{"_id":"644039eed98c1a3ab90efe74","slug":"dreams-dont-come-true-in-a-day-it-takes-continuous-effort-jind-news-c-17-1-127827-2023-04-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: सपने एक दिन में पूरे नहीं होते, निरंतर प्रयास करना पड़ता है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: सपने एक दिन में पूरे नहीं होते, निरंतर प्रयास करना पड़ता है
विज्ञापन
जींद। डीसी डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सपने एक दिन में पूरे नहीं होते उनके लिए निरंतर प्रयास करने पड़ते हैं। विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य एवं मार्गदर्शन के लिए जिला प्रशासन द्वारा बुधवार को एक निजी होटल में कॅरियर काउंसलिंग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला के विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी स्कूलों के 9वीं कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के लगभग 1200 बच्चों ने भाग लिया। कार्यक्रम में जिला एवं दूसरे जिला से आईएएस, आर्मी ऑफिसर, एचसीएस अधिकारी को बुलाया गया एवं विद्यार्थियों से रूबरू करवाया गया। अधिकारियों ने विद्यार्थियों द्वारा कैरियर को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब दिए एवं करियर संबंधी उनके सही मार्ग को लेकर जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि उन्हें अपने जीवन में अपनी पसंद का कैरियर चुनकर लक्ष्य निर्धारित कर अपने आत्मविश्वास को बढ़ाना चाहिए। कई बार विद्यार्थी पड़ते रहते है लेकिन अपना लक्ष्य निर्धारित नहीं करते, जिससे उनको सफलता काफी लंबे समय के बाद प्राप्त होती है और नहीं भी। कैरियर एवं समय को बर्बाद करने वाली मोबाइल, वीडियो गेम, टेलिविजन, सोशल मीडिया जैसी चीजों से बचना चाहिए। उन्होंने हार्ड वर्क की बजाए स्मार्ट वर्क पर जोर दिया। लोहारू के एसडीएम आईएएस दीपक बाबू लाल कारवा ने भी अपने जीवन के अनुभवों को सांझा किया। इस अवसर पर नगराधीश अमित कुमार, एनसीसी जींद के प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्नल आरके गोयत, उपनिदेशक अमित कुमार पंवार, मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी अनिल मलिक ने भी मौजूद विद्यार्थियों को कैरियर संबंधी अपने-अपने सुझाव दिए।
कैरियर के लिए अच्छे आचरण वालों को बनाए रोल मॉडल
डीसी डा. मनोज कुमार ने विद्यार्थियों को बताया कि वे अपने कीमती समय की बचत करें एवं उसे व्यर्थ की बातों में न लगाएं। हमें यह तो पता है कि हमें क्या बनना है, लेकिन कैसे बनना यह मालूम नहीं है। आपके जीवन में महत्वपूर्ण क्या है, यह जानना बहुत जरूरी है। विद्यार्थी को सफल होने के लिए स्वयं के लिए ईमानदार बनने की जरूरत है। इसके लिए स्वयं की स्टडी करें, अपने भीतर झांक कर देखें और अवलोकन करें कि आज कितने घंटे पढ़ाई की है। विद्यार्थी को सफलता के लिए दो वर्ष में कम से कम पांच हजार घंटे एकाग्रता के साथ पढ़ाई करने की जरूरत है। अपने कैरियर के लिए रोडमैप बनाकर काउंसलिंग के लिए बुक चार्ट तैयार करें ताकि किसी भी विषय के लिए अपनी कमजोरी पहचान सकें। इसके लिए अपना एक अच्छे आचरणों वाले व्यक्ति को अपना रोल मॉडल भी बना सकते हंै। बच्चे अपने अभिभावकों व अध्यापकों तथा काउंसलरों के साथ सलाह करें कि मुझे इस क्षेत्र में जाने के लिए क्या करना होगा।
सरकारी स्कूल में पढ़कर डॉ. पंकज बने आईएएस
जींद के एसडीएम डॉ. पंकज ने अपने जीवन के अनुभवों को सांझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी शिक्षा सरकारी स्कूल से ही की है। पढ़ाई के दौरान वह क्लास का टॉपर न रहकर औसत विद्यार्थी रहा है लेकिन उसका शुरू से ही जज्बा था कि वह एमबीबीएस डॉक्टर बनें। एक-दो बार में उन्होंने डॉक्टर के लिए अपनी पढ़ाई उर्तीण की। इसके बाद यूपीएससी के लिए जुनून हो गया और उन्होंने आईपीएस परीक्षा को उर्तीण किया। फिर भी उसका मन शांत न रहा। तीसरी बार में उन्होंने आईएएस की परीक्षा पास की, जिसकी बदौलत आज वह यहां मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
कैरियर के लिए अच्छे आचरण वालों को बनाए रोल मॉडल
डीसी डा. मनोज कुमार ने विद्यार्थियों को बताया कि वे अपने कीमती समय की बचत करें एवं उसे व्यर्थ की बातों में न लगाएं। हमें यह तो पता है कि हमें क्या बनना है, लेकिन कैसे बनना यह मालूम नहीं है। आपके जीवन में महत्वपूर्ण क्या है, यह जानना बहुत जरूरी है। विद्यार्थी को सफल होने के लिए स्वयं के लिए ईमानदार बनने की जरूरत है। इसके लिए स्वयं की स्टडी करें, अपने भीतर झांक कर देखें और अवलोकन करें कि आज कितने घंटे पढ़ाई की है। विद्यार्थी को सफलता के लिए दो वर्ष में कम से कम पांच हजार घंटे एकाग्रता के साथ पढ़ाई करने की जरूरत है। अपने कैरियर के लिए रोडमैप बनाकर काउंसलिंग के लिए बुक चार्ट तैयार करें ताकि किसी भी विषय के लिए अपनी कमजोरी पहचान सकें। इसके लिए अपना एक अच्छे आचरणों वाले व्यक्ति को अपना रोल मॉडल भी बना सकते हंै। बच्चे अपने अभिभावकों व अध्यापकों तथा काउंसलरों के साथ सलाह करें कि मुझे इस क्षेत्र में जाने के लिए क्या करना होगा।
विज्ञापन
सरकारी स्कूल में पढ़कर डॉ. पंकज बने आईएएस
जींद के एसडीएम डॉ. पंकज ने अपने जीवन के अनुभवों को सांझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी शिक्षा सरकारी स्कूल से ही की है। पढ़ाई के दौरान वह क्लास का टॉपर न रहकर औसत विद्यार्थी रहा है लेकिन उसका शुरू से ही जज्बा था कि वह एमबीबीएस डॉक्टर बनें। एक-दो बार में उन्होंने डॉक्टर के लिए अपनी पढ़ाई उर्तीण की। इसके बाद यूपीएससी के लिए जुनून हो गया और उन्होंने आईपीएस परीक्षा को उर्तीण किया। फिर भी उसका मन शांत न रहा। तीसरी बार में उन्होंने आईएएस की परीक्षा पास की, जिसकी बदौलत आज वह यहां मौजूद रहे।
विज्ञापन