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Jind News: शिक्षा के मंदिर की दीवारों में आईं दरारें, कहां पढ़ें नौनिहाल
Mon, 23 Sep 2024 01:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 23 Sep 2024 01:56 AM IST
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अलेवा। बिघाना गांव के राजकीय प्राइमरी स्कूल में छात्रों के बैठने के लिए बनाए कमरे पुराने व जर्जर हो चुके हैं। इतना ही नहीं इन कमरों की छत कंडम हो चुकी है। छात्रों को हर समय इनके गिरने का अंदेशा रहता है। शिक्षक किसी भी अनहोनी की डर से बच्चों को इन कमरों में बैठाकर पढ़ाने के बजाय दूसरे कमरे में बैठाकर पढ़ाते हैं, मगर उनको डर रहता है कि कमरों के सामने खेल रहे बच्चे इनके अंदर न जले जाएं।
ग्रामीण बलवान, दर्शन, राजपाल, भीम, कृष्ण, राहुल, रमन, साहिल, मनोज, राजेंद्र व तेजपाल ने बताया कि राजकीय प्राइमरी स्कूल के कमरों के निर्माण के लिए पंचायत के अलावा शिक्षकों से भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल के इन कमरों की दीवारों में दरार आने के अलावा बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों व पंचायत से पुराने कमरों को ऊंचा उठवाकर निर्माण कराने की मांग की है।
कमरे हो चुके कंडम घोषित : मुख्य शिक्षक
राजकीय प्राइमरी स्कूल बिघाना के मुख्य शिक्षक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पुराने व जर्जर कमरों में किसी भी छात्र को नहीं जाने दिया जाता है। बच्चों को अन्य कमरों में बैठाकर पढ़ाया जाता है। स्कूल स्टाफ ने कमरों को बनाने के लिए उच्च अधिकारियों के पास रिपोर्ट भेजी है। कंडम कमरों के निर्माण के लिए बजट आने का इंतजार है। बजट आते ही कमरों को ऊंचा करके निर्माण किया जाएगा।
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ग्रामीण बलवान, दर्शन, राजपाल, भीम, कृष्ण, राहुल, रमन, साहिल, मनोज, राजेंद्र व तेजपाल ने बताया कि राजकीय प्राइमरी स्कूल के कमरों के निर्माण के लिए पंचायत के अलावा शिक्षकों से भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल के इन कमरों की दीवारों में दरार आने के अलावा बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों व पंचायत से पुराने कमरों को ऊंचा उठवाकर निर्माण कराने की मांग की है।
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कमरे हो चुके कंडम घोषित : मुख्य शिक्षक
राजकीय प्राइमरी स्कूल बिघाना के मुख्य शिक्षक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पुराने व जर्जर कमरों में किसी भी छात्र को नहीं जाने दिया जाता है। बच्चों को अन्य कमरों में बैठाकर पढ़ाया जाता है। स्कूल स्टाफ ने कमरों को बनाने के लिए उच्च अधिकारियों के पास रिपोर्ट भेजी है। कंडम कमरों के निर्माण के लिए बजट आने का इंतजार है। बजट आते ही कमरों को ऊंचा करके निर्माण किया जाएगा।
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