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डीएफएससी की गिरफ्तार पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Fri, 03 Feb 2017 11:41 PM IST
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दिल्ली उच्च न्यायालय
- फोटो : Google
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कान्फेड के सेवानिवृत्त स्टोरकीपर ईश्वर सिंह की आत्महत्या के मामले के आरोपी डीएफएससी अशोक रावत की गिरफ्तार पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने 28 मार्च तक गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए डीएफएससी को पुलिस जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं। पुलिस इस मामले में अब डीएफएससी की औपचारिक गिरफ्तारी डालकर उन पर लगे आरोपों की जांच करेगी। इस दौरान हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि डीएफएससी मामले से जुड़े किसी भी सबूत व गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे, अगर इस दौरान प्रभावित करने का प्रयास किया तो हाईकोर्ट उनकी अग्रिम जमानत पर दोबारा से विचार कर सकती है।
इससे पहले, डीएसफएसी अशोक रावत ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने 24 फरवरी को उनकी अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद डीएफएसी अशोक रावत ने हाईकोर्ट में अपनी अधिवक्ता के माध्यम से अग्रिम जमानत लगाई थी। जहां पर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद डीएफएससी को राहत देते हुए 28 मार्च तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। हालांकि, इस दौरान मृतक सेवानिवृत्त स्टोरकीपर ईश्वर सिंह के अधिवक्ता ने उन्होंने दलील दी कि डीएफएससी अशोक रावत इस मामले का मुख्य आरोपी है और प्रभावशाली है। अगर वह बाहर रहा तो इस मामले की जांच को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उसकी अग्रिम जमानत को मंजूर नहीं किया जाए। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि डीएफएससी अशोक रावत का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने दोनों ही पक्षों की सुनवाई करने के बाद डीएफएसी को 28 मार्च तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
ज्ञात रहे कि अर्बन इस्टेट निवासी सेवानिवृत्त स्टोर कीपर ईश्वर सिंह ने 18 जनवरी को उसके घर पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने मृतक के पास से एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें डीएफएससी अशोक रावत, तत्कालीन जुलाना थाना प्रभारी रामनिवास व कान्फेंड के ठेकेदार राकेश कुमार पर साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाने के आरोप लगाकर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर ही मृतक के भतीजे दिनेश की शिकायत पर तीनों पर आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने व एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद परिजनों ने लगभग एक सप्ताह तक नागरिक अस्पताल में गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना दिया था। बाद में परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार के आश्वासन के बाद परिजनों ने शव को उठा लिया था।
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एसएसआईटी के जांच अधिकारी सूरजभान ने बताया कि हाईकोर्ट ने डीएफएसी अशोक रावत की गिरफ्तारी पर 28 मार्च तक रोक लगा दी है और पुलिस जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं। डीएफएससी को शामिल कर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
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इससे पहले, डीएसफएसी अशोक रावत ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने 24 फरवरी को उनकी अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद डीएफएसी अशोक रावत ने हाईकोर्ट में अपनी अधिवक्ता के माध्यम से अग्रिम जमानत लगाई थी। जहां पर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद डीएफएससी को राहत देते हुए 28 मार्च तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। हालांकि, इस दौरान मृतक सेवानिवृत्त स्टोरकीपर ईश्वर सिंह के अधिवक्ता ने उन्होंने दलील दी कि डीएफएससी अशोक रावत इस मामले का मुख्य आरोपी है और प्रभावशाली है। अगर वह बाहर रहा तो इस मामले की जांच को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उसकी अग्रिम जमानत को मंजूर नहीं किया जाए। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि डीएफएससी अशोक रावत का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने दोनों ही पक्षों की सुनवाई करने के बाद डीएफएसी को 28 मार्च तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
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ज्ञात रहे कि अर्बन इस्टेट निवासी सेवानिवृत्त स्टोर कीपर ईश्वर सिंह ने 18 जनवरी को उसके घर पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने मृतक के पास से एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें डीएफएससी अशोक रावत, तत्कालीन जुलाना थाना प्रभारी रामनिवास व कान्फेंड के ठेकेदार राकेश कुमार पर साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाने के आरोप लगाकर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर ही मृतक के भतीजे दिनेश की शिकायत पर तीनों पर आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने व एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद परिजनों ने लगभग एक सप्ताह तक नागरिक अस्पताल में गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना दिया था। बाद में परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार के आश्वासन के बाद परिजनों ने शव को उठा लिया था।
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एसएसआईटी के जांच अधिकारी सूरजभान ने बताया कि हाईकोर्ट ने डीएफएसी अशोक रावत की गिरफ्तारी पर 28 मार्च तक रोक लगा दी है और पुलिस जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं। डीएफएससी को शामिल कर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।