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संस्कार और संस्कृति हो रहा हनन : स्वामी रामवेश
Mon, 15 Jul 2024 02:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 15 Jul 2024 02:32 AM IST
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14जेएनडी06-मासिक सत्संग में संबोधित करते हुए स्वामी रामवेश। स्रोत स्वयं
जींद। महर्षि दयानंद योग चिकित्सा आश्रम अर्बन एस्टेट में रविवार को मासिक वैदिक सत्संग का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता स्वामी रामवेश ने की। इस अवसर पर प्राचार्य इंद्र सिंह आर्य, कैप्टन जोगिंद्र सिंह खटकड़, जगफूल सिंह ढिल्लों व योग मुनि ने अपने विचार रखे।
स्वामी रामवेश ने कहा कि संसार बुरी अवस्था से गुजर रहा है। संस्कार और संस्कृति का हनन हो रहा है। असली रूप में संस्कार के जन्मदाता मातृ शक्ति, पिता, गुरु और सहपाठी से मिलते हैं। यदि चारों के संस्कार ठीक न हों तो बच्चे का निर्माण नहीं हो सकता। सबसे पहले माता संस्कार बनाती है, उसके बाद पिता, गुरु और सहपाठी जीवन पर असर डालते हैं। बच्चे के जीवन पर सहपाठी सबसे ज्यादा असर डालते हैं। माता-पिता और गुरु तक की योजनाएं फेल हो जाती हैं। प्राचार्य इंद्र सिंह आर्य ने विद्यार्थी की सामयिक अवस्था पर विचार रखते हुए उनके जीवन की क्रिया को बदलने के लिए कहा। कैप्टन जोगिंद्र सिंह खटकड़ ने मिलिट्री फोर्स आदि में मजबूती पैदा करने के लिए नौजवानों के चरित्र निर्माण पर बल दिया। राजबीर सिंह आर्य ने विद्यार्थियों के हर तरह के सुधार जैसे शारीरिक, आत्मिक और शैक्षणिक को बढ़ावा दिए जाने पर बल दिया। योग मुनि ने भजनों के माध्यम से महर्षि दयानंद के जीवन पर प्रकाश डाला। संगीत विद्या से वेद प्रचार करने का संकल्प दिलवाया और श्रोताओं को आर्य समाज से जुड़ने के लिए कहा।
विद्यासागर शास्त्री ने हवन करवाया। अंत में शांति पाठ के साथ सत्संग में आए आर्यजनों ने ऋषि लंगर में प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर रणबीर सिंह आर्य, रघुबीर सिंह मलिक, राजेंद्र सिंह मलिक, दयानंद आर्य, मा. कर्ण सिंह आर्य और बलवान सिंह आर्य मौजूद रहे।
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स्वामी रामवेश ने कहा कि संसार बुरी अवस्था से गुजर रहा है। संस्कार और संस्कृति का हनन हो रहा है। असली रूप में संस्कार के जन्मदाता मातृ शक्ति, पिता, गुरु और सहपाठी से मिलते हैं। यदि चारों के संस्कार ठीक न हों तो बच्चे का निर्माण नहीं हो सकता। सबसे पहले माता संस्कार बनाती है, उसके बाद पिता, गुरु और सहपाठी जीवन पर असर डालते हैं। बच्चे के जीवन पर सहपाठी सबसे ज्यादा असर डालते हैं। माता-पिता और गुरु तक की योजनाएं फेल हो जाती हैं। प्राचार्य इंद्र सिंह आर्य ने विद्यार्थी की सामयिक अवस्था पर विचार रखते हुए उनके जीवन की क्रिया को बदलने के लिए कहा। कैप्टन जोगिंद्र सिंह खटकड़ ने मिलिट्री फोर्स आदि में मजबूती पैदा करने के लिए नौजवानों के चरित्र निर्माण पर बल दिया। राजबीर सिंह आर्य ने विद्यार्थियों के हर तरह के सुधार जैसे शारीरिक, आत्मिक और शैक्षणिक को बढ़ावा दिए जाने पर बल दिया। योग मुनि ने भजनों के माध्यम से महर्षि दयानंद के जीवन पर प्रकाश डाला। संगीत विद्या से वेद प्रचार करने का संकल्प दिलवाया और श्रोताओं को आर्य समाज से जुड़ने के लिए कहा।
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विद्यासागर शास्त्री ने हवन करवाया। अंत में शांति पाठ के साथ सत्संग में आए आर्यजनों ने ऋषि लंगर में प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर रणबीर सिंह आर्य, रघुबीर सिंह मलिक, राजेंद्र सिंह मलिक, दयानंद आर्य, मा. कर्ण सिंह आर्य और बलवान सिंह आर्य मौजूद रहे।

14जेएनडी06-मासिक सत्संग में संबोधित करते हुए स्वामी रामवेश। स्रोत स्वयं
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