजन प्लांट बंद, नहीं हो पा रहा शुरू
नागरिक अस्पताल में कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया था। कुछ समय तक इस प्लांट ने सही तरीके से काम किया, लेकिन अब एक साल से बंद है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बार-बार रिमाइंडर भी भेजे, मगर इसे ठीक नहीं किया गया। ऐसे में अगर फिर से कोराना जैसी कोई बीमारी आती है तो ऑक्सीजन के लिए अस्पताल फिर से गैस सिलिंडरों पर ही निर्भर होगा। चिकित्सकों की कमी के बावजूद जैसे-तैसे आईसीयू चलाया जा रहा है। मरीजों को पूरी दवाइयां भी नहीं मिल पा रही हैं।
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा अस्पताल
नागरिक अस्पताल की बात की जाए तो यहां 100-100 बेड के दो भवन हैं। अस्पताल को 55 चिकित्सकों की जरूरत है, मगर 24 चिकित्सक ही काम कर रहे हैं। ऐसे में जितने भी संसाधन अस्पताल प्रशासन के पास मौजूद है, उन्हीं से यहां आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी 1600 तक होती है।
नागरिक अस्पताल में नहीं है पार्किंग व्यवस्था
नागरिक अस्पताल में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। वाहनों को लाइन में लगवाने के लिए एचकेआरएनएल के तहत लगे कर्मियों की ड्यूटी समय-समय पर लगाई जाती है, लेकिन यह कर्मी अपना काम सही तरीके से नहीं करते हैं। इसके चलते अस्पताल के नए भवन के सामने मुख्य गेट पर, नए भवन के पीछे, ऑक्सीजन प्लांट के साथ वाहन चालक अपने वाहनों को खड़ा कर देते हैं।
नागरिक अस्पताल का आज कायाकल्प टीम दौरा करेगी। अस्पताल की व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। इसके आधार पर अस्पताल को अंक प्राप्त होंगे। अस्पताल के पास जितने भी संसाधन हैं, उनसे बेहतरीन काम चलाने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल का रिकॉर्ड दुरुस्त है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक व्यवस्थाएं बनाई गई हैं।
विज्ञापन
अस्पताल के हालात ठीक दिखाने के लिए आपातकालीन कक्ष, सभी वार्ड के अलावा लैब, दवाखाने में व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के बाद कायाकल्प टीम अस्पताल को रैंक देगी। अगर 80 से अधिक नंबर अस्पताल को मिलते हैं तो अस्पताल को बजट मिलेगा। टीम में एमओ सीएचसी भूना डाॅ. योगेश यादव, डाॅ. घनश्याम, सीएचसी भूना से डाॅ. हीना शामिल रहेंगी।
विज्ञापन
स्वच्छ भारत के तहत कायाकल्प कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसमें अस्पतालों में आपसी प्रतिस्पर्धा से स्वच्छता, गुणवत्ता और बेहतर सुविधाओं एवं सेवाओं में बढ़ोतरी करवाना है। टीम की तरफ से इंफेक्शन नियंत्रण, इंफ्रास्ट्रक्चर, साफ-सफाई, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, शौचालयों की स्वच्छता की जांच की जाती है। इसके बाद टीम की तरफ से 100 नंबर से रैंक दिए जाते हैं। अस्पताल प्रशासन को उसी रैंक के आधार पर नगद पुरस्कार मिलता है।
विज्ञापन
ऑक्सीजन प्लांट बंद, नहीं हो पा रहा शुरू
नागरिक अस्पताल में कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया था। कुछ समय तक इस प्लांट ने सही तरीके से काम किया, लेकिन अब एक साल से बंद है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बार-बार रिमाइंडर भी भेजे, मगर इसे ठीक नहीं किया गया। ऐसे में अगर फिर से कोराना जैसी कोई बीमारी आती है तो ऑक्सीजन के लिए अस्पताल फिर से गैस सिलिंडरों पर ही निर्भर होगा। चिकित्सकों की कमी के बावजूद जैसे-तैसे आईसीयू चलाया जा रहा है। मरीजों को पूरी दवाइयां भी नहीं मिल पा रही हैं।
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा अस्पताल
नागरिक अस्पताल की बात की जाए तो यहां 100-100 बेड के दो भवन हैं। अस्पताल को 55 चिकित्सकों की जरूरत है, मगर 24 चिकित्सक ही काम कर रहे हैं। ऐसे में जितने भी संसाधन अस्पताल प्रशासन के पास मौजूद है, उन्हीं से यहां आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाए जाने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी 1600 तक होती है।
नागरिक अस्पताल में नहीं है पार्किंग व्यवस्था
नागरिक अस्पताल में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। वाहनों को लाइन में लगवाने के लिए एचकेआरएनएल के तहत लगे कर्मियों की ड्यूटी समय-समय पर लगाई जाती है, लेकिन यह कर्मी अपना काम सही तरीके से नहीं करते हैं। इसके चलते अस्पताल के नए भवन के सामने मुख्य गेट पर, नए भवन के पीछे, ऑक्सीजन प्लांट के साथ वाहन चालक अपने वाहनों को खड़ा कर देते हैं।
नागरिक अस्पताल का आज कायाकल्प टीम दौरा करेगी। अस्पताल की व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। इसके आधार पर अस्पताल को अंक प्राप्त होंगे। अस्पताल के पास जितने भी संसाधन हैं, उनसे बेहतरीन काम चलाने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल का रिकॉर्ड दुरुस्त है। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक व्यवस्थाएं बनाई गई हैं।

19जेएनडी24: अस्पताल का बंद पड़ा आक्सीजन प्लांट और बिना पार्किंग मुख्य गेट पर खड़ी गाड़ियां। संव