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कोरोना ने एक साल पहले जैसे हालात बनाए
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शहर का सबसे व्यस्त पटियाला चौक लॉकडाउन के दौरान सुनसान पड़ा।
- फोटो : Jind
गत वर्ष मार्च महीने से शुरू हुआ कोरोना महामारी का दौर आज एक वर्ष बाद भी जारी है। जो हालात पिछले वर्ष मार्च महीने में थे, ठीक उसी प्रकार के हालात अब भी बन रहे हैं। इस बार का वायरस ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। मार्च में अब कोरोना संक्रमित के 375 मामले आ चुके हैँ। इसके बावजूद लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। भीड़ में खड़े होना और मास्क नहीं लगाना आम देखा जा सकता है।
जिले में कोरोना संक्रमण का पहला मामला 6 अप्रैल 2020 को आया था। इसके चार दिन बाद एक मामला और आया था। अप्रैल में दो ही मामले सामने आए थे और दोनों युवक ठीक हो गए थे। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन मई में कोरोना संक्रमण के 29 मामले सामने आने के साथ दो लोगों की मौत भी हो गई थी। पहली मौत के बाद लोगों में कोरोना को लेकर चिंता साफ देखी जा रही थी। कोरोना के डर की वजह से शहर की सड़कें सुनसान नजर आती थीं। दिनभर सड़कों पर ईक्का-दुक्का लोग ही दिखाई देते थे और वह भी पैदल चलते हुए। वातावरण पूरी तरह से साफ हो गया था। इसके बाद जून में 79 मामले सामने आए। जुलाई में कोरोना ने फिर रफ्तार पकड़ी और 192 लोग पॉजिटिव हो गए। सबसे ज्यादा असर सितंबर महीने में देखा गया। सितंबर में 1371 लोग पॉजिटिव हुए। रोजना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ता गया। सितंबर में दस दिन ऐसे आए, जब संक्रमितों की संख्या 70 के पार आई। सितंबर में ऐसा कोई दिन नहीं था जिस दिन संक्रमितों का आंकड़ा 20 से नीचे गया हो। सितंबर में 20 लोगों की मौत भी हुई। अक्तूबर महीने में फिर कोरोना की रफ्तार कुछ कम हुई, लेकिन नवंबर महीने में फिर से कोरोना बढ़ा और 24 लोगों की जिंदगी छीन लिया।
दिसंबर महीने से कोरोना संक्रमण की रफ्तार काफी कम हो गई। दिसंबर में 845 मामले सामने आए और 11 लोगों की मौत हुई। जनवरी महीने में संक्रमितों के मिलने के मामले में काफी कमी और 165 लोग संक्रमित पाए गए। फरवरी महीने में तो मानो कोरोना खत्म ही हो गया था। फरवरी में 24 मामले सामने आए और तीन संक्रमित ही बचे थे, लेकिन मार्च महीने की शुरुआत से कोरोना ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। अब तक अप्रैल तथा फरवरी महीना ही ऐसा बीता है, जिसमें कोई मौत नहीं हुई हो। मार्च महीने में भी दो लोगों की जान जा चुकी है।
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जिले की कोरोना को लेकर वर्तमान स्थिति
स्वास्थ्य विभाग कोरोना की जांच के लिए अब तक 189558 लोगों के सैंपल लिए हैं। इनमें से 5614 लोग पॉजिटिव आ चुके हैं, जबकि 5272 लोग ठीक हो चुके हैं। कोरोना की वजह से अब तक 86 लोगों की मौत हो चुकी है। जिले में इस समय 256 एक्टिव मामले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 196470 लोगों की स्क्रीनिंग की है, जो या तो विदेश से आए हैं या फिर किसी दूसरे प्रदेश से। जिले के 184913 लोग ऐसे हैं, जिन्होंने क्वारंटीन समय को पूरा कर लिया है। इसके अलावा 6121 लोग क्वारंटीन हैं। ये लोग ऐसे हैं जो या तो संक्रमित हैं या फिर संक्रमितों के संपर्क में आए हुए हैं। नागरिक अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में 26 लोग दाखिल हैं।
