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मांगों को लेकर माकपा ने दिया धरना
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डीसी डॉ. आदित्य दहिया के पीए प्रवीण परूथी को ज्ञापन सौंपते लोग।
- फोटो : Jind
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माकपा सदस्यों ने देश व्यापी आंदोलन की कड़ी में जींद में भी लघु सचिवालय के बाहर धरना दिया। इसके बाद डीसी डॉ. आदित्य दहिया के पीए प्रवीण परूथी को ज्ञापन सौंपा।
सीपीआईएम जिला सचिव कामरेड रमेश चंद्र ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा एक साल पूरा होने पर उपलब्धियों का झूठा प्रचार किया जा रहा है, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण परिणाम स्वरूप देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। संकट का बोझ आम जनता पर लाद दिया गया है। सरकार बिना सोचे समझे अमानवीय ढंग से काम कर रही है। प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा असहनीय है जो लगातार यातनाएं एवं पीड़ा झेल रहे हैं। कई प्रवासी भूख, प्यास, थकावट और दुर्घटनाओं की वजह से अपनी जान गवां चुके हैं। सरकार द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज महज छलावा है। सरकार की गलत नीतियों से मजदूर, किसान, छोटे दुकानदार, कारोबारी एवं उद्योग तबाही की हालात में पहुंच गए हैं। इस दौरान कामरेड प्रकाश चंद्र व फूल सिंह श्योकंद ने कहा कि सरकार पूरे देश में कृषि संबंधी अध्यादेश लेकर आई है, जो किसानों के बिल्कुल विरोध में है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम में प्रस्तावित संसोधन देश की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। किसानों को बड़ी बहुराष्ट्रीय कृषि कंपनियों तथा घरेलू कार्पोरेटस का गुलाम बनाने का रास्ता खोलकर किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है। इसके विरोध में किसानों ने पिछले दिनों इन अध्यादेशों की प्रतियां भी जलाई थी। इस अवसर पर असीम, पवन कुमार, रणबीर, शीलकराम, संदीप दालमवाला, प्रवीण, राजेंद्र फौजी, धर्मपाल, रविंद्र मौजूद रहे।
बॉक्स माकपा की मांगकामरेड रमेश चंद्र ने कहा कि टैक्स नहीं भरने की श्रेणी में आने वाले सभी परिवारों को छह महीने तक 7500 रुपये प्रति महीना नकद आर्थिक सहायता दी जाए। निर्माण मजदूरों के आवेदनों की बिना शर्त राशि जारी की जाए। सभी जरूरतमंद परिवारों को छह महीने तक प्रति महीना दस किलोग्राम प्रति व्यक्ति राशन सहित जरूरत की सभी वस्तुओं का मुफ्त वितरण किया जाए। फंसे हुए प्रवासी मजदूरों को उनके मूल स्थानों तक पहुंचाने के लिए तुरंत भोजन और पानी के साथ मुफ्त परिवहन के साधन प्रदान किए जाए। मनरेगा में 200 दिन काम व 600 रुपये दिहाड़ी दी जाए। पैट्रोल, डीजल व घरेलू गैस पर टैक्सों की बढ़ोतरी वापस ली जाए। राज्य में बढ़ाए गया बस किराया वापिस लिया जाए। किसानों की फसल बर्बादी के मुआवजे तथा फसल खरीद का तुरंत भुगतान किया जाए।
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दुकानदारों, सूक्ष्म एवं छोटे उद्योगों एवं कारोबारियों का लॉकडाउन के समय का बिजली बिल माफ किया जाए। प्राइवेट स्कूलों में दाखिल विद्यार्थियों की फीस माफ की जाए। मासाखोरों को सब्जी मंडी में सब्जी बेचने की अनुमति दी जाए। प्रवासी भट्ठा मजदूरों को घर भेजने का प्रबंध किया जाए।
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सीपीआईएम जिला सचिव कामरेड रमेश चंद्र ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा एक साल पूरा होने पर उपलब्धियों का झूठा प्रचार किया जा रहा है, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण परिणाम स्वरूप देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। संकट का बोझ आम जनता पर लाद दिया गया है। सरकार बिना सोचे समझे अमानवीय ढंग से काम कर रही है। प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा असहनीय है जो लगातार यातनाएं एवं पीड़ा झेल रहे हैं। कई प्रवासी भूख, प्यास, थकावट और दुर्घटनाओं की वजह से अपनी जान गवां चुके हैं। सरकार द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज महज छलावा है। सरकार की गलत नीतियों से मजदूर, किसान, छोटे दुकानदार, कारोबारी एवं उद्योग तबाही की हालात में पहुंच गए हैं। इस दौरान कामरेड प्रकाश चंद्र व फूल सिंह श्योकंद ने कहा कि सरकार पूरे देश में कृषि संबंधी अध्यादेश लेकर आई है, जो किसानों के बिल्कुल विरोध में है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम में प्रस्तावित संसोधन देश की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। किसानों को बड़ी बहुराष्ट्रीय कृषि कंपनियों तथा घरेलू कार्पोरेटस का गुलाम बनाने का रास्ता खोलकर किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है। इसके विरोध में किसानों ने पिछले दिनों इन अध्यादेशों की प्रतियां भी जलाई थी। इस अवसर पर असीम, पवन कुमार, रणबीर, शीलकराम, संदीप दालमवाला, प्रवीण, राजेंद्र फौजी, धर्मपाल, रविंद्र मौजूद रहे।
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बॉक्स माकपा की मांगकामरेड रमेश चंद्र ने कहा कि टैक्स नहीं भरने की श्रेणी में आने वाले सभी परिवारों को छह महीने तक 7500 रुपये प्रति महीना नकद आर्थिक सहायता दी जाए। निर्माण मजदूरों के आवेदनों की बिना शर्त राशि जारी की जाए। सभी जरूरतमंद परिवारों को छह महीने तक प्रति महीना दस किलोग्राम प्रति व्यक्ति राशन सहित जरूरत की सभी वस्तुओं का मुफ्त वितरण किया जाए। फंसे हुए प्रवासी मजदूरों को उनके मूल स्थानों तक पहुंचाने के लिए तुरंत भोजन और पानी के साथ मुफ्त परिवहन के साधन प्रदान किए जाए। मनरेगा में 200 दिन काम व 600 रुपये दिहाड़ी दी जाए। पैट्रोल, डीजल व घरेलू गैस पर टैक्सों की बढ़ोतरी वापस ली जाए। राज्य में बढ़ाए गया बस किराया वापिस लिया जाए। किसानों की फसल बर्बादी के मुआवजे तथा फसल खरीद का तुरंत भुगतान किया जाए।
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दुकानदारों, सूक्ष्म एवं छोटे उद्योगों एवं कारोबारियों का लॉकडाउन के समय का बिजली बिल माफ किया जाए। प्राइवेट स्कूलों में दाखिल विद्यार्थियों की फीस माफ की जाए। मासाखोरों को सब्जी मंडी में सब्जी बेचने की अनुमति दी जाए। प्रवासी भट्ठा मजदूरों को घर भेजने का प्रबंध किया जाए।

मांगों को लेकर लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे माकपा के सदस्य।- फोटो : Jind