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Jind News: सीआरएसयू के भूगोल विभाग ने जबलपुर में किया शैक्षणिक सर्वे
Wed, 18 Feb 2026 12:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 18 Feb 2026 12:03 AM IST
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17जेएनडी21:जबलपुर में शैक्षणिक सर्वे के दौरान मौजूद विद्यार्थी और अन्य। स्रोत विवि
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की तरफ से मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में शैक्षणिक क्षेत्रीय अध्ययन (फील्ड सर्वे) का आयोजन किया गया। इसमें विभाग के 48 विद्यार्थियों ने भाग लिया जिसका उद्देश्य जनजातीय समाज, संस्कृति और पर्यावरण के अंतर्संबंधों को जमीनी स्तर पर समझना था।
कुलपति प्रो. डॉ. रामपाल सैनी ने कहा कि भूगोल केवल मानचित्र और सिद्धांत नहीं है बल्कि यह मानव और प्रकृति के संबंधों को समझने का विज्ञान है। उन्होंने कहा कि ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन की चुनौतियों और सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने इन अनुभवों को शोध लेखों के माध्यम से साझा करेंगे ताकि जनजातीय जीवन के प्रति समाज में जागरूकता बढ़े। अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों ने मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध गोंड और बैगा जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक ढांचे का अवलोकन किया। विशेष रूप से बैगा जनजाति, जिसे भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी ) का दर्जा प्राप्त है, के निवास स्थान, पारंपरिक कृषि पद्धतियों और वनों पर आधारित उनकी आजीविका का अध्ययन किया गया।
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विद्यार्थियों ने पाया कि ये समुदाय किस प्रकार आधुनिक चकाचौंध से दूर प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर रहते हैं। इसके साथ ही कुछ विद्यार्थियों ने सतपुड़ा क्षेत्र की जैव विविधता पर ध्यान केंद्रित करते हुए पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों और वहां की विशिष्ट भौगोलिक स्थलाकृति का पारिस्थितिकीय अध्ययन भी किया। इस अवसर पर डॉ. मंजीत सिंह, डॉ. देवेंद्र यादव, पूनम और मनीष कुमार आदि मौजूद रहे।
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कुलपति प्रो. डॉ. रामपाल सैनी ने कहा कि भूगोल केवल मानचित्र और सिद्धांत नहीं है बल्कि यह मानव और प्रकृति के संबंधों को समझने का विज्ञान है। उन्होंने कहा कि ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन की चुनौतियों और सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराते हैं।
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उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने इन अनुभवों को शोध लेखों के माध्यम से साझा करेंगे ताकि जनजातीय जीवन के प्रति समाज में जागरूकता बढ़े। अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों ने मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध गोंड और बैगा जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक ढांचे का अवलोकन किया। विशेष रूप से बैगा जनजाति, जिसे भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी ) का दर्जा प्राप्त है, के निवास स्थान, पारंपरिक कृषि पद्धतियों और वनों पर आधारित उनकी आजीविका का अध्ययन किया गया।
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विद्यार्थियों ने पाया कि ये समुदाय किस प्रकार आधुनिक चकाचौंध से दूर प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर रहते हैं। इसके साथ ही कुछ विद्यार्थियों ने सतपुड़ा क्षेत्र की जैव विविधता पर ध्यान केंद्रित करते हुए पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों और वहां की विशिष्ट भौगोलिक स्थलाकृति का पारिस्थितिकीय अध्ययन भी किया। इस अवसर पर डॉ. मंजीत सिंह, डॉ. देवेंद्र यादव, पूनम और मनीष कुमार आदि मौजूद रहे।