पिछले एक साल का कोरोना का सफर
महीना पॉजिटिव मौत निगेटिव
अप्रैल 02 0 2
मई 29 2 27
जून 79 2 75
जुलाई 192 1 189
अगस्त 432 3 430
सितंबर 1371 20 1163
अक्तूबर 890 19 783
नवंबर 1210 24 1148
दिसंबर 845 11 1114
जनवरी 165 2 175
फरवरी 24 0 37
मार्च 375 2 129
कुल 5614 86 5272
मार्च में कोरोना का संक्रमण काफी रफ्तार से फैल रहा है। लोगों को संभलना होगा नहीं तो यह जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। घर से निकलते ही व्यक्ति को मास्क लगाना चाहिए तथा दो गज दूरी के नियम का पालन करना चाहिए। जिले में अब तक 5614 लोग पॉजिटिव आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार वैक्सीनेशन का कार्य कर रहा है तथा लोगों के कोरोना जांच सैंपल ले रहा है।
डॉ. मनजीत सिंह सिविल सर्जन, जींद।
एकमात्र ईएनटी सर्जन डॉ. ललित गुप्त को कोरोना ने छीना
शहर के जाने माने ईएनटी सर्जन डॉ. ललित गुप्ता को कोरोना से छीन लिए था। शहर में एकमात्र ईएनटी सर्जन डॉ. ललित गुप्ता थे। वे बिल्कुल स्वस्थ थे। अचानक सितंबर में उन्हें खांसी व जुकाम हुई और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इसके बाद उन्होंने अपनी कोरोना जांच करवाई, तो वे पॉजिटिव मिले। परिजन उन्हें गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां पर कई दिन तक इलाज चला पर चार अक्तूबर को उनकी मौत हो गई।
डॉ. ललित गुप्ता को निमोनिया हो गया था, जिसकी वजह से उनके फेफड़ों पर कोरोना ने बड़ा हमला किया था। उनके फेफड़े खत्म हो गए थे। लगभग आठ दिन तक डॉ. ललित गुप्ता वेंटिलेटर पर रहे, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। जिले के काफी लोग यह मानते थे कि जो लोग पहले किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उनकी जान ही कोरोना ले रहा है, लेकिन डॉ. ललित गुप्ता के मामले ने यह साबित कर दिया कि बिना किसी गंभीर बीमार वालों की भी जान कोरोना ले सकता है। डॉ. ललित गुप्ता संक्रमित होने से पहले पूरी तरह से स्वस्थ थे और लगातार अपने चिकित्सालय में लोगों का इलाज कर रहे थे। उनकी मौत के बाद शहर के लोगों को यह मानना पड़ा कि कोरोना जानलेवा है।
कोरोना ने घेरा, जीते और फिर सेवा में जुटे
रोडवेज जींद डिपो के टीएम योगेंद्र आसरी दिसंबर 2020 में कोरोना पॉजिटिव मिले थे। इसके बाद वह 17 दिन तक होम क्वारंटीन रहे। ठीक होने के बाद से वह लगातार ड्यूटी कर रहे हैं। हर रोज वह 12 से 13 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं, ताकि लॉकडाउन के कारण बिगड़ी डिपो की परिवहन सेवा को यात्रियों के लिए ज्यादा से ज्यादा लाभदायक बनाया जा सके। लॉकडाउन के दौरान भी वह निरंतर कार्य करते रहे और अपनी व अपने परिवार की परवाह नहीं करते हुए जनता की सेवा को प्राथमिकता दी। मई 2020 में जींद डिपो से पहली बस चंडीगढ़ के लिए चली थी, जिसे रोडवेज जीएम बिजेंद्र सिंह व टीएम योगेंद्र आसरी ने ही हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
