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Jind News: घने जंगल, भारी बैग और ऊंचे पहाड़... जींद के पंकज ने 80 किलोमीटर का ट्रैक किया पूरा
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19उचाना01, 02 : जींद का पंकज सिंगरोहा, जिसने 80 किलोमीटर की ट्रैकिंग की।
उचाना। अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम जंगलों में राष्ट्रीय हाई एल्टीट्यूड ट्रैक से 80 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई कर जींद के पंकज सिंगरोहा ने नई उपलब्धि हासिल की है। देशभर से चयनित 24 युवाओं के इस दल में पंकज हरियाणा के एकमात्र प्रतिभागी थे। पहाड़ों की सपाट चढ़ाई, कीचड़, नदियों, घने जंगलों, गुग्यालों, घाटियों को पार करते हुए यह यात्रा पूरी हुई।
भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की माय भारत पहल के अंतर्गत आयोजित इस अभियान के लिए पंकज का चयन हुआ था। इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन (आईएमएफ) के आयोजन में राष्ट्रीय पर्वतारोहण एवं साहसिक खेल संस्थान (एनआईएमएएस), दिरांग, अरुणाचल प्रदेश की ओर से इस ट्रैक का संचालन किया गया। नौ अक्तूबर को पंकज सहित देश के 24 युवाओं ने इस यात्रा की शुरुआत की।
पंकज की मां नीरू व पिता बृजभान ने बताया कि अभियान के तहत सभी युवाओं के दल ने अरुणाचल प्रदेश के अनछुए और दुर्गम रास्तों की खोज की। दल ने 15 से 20 किलो के रक्सैक के साथ लगभग 70 से 80 किलोमीटर की दूरी तय की। प्रतिदिन 12 किलोमीटर के आसपास की कठिन चढ़ाई, कीचड़, नदियों, घने जंगलों, बुग्यालों और घाटियों को पार करते हुए यह यात्रा पूरी की गई।
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युवाओं के दल का ट्रैक का रूट दिरांग-जिमथुंग-सांगती-चांदर-लगाम-थेंबांग रहा। थेंबांग एक प्राचीन किलेबंद गांव है, जो यूनेस्को की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
यह सिर्फ ट्रैक नहीं, जीवन का अनुभव था : पंकज
पंकज ने बताया, यह सिर्फ एक ट्रैक नहीं था बल्कि जीवन का अनुभव था। अरुणाचल प्रदेश के अनछुए जंगल, वहां के मोनपा जनजाति का जीवन और कंधे पर 20 किलो का बैग लेकर रोज़ चलना, इससे उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत मजबूत बनाया। हरियाणा का अकेला प्रतिनिधि होने के नाते उनके लिए गर्व की बात है।
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भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की माय भारत पहल के अंतर्गत आयोजित इस अभियान के लिए पंकज का चयन हुआ था। इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन (आईएमएफ) के आयोजन में राष्ट्रीय पर्वतारोहण एवं साहसिक खेल संस्थान (एनआईएमएएस), दिरांग, अरुणाचल प्रदेश की ओर से इस ट्रैक का संचालन किया गया। नौ अक्तूबर को पंकज सहित देश के 24 युवाओं ने इस यात्रा की शुरुआत की।
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पंकज की मां नीरू व पिता बृजभान ने बताया कि अभियान के तहत सभी युवाओं के दल ने अरुणाचल प्रदेश के अनछुए और दुर्गम रास्तों की खोज की। दल ने 15 से 20 किलो के रक्सैक के साथ लगभग 70 से 80 किलोमीटर की दूरी तय की। प्रतिदिन 12 किलोमीटर के आसपास की कठिन चढ़ाई, कीचड़, नदियों, घने जंगलों, बुग्यालों और घाटियों को पार करते हुए यह यात्रा पूरी की गई।
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युवाओं के दल का ट्रैक का रूट दिरांग-जिमथुंग-सांगती-चांदर-लगाम-थेंबांग रहा। थेंबांग एक प्राचीन किलेबंद गांव है, जो यूनेस्को की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
यह सिर्फ ट्रैक नहीं, जीवन का अनुभव था : पंकज
पंकज ने बताया, यह सिर्फ एक ट्रैक नहीं था बल्कि जीवन का अनुभव था। अरुणाचल प्रदेश के अनछुए जंगल, वहां के मोनपा जनजाति का जीवन और कंधे पर 20 किलो का बैग लेकर रोज़ चलना, इससे उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत मजबूत बनाया। हरियाणा का अकेला प्रतिनिधि होने के नाते उनके लिए गर्व की बात है।

19उचाना01, 02 : जींद का पंकज सिंगरोहा, जिसने 80 किलोमीटर की ट्रैकिंग की।