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बच्ची की मौत पर परिजनों का हंगामा, नागरिक अस्पताल में दिया धरना
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Sat, 11 Feb 2017 12:22 AM IST
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पूनम की मां को शवगृह से बाहर लाते परिजन।
- फोटो : jind
बस स्टैंड के पास स्थित हड्डियों के एक प्रसिद्ध अस्पताल में इलाज के दौरान तीन साल की बच्ची की मौत के मामले में शुक्रवार को परिजनों ने नागरिक अस्पताल में धरना देकर विरोध जताया। परिजनों की मांग है कि इस मामले में आरोपी चिकित्सक और स्टाफ के खिलाफ गैर इरादतन हत्या व एससी/एसटी की धाराओं के तहत केस दर्ज किया जाए। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में इलाज में लापरवाही का केस दर्ज किया है। दिनभर चले घटनाक्रम के बाद परिजनों और प्रशासन के बीच बच्ची का पोस्टमार्टम पीजीआई रोहतक में करवाने पर सहमति बनी। इसके बाद परिजनों ने लघु सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। परिजनों का कहना है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, धरना जारी रहेगा और वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
गौरतलब है कि वीरवार देर सायं जींद के एक निजी अस्पताल में जाखल निवासी तीन वर्षीय पूनम की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पूनम अपने पिता और माता के साथ जींद में शादी समारोह में शामिल होने के लिए पहुंची थी। खेलते समय गिर जाने से उसके दांए हाथ में चोट लगी थी। इसके बाद उसे जैन धर्मार्थ अस्पताल में दाखिल करवाया गया। यहां पूनम के हाथ में फ्रैक्चर बताया गया। वहीं, उपचार के दौरान ही उसकी मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जींद के जिला राजस्व अधिकारी रामफल कटारिया, डीएसपी कप्तान सिंह और शहर थाना प्रभारी नरसिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पूनम के परिवार की काफी महिलाएं भी अस्पताल पहुंचीं और उन्होंने अस्पताल में धरना शुरू कर दिया।
परिजनों को नहीं दी सूचना
पूनम के परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर में जब बच्ची की हालत बिगड़ी तो उसे चिकित्सकों ने शहर के एक दूसरे अस्पताल में भेज दिया, जबकि इसकी सूचना परिजनों को नहीं दी गई। ऐसे में परिजन इस मामले में चिकित्सक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहते हैं।
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पहले अस्पताल, फिर लघु सचिवालय के बाहर धरना
बच्ची की मौत के मामले में परिजनों ने सुबह नागरिक अस्पताल में शवगृह के बाहर धरना शुरू कर दिया। यहां प्रशासन के बीच बातचीत में शहर में धारा-144 को देखते हुए लघु सचिवालय के बाहर धरने पर सहमति बनी। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे धरने को लघु सचिवालय के बाहर शिफ्ट कर दिया गया।
शव को भेजा पीजीआई
वीरवार को बच्ची की मौत के बाद शुक्रवार सुबह प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाने का ऑप्शन परिजनों को दिया, लेकिन इसे ठुकरा दिया गया। इसके बाद पीजीआई रोहतक में पोस्टमार्टम करवाने पर सहमति बनी। इस पर शव को पीजीआई रोहतक भेजा गया।
पुलिस कार्रवाई पर असंतोष
पूनम के पिता संदीप, उनकी पत्नी सोनिया तथा परिवार के दूसरे लोगों ने जैन धर्मार्थ अस्पताल के चिकित्सक बनेश गर्ग के खिलाफ पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले से असंतोष जताया। पुलिस ने शिकायत पर चिकित्सक के खिलाफ धारा लापरवाही का मामला दर्ज किया। वहीं परिजनों का कहना है कि यह गैर इरादतन हत्या है। ऐसे में एफआईआर इसके अनुसार एससी/एसटी एक्ट को जोड़ते हुए की जाए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
परिजनों ने लिखित शिकायत दी है। इसके आधार पर ही पुलिस ने कार्रवाई की है। अब परिजन जो नाम दे रहे हैं, उन लोगों को एफआईआर में शामिल कर लिया जाएगा। एससी/एसटी तथा गैर इरादतन हत्या की धारा जोड़ने के लिए एडीए से राय ली जा रही है। पीजीआई से पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पूरी तरह स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इस पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-कप्तान सिंह, सिटी डीएसपी
नागरिक अस्पताल में नहीं है हड्डियों का डॉक्टर
बच्ची की मौत के मामले के बाद नागरिक अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने का मामला एक बार फिर उलझ गया है। परिजनों का कहना है कि वे वीरवार को बच्ची को नागरिक अस्पताल ही लेकर आए थे, जहां से चिकित्सकों ने उन्हें जैन धर्मार्थ अस्पताल में जाने को कहा। परिजनों का कहना है कि जैन धर्मार्थ अस्पताल में करीब तीन घंटे तक उन्हें बेटी से मिलने नहीं दिया गया।