प्रवासियों का पूरा डाटा तैयार करने और मेडिकल करवाने में लगी ड्यटी
रोडवेज जींद डिपो के स्टेनो डीडी शर्मा सितंबर 2020 में कोरोना पॉजिटिव मिले थे। इस दौरान वह 15 दिन तक होम क्वारंटीन रहे। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरकार द्वारा मार्च 2020 के अंत में लॉकडाउन घोषित किया गया था। जिले में बाहर विदेशों से आए लोगों की जांच में स्टेनो डीडी शर्मा की ड्यूटी लगी थी। इस दौरान उन्होंने बाहर से आए लोगों की मेडिकल जांच व सारी रिपोर्ट तैयार करने की अपनी ड्यूटी को बखूबी निभाया। यहां तक कि प्रवासियों को उनके घर तक भेजने व कोटा से जिले में वापस आए विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम करवाने में उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की सहायता की।
नहीं हारी हिम्मत
राजकीय महिला कॉलेज में कार्यरत शिक्षक डॉ. सुमिता आसरी 20 अगस्त 2020 को कोरोना संक्रमित पाई गई थीं। वह 21 दिन बाद ठीक हुईं। इस दौरान उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और ठीक होकर अपने काम पर लौटीं। तब से वह लगातार विद्यार्थियों की पढ़ाई को सुचारु रूप से करवा रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई करवाई। विद्यार्थियों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए उन्हें हल करवाया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के लिए उसके सभी विद्यार्थी उसके अपने बच्चे जैसे होते हैं। ऐसे में जितना संभव हो सका लॉकडाउन के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई से संबधित हर मदद की। कोरोना संक्रमण के दौरान भी विद्यार्थियों के संदेश फोन पर आते रहे कि वह जल्दी ठीक हो जाएंगी। ऐसे में विद्यार्थियों के संदेश से भी उन्हें काफी हौसला मिला।
मुश्किल घड़ी में हिम्मत से काम करने की मिली सीख
राजकीय महिला कॉलेज में कार्यरत शिक्षक सोनू कंसल एक सितंबर 2020 को कोरोना पॉजिटिव हुई थीं। उसके 21 दिन बाद वह ठीक होकर काम पर लौट आईं। तब से वह लगातार विद्यार्थियों को पढ़ा रही हैं। सोनू कंसल ने कहा कि कोरोना काल हर किसी के लिए काफी मुश्किलभरा समय था। मार्च में लॉकडाउन लगा था। लोगों के लिए यही दुआएं निकल रही थी कि सभी ठीक रहें और जल्दी से जल्दी यह मुश्किल घड़ी निकल जाए। उन्होंने कहा कि जम मैं पॉजिटिव आई तो मेरे परिवार ने पूरी मदद की। जैसे ही ठीक हुई तो काफी अच्छा लगा कि दोबारा से अपने काम पर जाकर विद्यार्थियों को पढ़ा सकूंगी। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान बड़ी से बड़ी मुश्किल में हिम्मत से काम लेने की सीख मिली।
लॉकडाउन में पुलिस की शराब के अवैध कारोबारियों पर रही पैनी नजर
लॉकडाउन के दौरान पुलिस प्रशासन की शराब का अवैध कारोबार करने वालों पर पैनी नजर रही। इस दौरान सबकुछ बंद होने के बाद पुलिस ने अवैध तरीके से शराब बेचने वालों को गिरफ्तार किया। जिल में अवैध तरीके से शराब सप्लाई करने पर 203 मुकदमे दर्ज किए।
