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Jind News: सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों को बजटेड करने की उठाई मांग
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10जेएनडी28-सीआरएसयू कुलपति निजी सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए एबीवीपी कार्यकर्ता। स्रोत कार्यकर्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति के निजी सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में विश्वविद्यालय में संचालित बीए एलएलबी, एलएलबी, एलएलएम, भूगोल एवं योग विज्ञान विभाग के स्ववित्तपोषित (सेल्फ फाइनेंस) पाठ्यक्रमों को बजटेड श्रेणी में शामिल करने की मांग की गई।
इकाई अध्यक्ष सतविंदर ढिल्लो ने बताया कि वर्तमान समय में इन विभागों में अध्ययनरत विद्यार्थियों से अत्यधिक शुल्क वसूला जा रहा है, जिसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।शिक्षा का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक ज्ञान एवं अवसर पहुंचाना है लेकिन बढ़ती फीस के कारण अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थी इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने से वंचित रह जाते हैं या बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। विधि (लॉ), भूगोल एवं योग विज्ञान जैसे विषय केवल शैक्षणिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि समाज एवं राष्ट्र निर्माण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
वर्तमान समय में न्यायिक व्यवस्था, प्रशासनिक सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शोध के क्षेत्र में इन विषयों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इन पाठ्यक्रमों को अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाना समय की आवश्यकता है।
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लॉ विभाग के आंकड़े इसका स्पष्ट उदाहरण हैं। बीए एलएलबी प्रथम सेमेस्टर में जहां 115 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, वहीं छठे सेमेस्टर तक पहुंचते-पहुंचते यह संख्या घटकर 77 रह गई है। इसी प्रकार एलएलबी प्रथम सेमेस्टर में लगभग 120 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था लेकिन छठे सेमेस्टर में यह संख्या घटकर केवल 96 रह गई।
उच्च शिक्षा के विस्तार को ध्यान में रखते हुए बीए एलएलबी, एलएलबी, एलएलएम, भूगोल एवं योग विज्ञान विभाग के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को बजटेड श्रेणी में शामिल किया जाए।
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जींद। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति के निजी सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में विश्वविद्यालय में संचालित बीए एलएलबी, एलएलबी, एलएलएम, भूगोल एवं योग विज्ञान विभाग के स्ववित्तपोषित (सेल्फ फाइनेंस) पाठ्यक्रमों को बजटेड श्रेणी में शामिल करने की मांग की गई।
इकाई अध्यक्ष सतविंदर ढिल्लो ने बताया कि वर्तमान समय में इन विभागों में अध्ययनरत विद्यार्थियों से अत्यधिक शुल्क वसूला जा रहा है, जिसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।शिक्षा का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक ज्ञान एवं अवसर पहुंचाना है लेकिन बढ़ती फीस के कारण अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थी इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने से वंचित रह जाते हैं या बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। विधि (लॉ), भूगोल एवं योग विज्ञान जैसे विषय केवल शैक्षणिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि समाज एवं राष्ट्र निर्माण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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वर्तमान समय में न्यायिक व्यवस्था, प्रशासनिक सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शोध के क्षेत्र में इन विषयों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इन पाठ्यक्रमों को अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाना समय की आवश्यकता है।
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लॉ विभाग के आंकड़े इसका स्पष्ट उदाहरण हैं। बीए एलएलबी प्रथम सेमेस्टर में जहां 115 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, वहीं छठे सेमेस्टर तक पहुंचते-पहुंचते यह संख्या घटकर 77 रह गई है। इसी प्रकार एलएलबी प्रथम सेमेस्टर में लगभग 120 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था लेकिन छठे सेमेस्टर में यह संख्या घटकर केवल 96 रह गई।
उच्च शिक्षा के विस्तार को ध्यान में रखते हुए बीए एलएलबी, एलएलबी, एलएलएम, भूगोल एवं योग विज्ञान विभाग के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को बजटेड श्रेणी में शामिल किया जाए।