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Jind News: बेसहारा गोवंश की होगी गुलाबी टैगिंग
Wed, 06 Mar 2024 12:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 06 Mar 2024 12:02 AM IST
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जींद। डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने कहा कि जिले मेें बेसहारा घूम रहे गोवंश को गुलाबी रंग का टैग लगाकर उनकी पहचान की जाएगी। उनके पुनर्वास के लिए समीप की गोशालाओं में उनको छोड़ा जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि गोवंश अब बेसहारा नहीं है। डीसी मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में जिले में संचालित सभी गोशालाओं के प्रधान व प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सड़कों पर घूमने वाले पशुओं से हादसों का भय बना रहता है। हादसों में कई बार जान- माल का काफी नुकसान होता है। इनसे होने वाली दुर्घटनाओं में वाहन चालक ही नहीं बल्कि पशुओं को भी शिकार होना पड़ता है, इसलिए इन बेसहारा गोवंशों के पुनर्वास का होना आवश्यक है। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी गोवंश की टैगिंग कर उनका एक नंबर जारी करें, ताकि सभी गोवंश की संख्या का पता लगाया जा सके। उन्होंने सभी गोशाला संचालकों से आह्वान किया कि सभी टैगिंग गोवंश को नजदीक लगती गोशालाओं में पुनर्वास करवाया जाए। उन्होंने कहा कि टैगिंग से यह भी पता चल सकेगा कि यह गोवंश किस गोशाला का है। उन्होंने बताया कि गोशालाओं की समस्या सुनने के लिए जिलास्तर पर कमेटी का गठन किया गया है, जो गोशला संचालकों से संपर्क कर उनकी समस्याओं का निवारण करेगी। जिले में यदि किसी गोशाला के पास गोचरण भूमि की कमी है तो आवश्यकता अनुसार नियमों के तहत गोचरण भूमि लीज पर लेने के लिए आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी गोशाला में गोवंश के लिए चारे की कमी नहीं रहने दी जाए। इसके लिए संचालकों को समयबद्ध तरीके से व्यवस्था कर लेनी चाहिए। सभी गोशालाओं में गाय व नंदी के लिए अलग-अलग शेड का निर्माण व्यवस्था होनी चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि गोशालाओं में चिकित्सा संबंधी किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जाए। इस अवसर पर उनके साथ जिला नगरायुक्त वीरेंद्र सहरावत, जिला परिषद की सीईओ डाॅ. किरण सिंह उपस्थित रही।
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उन्होंने कहा कि सड़कों पर घूमने वाले पशुओं से हादसों का भय बना रहता है। हादसों में कई बार जान- माल का काफी नुकसान होता है। इनसे होने वाली दुर्घटनाओं में वाहन चालक ही नहीं बल्कि पशुओं को भी शिकार होना पड़ता है, इसलिए इन बेसहारा गोवंशों के पुनर्वास का होना आवश्यक है। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी गोवंश की टैगिंग कर उनका एक नंबर जारी करें, ताकि सभी गोवंश की संख्या का पता लगाया जा सके। उन्होंने सभी गोशाला संचालकों से आह्वान किया कि सभी टैगिंग गोवंश को नजदीक लगती गोशालाओं में पुनर्वास करवाया जाए। उन्होंने कहा कि टैगिंग से यह भी पता चल सकेगा कि यह गोवंश किस गोशाला का है। उन्होंने बताया कि गोशालाओं की समस्या सुनने के लिए जिलास्तर पर कमेटी का गठन किया गया है, जो गोशला संचालकों से संपर्क कर उनकी समस्याओं का निवारण करेगी। जिले में यदि किसी गोशाला के पास गोचरण भूमि की कमी है तो आवश्यकता अनुसार नियमों के तहत गोचरण भूमि लीज पर लेने के लिए आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी गोशाला में गोवंश के लिए चारे की कमी नहीं रहने दी जाए। इसके लिए संचालकों को समयबद्ध तरीके से व्यवस्था कर लेनी चाहिए। सभी गोशालाओं में गाय व नंदी के लिए अलग-अलग शेड का निर्माण व्यवस्था होनी चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि गोशालाओं में चिकित्सा संबंधी किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जाए। इस अवसर पर उनके साथ जिला नगरायुक्त वीरेंद्र सहरावत, जिला परिषद की सीईओ डाॅ. किरण सिंह उपस्थित रही।
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