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जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को ऑक्सीजन की दरकार
ब्यूरो अमर उजाला जींद
Updated Wed, 26 Apr 2017 12:36 AM IST
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जींद के नागरिक अस्पताल में सामान्य रोग चिकित्सक के बाहर लगी भीड़।
- फोटो : amarujala beuro
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भले ही सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बात कर रही है, लेकिन जींद को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। जिला के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे बड़ी दिक्कत चिकित्सकों की कमी की आ रही है। वहीं विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण नागरिक अस्पताल महज रेफर सेंटर बन गया है। कहने को तो स्वास्थ्य विभाग के पास काफी ढांचा है, लेकिन मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है।
जिले में जींद, नरवाना, सफीदों और उचाना में चार नागरिक अस्पताल हैं, लेकिन कहीं भी नागरिक अस्पताल के स्तर की सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में लोगों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज लेना पड़ता है। अधिकतर लोग सामान्य बीमारी में भी हिसार या रोहतक ही इलाज करवाते हैं। कुछ लोग पीजीआई रोहतक से इलाज करवाते हैं। कुल मिलाकर जिले भर में स्वास्थ्य सेवाओं दिवालिया निकला है। इससे लोगों को काफी दिक्कत होती हैं।
महज 74 चिकित्सकों के सहारे जिलेवासी
जिला में नागरिक अस्पताल के अलावा पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 29 पीएचसी और 154 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनके लिए चिकित्सकों की काफी कमी है। जिले भर में चिकित्सकों के 200 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 80 पद ही भरे हैं। इनमें से भी छह चिकित्सक अनुपस्थित चल रहे हैं या त्यागपत्र दे चुके हैं। ऐसे में लोगों को चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
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16 एंबुलेंस के सहारे सेवा
एक लाइफ सेविंग सिस्टम सहित जिला में कुल 16 एंबुलेंस चालू हालत में हैं। इससे अक्सर एंबुलेंस की दिक्कत रहती है। जिले भर के नागरिक अस्पतालों में दुर्घटना की स्थिति में मरीजों को रोहतक या खानपुर पीजीआई रेफर किया जाता है। ऐसे में निजी एंबुलेंस की सेवाएं स्वास्थ्य विभाग को लेनी पड़ती हैं।
चिकित्सकों की स्थिति
जिला में 15 एसमओ के पद स्वीकृत हैं, जबकि 12 कार्यरत हैं। तीन पद खाली हैं। जींद नागरिक अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक के 55 पद स्वीकृत हैं। इनमें से महज 29 पर कार्यरत हैं, जिनमें से दो अनुपस्थित चल रहे हैं। कुल 27 चिकित्सकों के सहारे व्यवस्था चल रही हैं। 26 पद रिक्त हैं। नरवाना में 42 पद स्वीकृत हैं, इनमें से नौ भरे हैं, जिनमें से दो अनुपस्थित चल रहे हैं। 33 पद खाली हैं। उचाना में 18 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। छह भरे हैं और 12 खाली हैं। सफीदों नागरिक अस्पताल में 15 पद स्वीकृत हैं इनमें छह भरे हैं नौ खाली हैं। कालवा सीएचसी में 15 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं इनमें से सात भरे हैं, एक अनुपस्थित चल रहा है। कुल आठ पद खाली हैं। खरकरामजी सीएचसी में 11 पद स्वीकृत हैं। चार भरे हैं और सात खाली हैं। जुलाना सीएचसी में 13 पद स्वीकृत हैं इनमें चार भरे हैं और नौ खाली हैं। उझाना में 15 पदों में से आठ भरे हैं और सात खाली हैं। कंडेला में 11 पद स्वीकृत हैं और दो पर ही चिकित्सक कार्यरत हैं, नौ पद खाली हैं।
रेडियोलॉजिस्ट की दरकार
वर्तमान चिकित्सा सुविधाओं में जिला भर में रेडियोलॉजिस्ट की दरकार है। हालांकि जींद के नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर ही महंगा अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। सिर्फ गर्भवती महिलाओं को पैनल पर लिए गए निजी अस्पतालों में रियायती दरों पर लाभ मिलता है।
विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं
जिला भर में त्वचा रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेष, मनोविज्ञान चिकित्सक और फिजीशियन नहीं हैं। एमडी महिला रोग विशेषज्ञ का पद भी अभी एनआरएचएम के तहत भरा गया है।
