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धरना देकर उठाईं मांगें, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

Mon, 01 Aug 2022 12:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 01 Aug 2022 12:42 AM IST
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Demands raised by picketing, memorandum submitted to Tehsildar
तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते संयुक्त किसान मोर्चा कार्यकर्ता। संवाद। - फोटो : Jind
जींद। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रविवार को किसान संगठनों ने जिला मुख्यालय समेत सब डिवीजनों पर धरने दिए और प्रदर्शन कर सरकार द्वारा किसानों से की जा रही वादाखिलाफी पर रोष जताया। उचाना में किसानों ने सरकार का पुतला फूंका और तहसील परिसर में धरना दिया। बाद में किसानों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपे। हालांकि किसान संगठनों ने टोल बंद का भी आह्वान किया हुआ था लेकिन तीज के त्योहार व बच्चों की परीक्षा को देखते हुए इस निर्णय को वापस लिया और केवल धरना देकर रोष जताया।
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संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भाकियू कार्यकर्ता नेहरू पार्क में भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला के नेतृत्व में एकत्रित हुए। उन्होंने कहा कि एमएसपी गारंटी कानून बनाने के लिए गठित कमेटी पर किसान संगठन मोर्चा का विश्वास नहीं है। तीन कृषि कानून समर्थकों को कमेटी में शामिल किया गया है, जिसके चलते कमेटी पर किसानों को विश्वास नहीं है। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाए। कुछ राज्य सूखे की चपेट में तो आधा दर्जन से ज्यादा राज्य बाढ़ की चपेट में है। किसानों को काफी नुकसान हुआ है। सरकार ग्राम स्तर पर नुकसान का आंकलन कर उसकी भरपाई करे। अग्रिपथ योजना में चयनित 75 प्रतिशत जवान बेरोजगार होंगे। उन युवाओं को अर्धसैनिक बलों में प्राथमिकता दी जाए। साथ ही दोबारा रोजगार नहीं मिलने तक बेरोजगारी भत्ता दिया जाए। देश में अलग से किसान आयोग का गठन किया जाए। अधिकृत की गई जमीनों का मांग के अनुसार चार गुणा अधिक मुआवजा दिलाया जाए। किसानों को मुफ्त बिजली दी जाए, खाद बीज व कीटनाशक की सब्सिडी किसानों की दी जाए। सोलर एनर्जी के लिए रूफ टाफ सब्सिडी दी जाए। एनजीटी के नियमों में किसानों को ढील दी जाए समेत अन्य किसान मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
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उन्होंने कहा कि किसानों का देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बडा योगदान है। खेती लगातार घाटे का सौदा साबित हो रही है। किसानों की आय भी लगातार घट रही है। जिसके चलते किसान शहरों की तरफ पलायन करने को मजबूर है। सही सरकारी नीतियों को लागू न किए जाने से किसान खुद को ठगा महसूस कर रहा है। सरकार मानी गई मांगों को ही अब नजरअंदाज करने में लगी है। वहीं उचाना में किसानों ने सरकार का पुतला फूंका और रोष जताया। बाद में किसानों ने 15 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन अधिकारियों को सौंपे। इस मौके पर छाजूराम, प्रकाश, राममेहर, भलेराम, रामफल गुलकनी, रामराजी ढूल, सत्यवान, रमेश चंद्र भी मौजूद रहे।
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