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भैरोखेड़ा में युवक का शव मिलने का मामला
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:16 AM IST
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पोस्टमार्टम में लेट लतीफी से शव फूला, भेजा पीजीआई
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। शनिवार सुबह भैरोखेड़ा गांव में मिले मोरखी निवासी अंकित के शव का नागरिक अस्पताल में दोपहर एक बजे तक भी पोस्टमार्टम नहीं हो सका। एक बजे चिकित्सक जब पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे तो देखा की शव की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। उन्होंने पोस्टमार्टम नहीं किया और इसके लिए पीजीआई रोहतक भेज दिया। परिजनों ने नागरिक अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। पुलिस व अस्पताल चिकित्सकों के बीच भी इस बात को लेकर बहस हुई कि चिकित्सकों ने यदि शव को पीजीआई ही रेफर करना था तो सुबह या रात को ही क्यों नहीं किया। जिस चिकित्सक को शव का पोस्टमार्टम करना था, वह दोपहर 12 बजे नागरिक अस्पताल पहुंचा। एक बजे के बाद शव को पुलिस की मौजूदगी में रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। अस्पताल प्रशासन के रवैये से परिजन काफी खफा नजर आए।
बता दें कि गांव मोरखी निवासी 20 वर्षीय अंकित का शव शनिवार सुबह दस बजे भैरोखेड़ा के पास पड़ा मिला था। इसके बाद सूचना पुलिस को मिली। लगभग एक बजे पुलिस शव को लेकर नागरिक अस्पताल में पहुंची। ढाई बजे परिजन नागरिक अस्पताल पहुंचे और शव की शिनाख्त की। इसके बाद गांव की पंचायत नागरिक अस्पताल पहुंची। जिसके बाद जुलाना पुलिस ने कागजी कार्यवाही की। परिजनों के बयान दर्ज किए। हत्या का मामला होने के कारण शव के पोस्टमार्टम के लिए दो चिकित्सकों का बोर्ड बनाया गया। इसमें डॉ. संतराम व डॉ. राजेंद्र की ड्यूटी लगाई गई। रात लगभग आठ बजे तक पुलिस ने अपनी कागजी कार्यवाही पूरी की। सुबह आठ बजे पुलिस अपने कागजात लेकर नागरिक अस्पताल पहुंची, लेकिन यहां पर चिकित्सक मौजूद नहीं मिले। इसके बाद पुलिस व परिजन अस्पताल में चिकित्सकों के आने का इंतजार करते रहे। डॉ. संतराम तो नागरिक अस्पताल पहुंच गए लेकिन डॉ. राजेंद्र नहीं आए। डॉ. राजेंद्र को कई बार फोन किया गया। उन्होंने कहा कि वे कैथल से आ रहे हैं और 15 मिनट में ही पहुंच जाएंगे। डॉ. राजेंद्र 12 बजे नागरिक अस्पताल पहुंचे, तब तक परिजन काफी खफा हो चुके थे। मामले की गंभीरता को समझते हुए डीएसपी रामभज व डीएसपी पवन शर्मा भी मौके पर पहुंच कर परिजनों को समझाया। चिकित्सकों ने जब शव की हालत देखी तो उन्होंने पोस्टमार्टम पीजीआई रोहतक में करवाने की बात कही। इसके बाद परिजन काफी नाराज हो गए।
परिजनों ने कहा कि यदि सुबह चिकित्सक पीजीआई भेज देते तो अब तक पोस्टमार्टम हो जाता, लेकिन चिकित्सकों के नहीं आने के कारण उन्हें बहुत परेशानी हुई है। घर में बैठे लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन अस्पताल प्रशासन मानवीय संवेदनाओं को कुछ नहीं समझता।
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शवगृह में नहीं है डी-फ्रीजर की व्यवस्था
शवगृह में डी-फ्रीजर की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण यदि रात को कोई शव रखा जाता है तो सुबह तक उसकी हालत वैसे ही खराब हो जाती है। अंकित के शव पर मिट्टी व पानी लगा होने के कारण इसकी हालत और भी खराब हो गई। अस्पताल को डी-फ्रीजर मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक इनको शवग्रह में नहीं लगाया गया है।