चिकित्सकों की काफी कमी है। इसके चलते मरीजों को भी चिकित्सक पूरा समय नहीं दे पाते। एक-एक चिकित्सक 200 से 300 लोगों की ओपीडी करता है। इसमें बेहतर इलाज के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। खाली पदों के लिए सरकार को लिखा जा चुका है। अब चिकित्सक सरकार को भेजने हैं। -डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन
फोटो नंबर
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जिले में जींद, नरवाना, सफीदों और उचाना में चार नागरिक अस्पताल हैं, लेकिन कहीं भी नागरिक अस्पताल के स्तर की सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में लोगों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज लेना पड़ता है। अधिकतर लोग सामान्य बीमारी में भी हिसार या रोहतक ही इलाज करवाते हैं। कुछ लोग पीजीआई रोहतक से इलाज करवाते हैं। कुल मिलाकर जिले भर में स्वास्थ्य सेवाओं दिवालिया निकला है। इससे लोगों को काफी दिक्कत होती हैं।
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महज 74 चिकित्सकों के सहारे जिलेवासी
जिला में नागरिक अस्पताल के अलावा पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 29 पीएचसी और 154 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनके लिए चिकित्सकों की काफी कमी है। जिले भर में चिकित्सकों के 200 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 80 पद ही भरे हैं। इनमें से भी छह चिकित्सक अनुपस्थित चल रहे हैं या त्यागपत्र दे चुके हैं। ऐसे में लोगों को चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
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16 एंबुलेंस के सहारे सेवा
एक लाइफ सेविंग सिस्टम सहित जिला में कुल 16 एंबुलेंस चालू हालत में हैं। इससे अक्सर एंबुलेंस की दिक्कत रहती है। जिले भर के नागरिक अस्पतालों में दुर्घटना की स्थिति में मरीजों को रोहतक या खानपुर पीजीआई रेफर किया जाता है। ऐसे में निजी एंबुलेंस की सेवाएं स्वास्थ्य विभाग को लेनी पड़ती हैं।
चिकित्सकों की स्थिति
जिला में 15 एसमओ के पद स्वीकृत हैं, जबकि 12 कार्यरत हैं। तीन पद खाली हैं। जींद नागरिक अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक के 55 पद स्वीकृत हैं। इनमें से महज 29 पर कार्यरत हैं, जिनमें से दो अनुपस्थित चल रहे हैं। कुल 27 चिकित्सकों के सहारे व्यवस्था चल रही हैं। 26 पद रिक्त हैं। नरवाना में 42 पद स्वीकृत हैं, इनमें से नौ भरे हैं, जिनमें से दो अनुपस्थित चल रहे हैं। 33 पद खाली हैं। उचाना में 18 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। छह भरे हैं और 12 खाली हैं। सफीदों नागरिक अस्पताल में 15 पद स्वीकृत हैं इनमें छह भरे हैं नौ खाली हैं। कालवा सीएचसी में 15 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं इनमें से सात भरे हैं, एक अनुपस्थित चल रहा है। कुल आठ पद खाली हैं। खरकरामजी सीएचसी में 11 पद स्वीकृत हैं। चार भरे हैं और सात खाली हैं। जुलाना सीएचसी में 13 पद स्वीकृत हैं इनमें चार भरे हैं और नौ खाली हैं। उझाना में 15 पदों में से आठ भरे हैं और सात खाली हैं। कंडेला में 11 पद स्वीकृत हैं और दो पर ही चिकित्सक कार्यरत हैं, नौ पद खाली हैं।
रेडियोलॉजिस्ट की दरकार
वर्तमान चिकित्सा सुविधाओं में जिला भर में रेडियोलॉजिस्ट की दरकार है। हालांकि जींद के नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर ही महंगा अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। सिर्फ गर्भवती महिलाओं को पैनल पर लिए गए निजी अस्पतालों में रियायती दरों पर लाभ मिलता है।
विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं
जिला भर में त्वचा रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेष, मनोविज्ञान चिकित्सक और फिजीशियन नहीं हैं। एमडी महिला रोग विशेषज्ञ का पद भी अभी एनआरएचएम के तहत भरा गया है।
चिकित्सकों की काफी कमी है। इसके चलते मरीजों को भी चिकित्सक पूरा समय नहीं दे पाते। एक-एक चिकित्सक 200 से 300 लोगों की ओपीडी करता है। इसमें बेहतर इलाज के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। खाली पदों के लिए सरकार को लिखा जा चुका है। अब चिकित्सक सरकार को भेजने हैं। -डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन
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