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Jind News: पहेलियों, चित्रों और गतिविधियों से बच्चों को मिलेगा सीखने का अवसर

Mon, 15 Jun 2026 12:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Mon, 15 Jun 2026 12:08 AM IST
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Children will get the opportunity to learn through puzzles, pictures, and activities.
14जेएनडी14-बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृति दिखाते हुए उनकी माताएं। स्रोत कर्मचारी
जींद। ग्रीष्मकालीन अवकाश में विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को बनाए रखने के उद्देश्य से नवाचार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कक्षा दूसरी और तीसरी के विद्यार्थियों के लिए निपुण हरियाणा पेरेंट्स एप पर लर्न विद फन मॉड्यूल उपलब्ध करवाया गया है जो समर पैकेट का एक महत्वपूर्ण भाग है।
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जिला समन्वयक एफएलएन राजेश वशिष्ठ ने बताया कि इसके माध्यम से बच्चे खेल-खेल में सीखने की गतिविधियों से जुड़कर अपनी भाषा, गणित तथा तार्किक क्षमता का विकास कर रहे हैं। बच्चों को रटने की बजाय अनुभवात्मक और गतिविधि आधारित शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विभाग ने निपुण हरियाणा पेरेंट्स एप विकसित किया है।
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उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा राज्य स्तर तथा जिला स्तर से पत्र जारी कर सभी विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों को एप डाउनलोड करवाने के लिए प्रेरित करें। इस एप से अभिभावक बच्चों की सीखने संबंधी गतिविधियों, गृहकार्य, उपलब्धियों तथा प्रगति रिपोर्ट की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इससे विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है।
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वर्तमान समय में तकनीक शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। यदि तकनीक का सही उपयोग किया जाए तो बच्चों के सीखने की प्रक्रिया रोचक बनाई जा सकती है। लर्न विद फन मॉड्यूल इसी दिशा में सराहनीय प्रयास है जिसमें बच्चों को विभिन्न खेलों, पहेलियों, चित्रों और रोचक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलता है।
बच्चे इसे मनोरंजन के रूप में लेते हैं, जबकि वास्तव में वे अनेक शैक्षणिक कौशल विकसित कर रहे होते हैं। उन्होंने बताया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों को केवल पुस्तक आधारित कार्यों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि समर पैकेट में ऐसी गतिविधियां शामिल की गई हैं जो बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक हैं। इनमें कहानी सुनना और सुनाना, परिवार के वरिष्ठ सदस्यों से संवाद करना, स्थानीय परिवेश को समझना, चित्रकारी, रचनात्मक लेखन, गणितीय

खेल, पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियां तथा दैनिक जीवन से जुड़ी सीखने की प्रक्रियाएं शामिल हैं। कहा कि जिले में कक्षा दूसरी में 5710 बच्चे और कक्षा तीसरी में 5094 बच्चे पढ़ रहे हैं। इन बच्चों के अभिभावकों को पेरेंट्स एप से जोड़ा जाएगा।
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