इसमें पुलिस ने जिलेभर में गांव हो या शहर का वार्ड हर जगह शराब के अवैध कारोबारियों पर नजर रखकर जहां 203 मुकदमे दर्ज किए, वहीं शराब तस्करी में 220 लोगों को हिरासत में लिया। लॉकडाउन के दौरान जिस समय घरों से बाहर निकलने पर पूरी तरह से पाबंदी थी उस समय पुलिस ने 11589 बोतल शराब पकड़ी। इसमें पुलिस ने 9082 देसी शराब की बोतल, 1970 अंग्रेजी शराब की बोतल, 907 बीयर की बोतल को पकड़ा। इसके अलावा 920 कच्ची शराब की बोतल तथा 11585 लीटर लाहन बरामद की।
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जिले में कोरोना संक्रमण का पहला मामला 6 अप्रैल 2020 को आया था। इसके चार दिन बाद एक मामला और आया था। अप्रैल में दो ही मामले सामने आए थे और दोनों युवक ठीक हो गए थे। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन मई में कोरोना संक्रमण के 29 मामले सामने आने के साथ दो लोगों की मौत भी हो गई थी। पहली मौत के बाद लोगों में कोरोना को लेकर चिंता साफ देखी जा रही थी। कोरोना के डर की वजह से शहर की सड़कें सुनसान नजर आती थीं। दिनभर सड़कों पर ईक्का-दुक्का लोग ही दिखाई देते थे और वह भी पैदल चलते हुए। वातावरण पूरी तरह से साफ हो गया था। इसके बाद जून में 79 मामले सामने आए। जुलाई में कोरोना ने फिर रफ्तार पकड़ी और 192 लोग पॉजिटिव हो गए। सबसे ज्यादा असर सितंबर महीने में देखा गया। सितंबर में 1371 लोग पॉजिटिव हुए। रोजना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ता गया। सितंबर में दस दिन ऐसे आए, जब संक्रमितों की संख्या 70 के पार आई। सितंबर में ऐसा कोई दिन नहीं था जिस दिन संक्रमितों का आंकड़ा 20 से नीचे गया हो। सितंबर में 20 लोगों की मौत भी हुई। अक्तूबर महीने में फिर कोरोना की रफ्तार कुछ कम हुई, लेकिन नवंबर महीने में फिर से कोरोना बढ़ा और 24 लोगों की जिंदगी छीन लिया।
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दिसंबर महीने से कोरोना संक्रमण की रफ्तार काफी कम हो गई। दिसंबर में 845 मामले सामने आए और 11 लोगों की मौत हुई। जनवरी महीने में संक्रमितों के मिलने के मामले में काफी कमी और 165 लोग संक्रमित पाए गए। फरवरी महीने में तो मानो कोरोना खत्म ही हो गया था। फरवरी में 24 मामले सामने आए और तीन संक्रमित ही बचे थे, लेकिन मार्च महीने की शुरुआत से कोरोना ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। अब तक अप्रैल तथा फरवरी महीना ही ऐसा बीता है, जिसमें कोई मौत नहीं हुई हो। मार्च महीने में भी दो लोगों की जान जा चुकी है।
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जिले की कोरोना को लेकर वर्तमान स्थिति
स्वास्थ्य विभाग कोरोना की जांच के लिए अब तक 189558 लोगों के सैंपल लिए हैं। इनमें से 5614 लोग पॉजिटिव आ चुके हैं, जबकि 5272 लोग ठीक हो चुके हैं। कोरोना की वजह से अब तक 86 लोगों की मौत हो चुकी है। जिले में इस समय 256 एक्टिव मामले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 196470 लोगों की स्क्रीनिंग की है, जो या तो विदेश से आए हैं या फिर किसी दूसरे प्रदेश से। जिले के 184913 लोग ऐसे हैं, जिन्होंने क्वारंटीन समय को पूरा कर लिया है। इसके अलावा 6121 लोग क्वारंटीन हैं। ये लोग ऐसे हैं जो या तो संक्रमित हैं या फिर संक्रमितों के संपर्क में आए हुए हैं। नागरिक अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में 26 लोग दाखिल हैं।
पिछले एक साल का कोरोना का सफर
