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कोरोना ने छीना पिता को, पिता थे तो हर मंजिल लगती थी आसान
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सोरन के परिवार को फोटो।
- फोटो : Jind
जींद। कोरोना की दूसरी लहर ने कई परिवारों में दर्द दिया है। ऐसा ही एक परिवार है रूपगढ़ गांव निवासी सोरन का। ढाई एकड़ के किसान सोरन की कोरोना के चलते 28 मार्च को मौत हो गई। ऐसे में अब सोरन के 17 वर्षीय बेटे व 21 वर्षीय बेटी के सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा हो गया।
सोरन का बेटा सौभित बताता है कि उनके पिता एक साधारण किसान थे। महज ढाई एकड़ जमीन में खेती करते थे। इसके बावजूद कभी किसी चीज की कमी नहीं रहने दी, लेकिन उनके जाने के बाद जीवन में जो खालीपन आया है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। सौभित 12वीं कक्षा का छात्र हैं और अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं। सौभित की 21 वर्षीय बहन बीए अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। प्रीति के अनुसार पापा ने हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। शिक्षा को लेकर कभी मन में डर नहीं रहा। उनके जाने के बाद अब सब कुछ बहुत मुश्किल लग रहा है। प्रीति बताती हैं कि पिता घर में अकेले कमाने वाले थे। मां गृहणी हैं, पशुपालन करती हैं, लेकिन अब उनके कंधों पर ही पूरे घर को बोझ आ गया है।
किसको बोलें हैप्पी फादर्स - डे
फादर्स - डे पर सौभित व प्रीति और भी अधिक दुखी हैं। उनके पिता नहीं रहे। ऐसे में वे अब किसको हैप्पी फादर्स - डे बोलेंगे। प्रीति बताती हैं कि विचारों में उनके पिता हमेशा उनके साथ रहेंगे और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।
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सोरन का बेटा सौभित बताता है कि उनके पिता एक साधारण किसान थे। महज ढाई एकड़ जमीन में खेती करते थे। इसके बावजूद कभी किसी चीज की कमी नहीं रहने दी, लेकिन उनके जाने के बाद जीवन में जो खालीपन आया है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। सौभित 12वीं कक्षा का छात्र हैं और अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं। सौभित की 21 वर्षीय बहन बीए अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। प्रीति के अनुसार पापा ने हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। शिक्षा को लेकर कभी मन में डर नहीं रहा। उनके जाने के बाद अब सब कुछ बहुत मुश्किल लग रहा है। प्रीति बताती हैं कि पिता घर में अकेले कमाने वाले थे। मां गृहणी हैं, पशुपालन करती हैं, लेकिन अब उनके कंधों पर ही पूरे घर को बोझ आ गया है।
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किसको बोलें हैप्पी फादर्स - डे
फादर्स - डे पर सौभित व प्रीति और भी अधिक दुखी हैं। उनके पिता नहीं रहे। ऐसे में वे अब किसको हैप्पी फादर्स - डे बोलेंगे। प्रीति बताती हैं कि विचारों में उनके पिता हमेशा उनके साथ रहेंगे और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।
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