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खाप लैंड में नहीं पहुंचे सुरक्षा बल, सादे कपड़े पहनकर बचा थाना प्रभारी
जींद ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Wed, 01 Jun 2016 12:11 AM IST
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रिपोर्ट
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लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही प्रकाश सिंह समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई है। इसमें जींद जिला में हुई हिंसा के बाद में कई महत्वपूर्ण और अनछुए पहलुओं का जिक्र किया गया है। कमेटी की रिपोर्ट में जहां अधिकारियों को क्लीन चिट दी गई है, वहीं आंदोलन के दौरान जिले में केंद्रीय बलों की तैनाती पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय सुरक्षा बल केवल शहर तक तैनात रहा, जिस कारण हालात काबू नहीं हो सके। इस दौरान भीड़ हिंसक हो गई थी और थाना प्रभारी ने भी सादे कपड़े पहनकर खुद को बचाया था।
शहर में तैनात रहा केंद्रीय सुरक्षा बल
कमेटी की रिपोर्ट में लिखा गया है कि जींद हमेशा राजनीतिक आंदोलन का एक केंद्र रहा है। जिले में खापें प्रभावशाली और सक्रिय हैं। आश्चर्य की बात है कि केंद्रीय सुरक्षा बल केवल जींद शहर में तैनात रहा। जिले के लिए आवंटित किए गए केंद्रीय सुरक्षा बल की एक टुकड़ी को उसी दिन रोहतक भेज दिया गया। यदि यहां पर्याप्त सुरक्षा बल होता तो सफीदों में स्थिति काबू रहती। कमेटी ने कहा कि बीएसएफ कंपनी बीकानेर से नरवाना पहुंची। बेहतर होता यदि केंद्रीय सुरक्षा बल को पंजाब से यहां भेजा जाता। केंद्रीय सुरक्षा बल की कमी के कारण पुलिस बल को भी कठिनाई हुई।
थाना प्रभारी बोले, पुलिसकर्मियों को भी मार सकती थी भीड़
पिल्लूखेड़ा थाना में हुई आगजनी और लूट के संदर्भ में कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि थाना प्रभारी मनदीप के मुताबिक, ‘भीड़ बहुत हिंसक हो गई थी। गोलीबारी का सहारा नहीं था। भीड़ पुलिसकर्मियों को भी मार सकती थी। ऐसे में वह असैनिक कपड़े पहन कर वहां से निकल गया।’
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डीसी सूझबूझ वाले अधिकारी, एसएसपी की कार्यप्रणाली संतोषजनक
रिपोर्ट में जींद के डीसी विनय सिंह को बेहद सूझबूझ वाले और परिपक्व अधिकारी बताया है। रिपोर्ट के अनुसार 28 मार्च को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में सुनवाई के दौरान हर जाति के लोगों ने डीसी की कार्यप्रणाली और हिंसा के दौरान उनकी भूमिका की सराहना की, वहीं तत्कालीन एसएसपी अभिषेक जोरवाल की कार्यप्रणाली को भी समिति ने संतोषजनक बताया है।
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शहर में तैनात रहा केंद्रीय सुरक्षा बल
कमेटी की रिपोर्ट में लिखा गया है कि जींद हमेशा राजनीतिक आंदोलन का एक केंद्र रहा है। जिले में खापें प्रभावशाली और सक्रिय हैं। आश्चर्य की बात है कि केंद्रीय सुरक्षा बल केवल जींद शहर में तैनात रहा। जिले के लिए आवंटित किए गए केंद्रीय सुरक्षा बल की एक टुकड़ी को उसी दिन रोहतक भेज दिया गया। यदि यहां पर्याप्त सुरक्षा बल होता तो सफीदों में स्थिति काबू रहती। कमेटी ने कहा कि बीएसएफ कंपनी बीकानेर से नरवाना पहुंची। बेहतर होता यदि केंद्रीय सुरक्षा बल को पंजाब से यहां भेजा जाता। केंद्रीय सुरक्षा बल की कमी के कारण पुलिस बल को भी कठिनाई हुई।
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थाना प्रभारी बोले, पुलिसकर्मियों को भी मार सकती थी भीड़
पिल्लूखेड़ा थाना में हुई आगजनी और लूट के संदर्भ में कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि थाना प्रभारी मनदीप के मुताबिक, ‘भीड़ बहुत हिंसक हो गई थी। गोलीबारी का सहारा नहीं था। भीड़ पुलिसकर्मियों को भी मार सकती थी। ऐसे में वह असैनिक कपड़े पहन कर वहां से निकल गया।’
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डीसी सूझबूझ वाले अधिकारी, एसएसपी की कार्यप्रणाली संतोषजनक
रिपोर्ट में जींद के डीसी विनय सिंह को बेहद सूझबूझ वाले और परिपक्व अधिकारी बताया है। रिपोर्ट के अनुसार 28 मार्च को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में सुनवाई के दौरान हर जाति के लोगों ने डीसी की कार्यप्रणाली और हिंसा के दौरान उनकी भूमिका की सराहना की, वहीं तत्कालीन एसएसपी अभिषेक जोरवाल की कार्यप्रणाली को भी समिति ने संतोषजनक बताया है।