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ऐसा कार्य करो जिससे किसी को कष्ट ना हो : अनुराग मुनि
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21जेएनडी24: प्रवचन में पहुंचे श्रद्धालु। संवाद।
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। 22 पंथ जैन स्थानक उचाना मंडी में संघ प्रमुख योगीराज अरुण चंद्र महाराज के शिष्य अनुराग मुनि, अभिषेक मुनि विराजमान है। इस दौरान प्रसिद्ध कवि चंद्रपाल शर्मा ने संत उनके घर आते हैं जो सच्चे दिल से बुलाते है गीत के माध्यम से संतों की महिमा का वर्णन किया। रविवार को परिवार मिलन महोत्सव मनाया गया।
अनुराग मुनि ने कहा कि विद्यार्थी अपने अपने पाठ्यक्रम को गौर से ध्यान लगा कर पढ़ें, जो कुछ समझ में ना आए उसके बारे में पूछें। जो पढ़ा है उस पर चिंतन करें और उसे मन में उतारें। जो याद किया है उसे औरों को भी पढ़ाए, इससे आपका ज्ञान मजबूत हो जाएगा।
अनुराग मुनि ने कहा कि मां-बाप तुम्हारे सबसे बड़े देवता हैं। हर किसी को खुश करना शायद हमारे बस में न हो लेकिन किसी को हमारी वजह से दुख न पहुंचे यह तो हमारे बस में है।
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अभिषेक मुनि ने कहा कि जिस तरह से राख के ऊपर घी डाल दिया हो ऐसे ही परिवार में सुख-शांति न हो तो दान, धर्म किया सब बेकार है। परिवार में शांति सबसे पहले होनी चाहिए। छोटी-छोटी बातों को इग्नोर करना चाहिए। माता-पिता का जहां आदर नहीं होता वो घर कभी आबाद नहीं होता। धर्म को ढोंग से नहीं बल्कि धर्म का पालन धर्म से करने चाहिए।
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जींद। 22 पंथ जैन स्थानक उचाना मंडी में संघ प्रमुख योगीराज अरुण चंद्र महाराज के शिष्य अनुराग मुनि, अभिषेक मुनि विराजमान है। इस दौरान प्रसिद्ध कवि चंद्रपाल शर्मा ने संत उनके घर आते हैं जो सच्चे दिल से बुलाते है गीत के माध्यम से संतों की महिमा का वर्णन किया। रविवार को परिवार मिलन महोत्सव मनाया गया।
अनुराग मुनि ने कहा कि विद्यार्थी अपने अपने पाठ्यक्रम को गौर से ध्यान लगा कर पढ़ें, जो कुछ समझ में ना आए उसके बारे में पूछें। जो पढ़ा है उस पर चिंतन करें और उसे मन में उतारें। जो याद किया है उसे औरों को भी पढ़ाए, इससे आपका ज्ञान मजबूत हो जाएगा।
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अनुराग मुनि ने कहा कि मां-बाप तुम्हारे सबसे बड़े देवता हैं। हर किसी को खुश करना शायद हमारे बस में न हो लेकिन किसी को हमारी वजह से दुख न पहुंचे यह तो हमारे बस में है।
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अभिषेक मुनि ने कहा कि जिस तरह से राख के ऊपर घी डाल दिया हो ऐसे ही परिवार में सुख-शांति न हो तो दान, धर्म किया सब बेकार है। परिवार में शांति सबसे पहले होनी चाहिए। छोटी-छोटी बातों को इग्नोर करना चाहिए। माता-पिता का जहां आदर नहीं होता वो घर कभी आबाद नहीं होता। धर्म को ढोंग से नहीं बल्कि धर्म का पालन धर्म से करने चाहिए।