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उपचार के अभाव में गेट के बाहर महिला का हुआ गर्भपात
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Tue, 06 Sep 2016 12:14 AM IST
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नरवाना के नागरिक अस्पताल में गर्भवती महिला के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। पांच माह की गर्भवती महिला के परिजनों के अनुसार उपचार नहीं मिलने पर अस्पताल के गेट के बाहर ही महिला का गर्भपात हो गया। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाया। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि परिजन टेस्ट कराने को तैयार नहीं थे।
अस्पताल में हंगामा कर रहे गांव बडनपुर निवासी वीरेंद्र ने बताया उसकी पत्नी किरण पांच माह से गर्भवती थी। सोमवार को परिजनों के साथ इलाज करवाने के लिए नागरिक अस्पताल पहुंचे तो वहां के डॉक्टरों द्वारा उसे समयानुसार स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल सकी। वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने बिना किसी कारण के उसे इधर-उधर भेजते रहे। जबकि महिला की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही थी। लेकिन डॉक्टरों के जिम्मेवारी से पीछे हटने के कारण महिला का गर्भपात हो गया। पीड़ित महिला के पति वीरेंद्र, सास रामकली ने कहा कि जब हम गांव में थे तो हमने एंबुलेंस को फोन किया था। लेकिन एंबुलेंस विभाग ने फोन नहीं उठाया, तो वे प्राइवेट वाहन के माध्यम से गर्भवती महिला किरण को लेकर सामान्य अस्पताल में पहुंचे और उसे डॉक्टर के पास लेकर गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मिन्नतों के बाद भी डॉक्टर ने हालत पर ध्यान नहीं दिया तो उन्होंने किरण को प्राइवेट अस्पताल में ले जाना सही समझा। लेकिन गेट से बाहर निकलते ही किरण की परेशानियां बढ़ गई और गेट के बाहर ही गर्भपात हो गया। उसके बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने उसे अस्पताल में दाखिल करवाया। नागरिक अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वाती ने कहा कि लापरवाही के आरोप गलत है। महिला को कुछ टेस्ट करवाने के लिए कहा था, लेकिन परिजन उनको करवाने के लिए तैयार नहीं थे। महिला को दिक्कत होते ही उसका तुरंत ही इलाज शुरू कर दिया था।
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अस्पताल में हंगामा कर रहे गांव बडनपुर निवासी वीरेंद्र ने बताया उसकी पत्नी किरण पांच माह से गर्भवती थी। सोमवार को परिजनों के साथ इलाज करवाने के लिए नागरिक अस्पताल पहुंचे तो वहां के डॉक्टरों द्वारा उसे समयानुसार स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल सकी। वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने बिना किसी कारण के उसे इधर-उधर भेजते रहे। जबकि महिला की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही थी। लेकिन डॉक्टरों के जिम्मेवारी से पीछे हटने के कारण महिला का गर्भपात हो गया। पीड़ित महिला के पति वीरेंद्र, सास रामकली ने कहा कि जब हम गांव में थे तो हमने एंबुलेंस को फोन किया था। लेकिन एंबुलेंस विभाग ने फोन नहीं उठाया, तो वे प्राइवेट वाहन के माध्यम से गर्भवती महिला किरण को लेकर सामान्य अस्पताल में पहुंचे और उसे डॉक्टर के पास लेकर गए।
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उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मिन्नतों के बाद भी डॉक्टर ने हालत पर ध्यान नहीं दिया तो उन्होंने किरण को प्राइवेट अस्पताल में ले जाना सही समझा। लेकिन गेट से बाहर निकलते ही किरण की परेशानियां बढ़ गई और गेट के बाहर ही गर्भपात हो गया। उसके बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने उसे अस्पताल में दाखिल करवाया। नागरिक अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वाती ने कहा कि लापरवाही के आरोप गलत है। महिला को कुछ टेस्ट करवाने के लिए कहा था, लेकिन परिजन उनको करवाने के लिए तैयार नहीं थे। महिला को दिक्कत होते ही उसका तुरंत ही इलाज शुरू कर दिया था।
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