एनेस्थीसिया में लापरवाही की संभावना
अभी तक बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस मामले में एनेस्थीसिया की अधिक डोज एक कारण हो सकता है। वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार बुजुर्गों में इस प्रकार की घटना हो सकती है, लेकिन बच्चों में संभावना नहीं है। बहरहाल, अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मामले से पर्दा उठेगा।
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गौरतलब है कि वीरवार देर सायं जींद के एक निजी अस्पताल में जाखल निवासी तीन वर्षीय पूनम की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पूनम अपने पिता और माता के साथ जींद में शादी समारोह में शामिल होने के लिए पहुंची थी। खेलते समय गिर जाने से उसके दांए हाथ में चोट लगी थी। इसके बाद उसे जैन धर्मार्थ अस्पताल में दाखिल करवाया गया। यहां पूनम के हाथ में फ्रैक्चर बताया गया। वहीं, उपचार के दौरान ही उसकी मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जींद के जिला राजस्व अधिकारी रामफल कटारिया, डीएसपी कप्तान सिंह और शहर थाना प्रभारी नरसिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पूनम के परिवार की काफी महिलाएं भी अस्पताल पहुंचीं और उन्होंने अस्पताल में धरना शुरू कर दिया।
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परिजनों को नहीं दी सूचना
पूनम के परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर में जब बच्ची की हालत बिगड़ी तो उसे चिकित्सकों ने शहर के एक दूसरे अस्पताल में भेज दिया, जबकि इसकी सूचना परिजनों को नहीं दी गई। ऐसे में परिजन इस मामले में चिकित्सक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहते हैं।
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पहले अस्पताल, फिर लघु सचिवालय के बाहर धरना
बच्ची की मौत के मामले में परिजनों ने सुबह नागरिक अस्पताल में शवगृह के बाहर धरना शुरू कर दिया। यहां प्रशासन के बीच बातचीत में शहर में धारा-144 को देखते हुए लघु सचिवालय के बाहर धरने पर सहमति बनी। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे धरने को लघु सचिवालय के बाहर शिफ्ट कर दिया गया।
शव को भेजा पीजीआई
वीरवार को बच्ची की मौत के बाद शुक्रवार सुबह प्रशासन ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाने का ऑप्शन परिजनों को दिया, लेकिन इसे ठुकरा दिया गया। इसके बाद पीजीआई रोहतक में पोस्टमार्टम करवाने पर सहमति बनी। इस पर शव को पीजीआई रोहतक भेजा गया।
पुलिस कार्रवाई पर असंतोष
पूनम के पिता संदीप, उनकी पत्नी सोनिया तथा परिवार के दूसरे लोगों ने जैन धर्मार्थ अस्पताल के चिकित्सक बनेश गर्ग के खिलाफ पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले से असंतोष जताया। पुलिस ने शिकायत पर चिकित्सक के खिलाफ धारा लापरवाही का मामला दर्ज किया। वहीं परिजनों का कहना है कि यह गैर इरादतन हत्या है। ऐसे में एफआईआर इसके अनुसार एससी/एसटी एक्ट को जोड़ते हुए की जाए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
परिजनों ने लिखित शिकायत दी है। इसके आधार पर ही पुलिस ने कार्रवाई की है। अब परिजन जो नाम दे रहे हैं, उन लोगों को एफआईआर में शामिल कर लिया जाएगा। एससी/एसटी तथा गैर इरादतन हत्या की धारा जोड़ने के लिए एडीए से राय ली जा रही है। पीजीआई से पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पूरी तरह स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इस पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-कप्तान सिंह, सिटी डीएसपी
नागरिक अस्पताल में नहीं है हड्डियों का डॉक्टर
बच्ची की मौत के मामले के बाद नागरिक अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने का मामला एक बार फिर उलझ गया है। परिजनों का कहना है कि वे वीरवार को बच्ची को नागरिक अस्पताल ही लेकर आए थे, जहां से चिकित्सकों ने उन्हें जैन धर्मार्थ अस्पताल में जाने को कहा। परिजनों का कहना है कि जैन धर्मार्थ अस्पताल में करीब तीन घंटे तक उन्हें बेटी से मिलने नहीं दिया गया।
एनेस्थीसिया में लापरवाही की संभावना
अभी तक बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस मामले में एनेस्थीसिया की अधिक डोज एक कारण हो सकता है। वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार बुजुर्गों में इस प्रकार की घटना हो सकती है, लेकिन बच्चों में संभावना नहीं है। बहरहाल, अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मामले से पर्दा उठेगा।