पुलिस और चिकित्सकों के बीच हुई बहस
दोपहर 12 बजे मोरखी गांव के लोग काफी नाराज हो गए। वे सड़क पर शव रखकर जाम लगाने की बात कहने लगे। इससे पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। डीएसपी पवन शर्मा व डीएसपी रामभज ने चिकित्सकों से कहा कि जब सुबह पुलिस ने सारे कागजात तैयार कर दिए थे तो शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया गया। इस पर चिकित्सकों का कहना था कि उन्हें समय पर कागजात नहीं मिले। किसी भी चिकित्सक ने अपनी कोई गलती नहीं मानी। पुलिस ने काफी प्रयासों के बाद परिजनों को समझाया और इसके बाद ही परिजन शव का पोस्टमार्टम रोहतक पीजीआई में करवाने पर राजी हुए।
अस्पताल प्रशासन की मानवीय संवेदना खत्म
अंकित के चचेरे भाई मुकेश ने कहा कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। घर में महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन अस्पताल प्रशासन पर इसका कोई असर नहीं है। डॉ. राजेंद्र ने उन्हें फोन पर तीन घंटे तक गुमराह किया। नौ बजे डॉ. राजेंद्र ने कहा कि वह बस 15 मिनट में पहुंच रहे हैं, लेकिन वह 12 बजे के बाद पहुंचे। मुकेश ने कहा कि वे अस्पताल प्रशासन की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भेजेंगे।
शव सड़ने के कारण भेजा पीजीआई रोहतक
शव की हालत काफी खराब हो चुकी थी। पानी व मिट्टी के कारण शव फूल गया था। रोहतक पीजीआई में पोस्टमार्टम के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट उपलब्ध हैं। यहां शव का पोस्टमार्टम होता तो कॉज ऑफ डेथ पता नहीं लग सकता था। रोहतक पीजीआई में बारीकी से पोस्टमार्टम किया जाता है। शवगृह के लिए डी-फ्रीजर मिल चुके हैं। जल्द ही उनको वहां फिट किया जाएगा।
डॉ. राजेश भोला, एमएस, नागरिक अस्पताल।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। शनिवार सुबह भैरोखेड़ा गांव में मिले मोरखी निवासी अंकित के शव का नागरिक अस्पताल में दोपहर एक बजे तक भी पोस्टमार्टम नहीं हो सका। एक बजे चिकित्सक जब पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे तो देखा की शव की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। उन्होंने पोस्टमार्टम नहीं किया और इसके लिए पीजीआई रोहतक भेज दिया। परिजनों ने नागरिक अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। पुलिस व अस्पताल चिकित्सकों के बीच भी इस बात को लेकर बहस हुई कि चिकित्सकों ने यदि शव को पीजीआई ही रेफर करना था तो सुबह या रात को ही क्यों नहीं किया। जिस चिकित्सक को शव का पोस्टमार्टम करना था, वह दोपहर 12 बजे नागरिक अस्पताल पहुंचा। एक बजे के बाद शव को पुलिस की मौजूदगी में रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। अस्पताल प्रशासन के रवैये से परिजन काफी खफा नजर आए।
बता दें कि गांव मोरखी निवासी 20 वर्षीय अंकित का शव शनिवार सुबह दस बजे भैरोखेड़ा के पास पड़ा मिला था। इसके बाद सूचना पुलिस को मिली। लगभग एक बजे पुलिस शव को लेकर नागरिक अस्पताल में पहुंची। ढाई बजे परिजन नागरिक अस्पताल पहुंचे और शव की शिनाख्त की। इसके बाद गांव की पंचायत नागरिक अस्पताल पहुंची। जिसके बाद जुलाना पुलिस ने कागजी कार्यवाही की। परिजनों के बयान दर्ज किए। हत्या का मामला होने के कारण शव के पोस्टमार्टम के लिए दो चिकित्सकों का बोर्ड बनाया गया। इसमें डॉ. संतराम व डॉ. राजेंद्र की ड्यूटी लगाई