महीना पॉजिटिव मौत निगेटिव
अप्रैल 02 0 2
मई 29 2 27
जून 79 2 75
जुलाई 192 1 189
अगस्त 432 3 430
सितंबर 1371 20 1163
अक्तूबर 890 19 783
नवंबर 1210 24 1148
दिसंबर 845 11 1114
जनवरी 165 2 175
फरवरी 24 0 37
मार्च 375 2 129
कुल 5614 86 5272
मार्च में कोरोना का संक्रमण काफी रफ्तार से फैल रहा है। लोगों को संभलना होगा नहीं तो यह जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। घर से निकलते ही व्यक्ति को मास्क लगाना चाहिए तथा दो गज दूरी के नियम का पालन करना चाहिए। जिले में अब तक 5614 लोग पॉजिटिव आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार वैक्सीनेशन का कार्य कर रहा है तथा लोगों के कोरोना जांच सैंपल ले रहा है।
डॉ. मनजीत सिंह सिविल सर्जन, जींद।
एकमात्र ईएनटी सर्जन डॉ. ललित गुप्त को कोरोना ने छीना
शहर के जाने माने ईएनटी सर्जन डॉ. ललित गुप्ता को कोरोना से छीन लिए था। शहर में एकमात्र ईएनटी सर्जन डॉ. ललित गुप्ता थे। वे बिल्कुल स्वस्थ थे। अचानक सितंबर में उन्हें खांसी व जुकाम हुई और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इसके बाद उन्होंने अपनी कोरोना जांच करवाई, तो वे पॉजिटिव मिले। परिजन उन्हें गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां पर कई दिन तक इलाज चला पर चार अक्तूबर को उनकी मौत हो गई।
डॉ. ललित गुप्ता को निमोनिया हो गया था, जिसकी वजह से उनके फेफड़ों पर कोरोना ने बड़ा हमला किया था। उनके फेफड़े खत्म हो गए थे। लगभग आठ दिन तक डॉ. ललित गुप्ता वेंटिलेटर पर रहे, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। जिले के काफी लोग यह मानते थे कि जो लोग पहले किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उनकी जान ही कोरोना ले रहा है, लेकिन डॉ. ललित गुप्ता के मामले ने यह साबित कर दिया कि बिना किसी गंभीर बीमार वालों की भी जान कोरोना ले सकता है। डॉ. ललित गुप्ता संक्रमित होने से पहले पूरी तरह से स्वस्थ थे और लगातार अपने चिकित्सालय में लोगों का इलाज कर रहे थे। उनकी मौत के बाद शहर के लोगों को यह मानना पड़ा कि कोरोना जानलेवा है।
कोरोना ने घेरा, जीते और फिर सेवा में जुटे
रोडवेज जींद डिपो के टीएम योगेंद्र आसरी दिसंबर 2020 में कोरोना पॉजिटिव मिले थे। इसके बाद वह 17 दिन तक होम क्वारंटीन रहे। ठीक होने के बाद से वह लगातार ड्यूटी कर रहे हैं। हर रोज वह 12 से 13 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं, ताकि लॉकडाउन के कारण बिगड़ी डिपो की परिवहन सेवा को यात्रियों के लिए ज्यादा से ज्यादा लाभदायक बनाया जा सके। लॉकडाउन के दौरान भी वह निरंतर कार्य करते रहे और अपनी व अपने परिवार की परवाह नहीं करते हुए जनता की सेवा को प्राथमिकता दी। मई 2020 में जींद डिपो से पहली बस चंडीगढ़ के लिए चली थी, जिसे रोडवेज जीएम बिजेंद्र सिंह व टीएम योगेंद्र आसरी ने ही हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
प्रवासियों का पूरा डाटा तैयार करने और मेडिकल करवाने में लगी ड्यटी
