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Jind News: आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा फैला रहीं डॉ. सीमा
Sun, 14 Apr 2024 12:53 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 14 Apr 2024 12:53 AM IST
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डॉ. सीमा मलिक
- फोटो : संवाद
जींद। कुछ लोग अपने कर्तव्य के साथ-साथ समाज के लिए अपना दायित्व समझते हुए कार्य करते हैं। समाज के उत्थान में अपना अहम योगदान देते हैं। ऐसी ही शख्सियत हैं बड़ौदा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में कार्यरत अंग्रेजी की अध्यापिका डॉ. सीमा मलिक, जो अध्यापन कार्य ही नहीं, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए अभिभावक की भूमिका भी निभा रही हैं। इसके अलावा वह समाजसेविका के रूप में जरूरतमंद बच्चों का भविष्य उज्ज्वल करने के लिए हमेशा अग्रणी रहती हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को सशक्त बनाने के लिए डॉ. सीमा मलिक ने इस काम की शुरुआत लगभग 11 वर्ष पहले की थी। उन्हें जो भी छात्रा आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण पढ़ाई करने में असमर्थ दिखी, उससे बात कर उसकी सहायता करने की ठानी। इसके बाद प्रति वर्ष 20 से 30 छात्राओं की आर्थिक सहायता करने लगीं।
डॉ. सीमा समय-समय पर स्कूल में कई तरह के कार्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों को जागरूक करती हैं। इनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने लघु नाटिका, रागनी, रोल प्ले एक्टिविटी, क्ले मॉडलिंग, पेंटिंग और लघु नाटिका में गत वर्ष एससीईआरटी गुरुग्राम कला उत्सव कार्यक्रम में जिलास्तर से लेकर राज्यस्तर तक अपना स्थान बनाया था। (संवाद)
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अब तक 300 से ज्यादा बच्चों की सहायता कर चुकीं
डॉ. सीमा मलिक हर साल 20 से 30 जरूरतमंद बच्चों की स्कूल की फीस, वर्दी का खर्च, स्टेशनरी व ट्यूशन फीस के अलावा बड़ौदा गांव स्थित आंबेडकर संस्था की ओर से चलाई जा रही लाइब्रेरी में भी किताबें पहुंचाने का काम कर रही हैं। इन सभी का खर्च वह खुद ही वहन करती हैं। डॉ. सीमा अब तक 300 से ज्यादा बच्चों की सहायता कर चुकी हैं। इसके अलावा स्कूल में विद्यार्थियों के लिए खुद के खर्च पर अंग्रेजी की लैब स्थापित कराई हुई है।
सामाजिक संस्थाओं के साथ मिल कर रहीं काम
डॉ. सीमा मलिक कई वर्षों से सामाजिक संस्था इन्नर व्हील क्लब के साथ मिलकर लड़कियों के लिए 2000 सेनेटरी पैड छह महीने तक बंटवाने का काम किया। इसके अलावा छात्राओं के लिए निशुल्क सिलाई सेंटर भी खुलवाए। यहां से महिला और लड़कियों ने सिलाई-कटाई का कार्य सीखकर खुद को रोजगार के लिए स्थापित किया। उनके इस बेहतर कार्य को देखते हुए वर्ष 2022 में गणतंत्र दिवस पर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने भी उनको सम्मानित किया था।
छुट्टी के दिन या फिर स्कूल की छुट्टी होने के बाद शुरू होती है ड्यूटी
स्कूल में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के साथ डॉ. सीमा छुट्टी के दिन या स्कूल की छुट्टी के बाद सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर जरूरतमंदों की सहायता करने में जुट जाती हैं। वह संस्था के सदस्यों के साथ बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में खाना खिलाने, जरूरतमंद लड़कियों की शादी में सहायता करने में अग्रणी रहती हैं।
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आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को सशक्त बनाने के लिए डॉ. सीमा मलिक ने इस काम की शुरुआत लगभग 11 वर्ष पहले की थी। उन्हें जो भी छात्रा आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण पढ़ाई करने में असमर्थ दिखी, उससे बात कर उसकी सहायता करने की ठानी। इसके बाद प्रति वर्ष 20 से 30 छात्राओं की आर्थिक सहायता करने लगीं।
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डॉ. सीमा समय-समय पर स्कूल में कई तरह के कार्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों को जागरूक करती हैं। इनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने लघु नाटिका, रागनी, रोल प्ले एक्टिविटी, क्ले मॉडलिंग, पेंटिंग और लघु नाटिका में गत वर्ष एससीईआरटी गुरुग्राम कला उत्सव कार्यक्रम में जिलास्तर से लेकर राज्यस्तर तक अपना स्थान बनाया था। (संवाद)
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अब तक 300 से ज्यादा बच्चों की सहायता कर चुकीं
डॉ. सीमा मलिक हर साल 20 से 30 जरूरतमंद बच्चों की स्कूल की फीस, वर्दी का खर्च, स्टेशनरी व ट्यूशन फीस के अलावा बड़ौदा गांव स्थित आंबेडकर संस्था की ओर से चलाई जा रही लाइब्रेरी में भी किताबें पहुंचाने का काम कर रही हैं। इन सभी का खर्च वह खुद ही वहन करती हैं। डॉ. सीमा अब तक 300 से ज्यादा बच्चों की सहायता कर चुकी हैं। इसके अलावा स्कूल में विद्यार्थियों के लिए खुद के खर्च पर अंग्रेजी की लैब स्थापित कराई हुई है।
सामाजिक संस्थाओं के साथ मिल कर रहीं काम
डॉ. सीमा मलिक कई वर्षों से सामाजिक संस्था इन्नर व्हील क्लब के साथ मिलकर लड़कियों के लिए 2000 सेनेटरी पैड छह महीने तक बंटवाने का काम किया। इसके अलावा छात्राओं के लिए निशुल्क सिलाई सेंटर भी खुलवाए। यहां से महिला और लड़कियों ने सिलाई-कटाई का कार्य सीखकर खुद को रोजगार के लिए स्थापित किया। उनके इस बेहतर कार्य को देखते हुए वर्ष 2022 में गणतंत्र दिवस पर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने भी उनको सम्मानित किया था।
छुट्टी के दिन या फिर स्कूल की छुट्टी होने के बाद शुरू होती है ड्यूटी
स्कूल में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के साथ डॉ. सीमा छुट्टी के दिन या स्कूल की छुट्टी के बाद सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर जरूरतमंदों की सहायता करने में जुट जाती हैं। वह संस्था के सदस्यों के साथ बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में खाना खिलाने, जरूरतमंद लड़कियों की शादी में सहायता करने में अग्रणी रहती हैं।