गई। रात लगभग आठ बजे तक पुलिस ने अपनी कागजी कार्यवाही पूरी की। सुबह आठ बजे पुलिस अपने कागजात लेकर नागरिक अस्पताल पहुंची, लेकिन यहां पर चिकित्सक मौजूद नहीं मिले। इसके बाद पुलिस व परिजन अस्पताल में चिकित्सकों के आने का इंतजार करते रहे। डॉ. संतराम तो नागरिक अस्पताल पहुंच गए लेकिन डॉ. राजेंद्र नहीं आए। डॉ. राजेंद्र को कई बार फोन किया गया। उन्होंने कहा कि वे कैथल से आ रहे हैं और 15 मिनट में ही पहुंच जाएंगे। डॉ. राजेंद्र 12 बजे नागरिक अस्पताल पहुंचे, तब तक परिजन काफी खफा हो चुके थे। मामले की गंभीरता को समझते हुए डीएसपी रामभज व डीएसपी पवन शर्मा भी मौके पर पहुंच कर परिजनों को समझाया। चिकित्सकों ने जब शव की हालत देखी तो उन्होंने पोस्टमार्टम पीजीआई रोहतक में करवाने की बात कही। इसके बाद परिजन काफी नाराज हो गए।
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परिजनों ने कहा कि यदि सुबह चिकित्सक पीजीआई भेज देते तो अब तक पोस्टमार्टम हो जाता, लेकिन चिकित्सकों के नहीं आने के कारण उन्हें बहुत परेशानी हुई है। घर में बैठे लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन अस्पताल प्रशासन मानवीय संवेदनाओं को कुछ नहीं समझता।
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शवगृह में नहीं है डी-फ्रीजर की व्यवस्था
शवगृह में डी-फ्रीजर की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण यदि रात को कोई शव रखा जाता है तो सुबह तक उसकी हालत वैसे ही खराब हो जाती है। अंकित के शव पर मिट्टी व पानी लगा होने के कारण इसकी हालत और भी खराब हो गई। अस्पताल को डी-फ्रीजर मिल चुके हैं, लेकिन अभी तक इनको शवग्रह में नहीं लगाया गया है।
पुलिस और चिकित्सकों के बीच हुई बहस
दोपहर 12 बजे मोरखी गांव के लोग काफी नाराज हो गए। वे सड़क पर शव रखकर जाम लगाने की बात कहने लगे। इससे पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। डीएसपी पवन शर्मा व डीएसपी रामभज ने चिकित्सकों से कहा कि जब सुबह पुलिस ने सारे कागजात तैयार कर दिए थे तो शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया गया। इस पर चिकित्सकों का कहना था कि उन्हें समय पर कागजात नहीं मिले। किसी भी चिकित्सक ने अपनी कोई गलती नहीं मानी। पुलिस ने काफी प्रयासों के बाद परिजनों को समझाया और इसके बाद ही परिजन शव का पोस्टमार्टम रोहतक पीजीआई में करवाने पर राजी हुए।
अस्पताल प्रशासन की मानवीय संवेदना खत्म
अंकित के चचेरे भाई मुकेश ने कहा कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। घर में महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन अस्पताल प्रशासन पर इसका कोई असर नहीं है। डॉ. राजेंद्र ने उन्हें फोन पर तीन घंटे तक गुमराह किया। नौ बजे डॉ. राजेंद्र ने कहा कि वह बस 15 मिनट में पहुंच रहे हैं, लेकिन वह 12 बजे के बाद पहुंचे। मुकेश ने कहा कि वे अस्पताल प्रशासन की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भेजेंगे।
शव सड़ने के कारण भेजा पीजीआई रोहतक
शव की हालत काफी खराब हो चुकी थी। पानी व मिट्टी के कारण शव फूल गया था। रोहतक पीजीआई में पोस्टमार्टम के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट उपलब्ध हैं। यहां शव का पोस्टमार्टम होता तो कॉज ऑफ डेथ पता नहीं लग सकता था। रोहतक पीजीआई में बारीकी से पोस्टमार्टम किया जाता है। शवगृह के लिए डी-फ्रीजर मिल चुके हैं। जल्द ही उनको वहां फिट किया जाएगा।
डॉ. राजेश भोला, एमएस, नागरिक अस्पताल।