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Jind News: माता-पिता की सलामती के लिए हरिद्वार से गंगाजल लाई ड्राइवर छोरी
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11जेएनडी11: नीशू देशवाल व उसका भाई माता पिता को गंगाजल से मंदिर परिसर में स्नान करवाते हुए। स्र
- फोटो : 1
जींद। सोशल मीडिया पर ड्राइवर छोरी के नाम से पहचान बना चुकी हाडवा गांव की नीशू देशवाल माता-पिता के बेहतर स्वास्थ्य की कामना लेकर हरिद्वार से पैदल कांवड़ में 11 लीटर गंगाजल लेकर अपने गांव पहुंचीं।
मंगलवार को मंदिर में पहले भगवान शिव का जलाभिषेक किया और इसके बाद माता सुमनलता और पिता मुकेश देशवाल को गंगाजल से स्नान कराया और उनके स्वस्थ रहने की प्रार्थना की। निशू ने बताया कि भगवान शिव में उनकी गहरी आस्था है। पिता की तबीयत खराब रहने के कारण उनके मन में लंबे समय से इच्छा थी कि वह हरिद्वार से गंगाजल लाकर माता-पिता को स्नान करवाएं। यह उनकी पहली कांवड़ यात्रा थी।
ग्रामीण निशू की इस पहल को श्रवण कुमार की माता-पिता के प्रति सेवा भावना से जोड़कर देख रहे हैं। अंतर बस इतना है कि श्रवण कुमार माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर लेकर निकले थे जबकि निशू उन्हें हरिद्वार तक नहीं ले जा सकीं।
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निशू की बुआ रानी की भी तबीयत भी खराब चल रही है। निशू ने बुआ को भी गंगाजल पिलाया और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
पिता की बीमारी ने बनाया ड्राइवर छोरी
निशू की कहानी में सेवा के साथ संघर्ष भी जुड़ा है। पिता मुकेश देशवाल की तबीयत खराब रहने के दौरान निशू ने गाड़ी चलाना सीखा। इसके बाद उन्होंने रोडवेज से प्रशिक्षण लिया और भारी वाहन चलाने का लाइसेंस हासिल किया। आज वह अपने काम के साथ सोशल मीडिया पर ड्राइवर छोरी के नाम से पहचान बना चुकी हैं। निशू की यह कांवड़ यात्रा सिर्फ हरिद्वार से गंगाजल लाने की कहानी नहीं है। यह उस बेटी की कहानी है जिसने अपने माता-पिता के लिए आस्था को संकल्प बनाया और संकल्प को सेवा में बदल दिया।
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मंगलवार को मंदिर में पहले भगवान शिव का जलाभिषेक किया और इसके बाद माता सुमनलता और पिता मुकेश देशवाल को गंगाजल से स्नान कराया और उनके स्वस्थ रहने की प्रार्थना की। निशू ने बताया कि भगवान शिव में उनकी गहरी आस्था है। पिता की तबीयत खराब रहने के कारण उनके मन में लंबे समय से इच्छा थी कि वह हरिद्वार से गंगाजल लाकर माता-पिता को स्नान करवाएं। यह उनकी पहली कांवड़ यात्रा थी।
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ग्रामीण निशू की इस पहल को श्रवण कुमार की माता-पिता के प्रति सेवा भावना से जोड़कर देख रहे हैं। अंतर बस इतना है कि श्रवण कुमार माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर लेकर निकले थे जबकि निशू उन्हें हरिद्वार तक नहीं ले जा सकीं।
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निशू की बुआ रानी की भी तबीयत भी खराब चल रही है। निशू ने बुआ को भी गंगाजल पिलाया और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
पिता की बीमारी ने बनाया ड्राइवर छोरी
निशू की कहानी में सेवा के साथ संघर्ष भी जुड़ा है। पिता मुकेश देशवाल की तबीयत खराब रहने के दौरान निशू ने गाड़ी चलाना सीखा। इसके बाद उन्होंने रोडवेज से प्रशिक्षण लिया और भारी वाहन चलाने का लाइसेंस हासिल किया। आज वह अपने काम के साथ सोशल मीडिया पर ड्राइवर छोरी के नाम से पहचान बना चुकी हैं। निशू की यह कांवड़ यात्रा सिर्फ हरिद्वार से गंगाजल लाने की कहानी नहीं है। यह उस बेटी की कहानी है जिसने अपने माता-पिता के लिए आस्था को संकल्प बनाया और संकल्प को सेवा में बदल दिया।