रोडवेज जींद डिपो के स्टेनो डीडी शर्मा सितंबर 2020 में कोरोना पॉजिटिव मिले थे। इस दौरान वह 15 दिन तक होम क्वारंटीन रहे। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरकार द्वारा मार्च 2020 के अंत में लॉकडाउन घोषित किया गया था। जिले में बाहर विदेशों से आए लोगों की जांच में स्टेनो डीडी शर्मा की ड्यूटी लगी थी। इस दौरान उन्होंने बाहर से आए लोगों की मेडिकल जांच व सारी रिपोर्ट तैयार करने की अपनी ड्यूटी को बखूबी निभाया। यहां तक कि प्रवासियों को उनके घर तक भेजने व कोटा से जिले में वापस आए विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम करवाने में उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों की सहायता की।
नहीं हारी हिम्मत
राजकीय महिला कॉलेज में कार्यरत शिक्षक डॉ. सुमिता आसरी 20 अगस्त 2020 को कोरोना संक्रमित पाई गई थीं। वह 21 दिन बाद ठीक हुईं। इस दौरान उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और ठीक होकर अपने काम पर लौटीं। तब से वह लगातार विद्यार्थियों की पढ़ाई को सुचारु रूप से करवा रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई करवाई। विद्यार्थियों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए उन्हें हल करवाया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के लिए उसके सभी विद्यार्थी उसके अपने बच्चे जैसे होते हैं। ऐसे में जितना संभव हो सका लॉकडाउन के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई से संबधित हर मदद की। कोरोना संक्रमण के दौरान भी विद्यार्थियों के संदेश फोन पर आते रहे कि वह जल्दी ठीक हो जाएंगी। ऐसे में विद्यार्थियों के संदेश से भी उन्हें काफी हौसला मिला।
मुश्किल घड़ी में हिम्मत से काम करने की मिली सीख
राजकीय महिला कॉलेज में कार्यरत शिक्षक सोनू कंसल एक सितंबर 2020 को कोरोना पॉजिटिव हुई थीं। उसके 21 दिन बाद वह ठीक होकर काम पर लौट आईं। तब से वह लगातार विद्यार्थियों को पढ़ा रही हैं। सोनू कंसल ने कहा कि कोरोना काल हर किसी के लिए काफी मुश्किलभरा समय था। मार्च में लॉकडाउन लगा था। लोगों के लिए यही दुआएं निकल रही थी कि सभी ठीक रहें और जल्दी से जल्दी यह मुश्किल घड़ी निकल जाए। उन्होंने कहा कि जम मैं पॉजिटिव आई तो मेरे परिवार ने पूरी मदद की। जैसे ही ठीक हुई तो काफी अच्छा लगा कि दोबारा से अपने काम पर जाकर विद्यार्थियों को पढ़ा सकूंगी। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान बड़ी से बड़ी मुश्किल में हिम्मत से काम लेने की सीख मिली।
लॉकडाउन में पुलिस की शराब के अवैध कारोबारियों पर रही पैनी नजर
लॉकडाउन के दौरान पुलिस प्रशासन की शराब का अवैध कारोबार करने वालों पर पैनी नजर रही। इस दौरान सबकुछ बंद होने के बाद पुलिस ने अवैध तरीके से शराब बेचने वालों को गिरफ्तार किया। जिल में अवैध तरीके से शराब सप्लाई करने पर 203 मुकदमे दर्ज किए।
इसमें पुलिस ने जिलेभर में गांव हो या शहर का वार्ड हर जगह शराब के अवैध कारोबारियों पर नजर रखकर जहां 203 मुकदमे दर्ज किए, वहीं शराब तस्करी में 220 लोगों को हिरासत में लिया। लॉकडाउन के दौरान जिस समय घरों से बाहर निकलने पर पूरी तरह से पाबंदी थी उस समय पुलिस ने 11589 बोतल शराब पकड़ी। इसमें पुलिस ने 9082 देसी शराब की बोतल, 1970 अंग्रेजी शराब की बोतल, 907 बीयर की बोतल को पकड़ा। इसके अलावा 920 कच्ची शराब की बोतल तथा 11585 लीटर लाहन बरामद की।