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बाजरे के बिस्कुट व नमकीन की बढ़ी मांग

Sun, 08 Dec 2019 11:42 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 08 Dec 2019 11:42 PM IST
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Demand for millet biscuits and snacks incresed
लाल रंग की आर्गेनिक मूली दिखाता किसान। - फोटो : Jind
गीता जयंती समारोह में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए स्टॉल में सबसे अधिक भीड़ कृषि विभाग के स्टॉल पर उमड़ रही है। कृषि विभाग के स्टॉल पर आर्गेनिक उत्पाद मिलते हैं। अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंतित लोग आर्गेनिक उत्पाद खरीद रहे हैं। हर कोई इन उत्पादों को घर मंगवाने के लिए अपनी डिमांड लिखवा रहा है।
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कृषि विभाग के स्टॉल पर बाजरे के बिस्कुट, बाजरे की नमकीन, मक्की का आटा, बाजरे का आटा, साबुत बाजरा, सरसों का तेल, बासमती चावल, गेहूं, मूली, गाजर, सरसों का साग, पालक सब कुछ आर्गेनिक मिलता है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत लोग इन आर्गेनिक कृषि उत्पादों की तरफ अधिक रुझान कर रहे हैं। बाजार में बाजरा 20 रुपये किलो मिलता है लेकिन यहां आर्गेनिक बाजरा 30 रुपये किलो दिया जा रहा है। बाजरे का आटा भी 50 रुपये किलो मिलता है। मक्की का आटा भी 50 रुपये किलो मिलता है। इन सभी आर्गेनिक कृषि उत्पादों को लोग खरीद रहे हैं। यहां रखी गई आर्गेनिक पालक तथा सरसों का साग तीन दिन पुराने हो चुके हैं लेकिन आज तक भी मुरझाये नहीं हैं। इससे साफ पता चलता है कि यह आर्गेनिक उत्पाद हैं। आर्गेनिक मूली का रंग लाल है। जिले में आर्गेनिक खेती करने वाले तीन समूह हैं। कृषि विभाग समय-समय पर इनको सहायता देता रहता है। इन समूहों की तीन दिन की ट्रेनिंग हरियाणा एग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी हिसार में करवाई गई थी। इसके अलावा पद्मश्री से सम्मानित उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी आर्गेनिक किसान भारत भूषण त्यागी के फार्म का भी कृषि विभाग ने इन समूहों को दौरा करवाया था। नई-नई तकनीकों की जानकारी समय-समय पर कृषि विभाग इन किसानों को देता रहता है। प्रौद्योगिकी प्रबंधक राजेश शर्मा भी यहां किसानों को प्रेरित करते दिखाई दिए।
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आर्गेनिक कृषि उत्पादों की बढ़ रही मांग : किसान मनबीर रेढू, राजपाल श्योकंद ने बताया कि आर्गेनिक कृषि उत्पादों की मांग बहुत अधिक बढ़ती जा रही है। इस स्टॉल पर वह लोगों की डिमांड पूरी नहीं कर रहे हैं इसलिए उसे नोट करके खेतों से सीधे लोगों के घरों पर डिलीवरी दी जा रही है। बच्चे जो बिस्कुट खाते हैं, वह मेदा के बने होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। उन्होंने बाजरे के नमकीन व बिस्कुट बनाए हैं, जो शरीर में आयरन व कैल्शियम की कमी को पूरा करते हैं। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए हमें फिर से आर्गेनिक उत्पादों की तरफ जाना होगा।
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ट्रेनिंग के साथ-साथ करवाए जाते हैं टूर : आर्गेनिक खेती करने वाले किसानों की कृषि विभाग विशेष सहायता देता है। समय-समय पर इनको हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी हिसार में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। इसके अलावा पूरे देश में कोई भी किसान कुछ नया काम करता है तो उसके फार्म का दौरा करवाया जाता है। इसके अलावा इन किसानों का प्रोसेसिंग की रुझान करवाया जाता है ताकि यह अपने उत्पाद स्वयं तैयार करके अच्छे रेट पर मार्केट में बेच सकें। -डॉ. सुभाष चंद्र, एडीओ, कृषि विभाग।
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