{"_id":"58c19dfa4f1c1b5e3ddc6659","slug":"children-danger-severe-negligence-school-buses-jind","type":"story","status":"publish","title_hn":"खतरे में नौनिहाल, स्कूल बसों में मिली घोर लापरवाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खतरे में नौनिहाल, स्कूल बसों में मिली घोर लापरवाही
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Thu, 09 Mar 2017 11:54 PM IST
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बसों के कागजात की जांच करते टीम के सदस्य।
- फोटो : jind
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बच्चों को नियमों का पाठ पढ़ाने वाले और यातायात के लिए मोटी फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों की बसों में सुरक्षा के नियम ताक पर रखे जा रहे हैं। इसकी पोल वीरवार को राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग टीम की जांच के दौरान खुली। शहर के नामचीन स्कूलों में भी नियम ताक पर रखकर बच्चों की जिंदगी खतरे में डाली जा रही है। जांच के दौरान जहां कई बसों के चालान किए गए, वहीं आयोग की सदस्या रमनदीप कौर ने सभी स्कूल संचालकों को 15 मार्च तक सुरक्षा के सभी मानक पूरे करने के आदेश दिए। ऐसा नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आयोग की सदस्य रमनदीप कौर ने वीरवार सुबह अर्बन एस्टेट स्थित डीएवी स्कूल से बसों की जांच शुरू की। उनके साथ आरटीए, पुलिस विभाग तथा शिक्षा विभाग कार्यालय से कई अधिकारी साथ रहे। यहां कोई गंभीर खामी स्कूल बसों में नहीं मिली। हालांकि फर्स्ट एड बॉक्स में कुछ दवाइयां एक्सपायरी डेट की मिली। यहां कुछ चालक मौके पर नहीं मिले, जिन्हें बाद में बुलाया गया। वहीं, एक बस का गेट का शीशा टूटा मिला। इसके बाद टीम अर्बन इस्टेट स्थित मोतीलाल स्कूल में गई। यहां फर्स्ट एड बॉक्स की खामियों के साथ-साथ फायर सुरक्षा यंत्र भी बस में नहीं मिले। इस पर टीम ने नाराजगी जताई। एक बस में जीपीएस सिस्टम भी नहीं चल रहा था। इसके बाद टीम ने आधारशिला और डालमवाला स्कूल में भी जांच की।
राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग की सदस्य रमन दीप कौर ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में सुरक्षित स्कूल वाहन नीति लागू की गई है। इस नीति के तहत स्कूली बसों के लिए 22 नियमों की पालना करने के आदेश दिए गए हैं।
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आठ बसों के कटे चालान
टीम ने जांच के दौरान विभिन्न स्कूलों की बसों में अनियमितताएं पाई गईं। इस पर आठ स्कूली बसों के चालान काटे गए। जिन बसों में छोटी-छोटी कमियां पाई गईं, उन बसों के मुखियाओं को आगामी 15 मार्च तक सभी खामियों को दूर कर रिपोर्ट भिजवाने के निर्देश दिए हैं।
कंडम बस में यात्रा कर रहे बच्चे
जांच के दौरान डालवाला गांव के पास टीम ने महावीर क्वालिटी हाई स्कूल की बस की जांच की। यह बस कंडम हालत में मिली। रमनदीप कौर के अनुसार इस बस के चालक के पास वैद्य लाइसेंस भी नहीं मिला। पुलिस विभाग के अधिकारियों ने ड्राइवर को निर्देश दिए कि वे बच्चों को निर्धारित स्थलों पर छोड़कर तुरंत बस को थाने में पहुंचाएं। वहीं, दिल्ली पब्लिक स्कूल की एक बस मोती लाल नेहरू पब्लिक स्कूल के पास खड़ी थी इस बस के शीशों पर ब्लैक फिल्म चढ़ी हुई पाई गई। पुलिस विभाग के अधिकारियों ने तुरंत बस का चालान काट दिया।
आपातकालीन दरवाजे पर जड़ा ताला
जांच के दौरान अधिकारियों ने एक स्कूल बस के आपातकालीन दरवाजे पर ताला लगा मिला। इस पर चेन लगाकर ताला लगाया गया था। पर टीम ने कड़ा एतराज जताया।
ग्रामीण क्षेत्र की बसों की नहीं हुई जांच
हालांकि, शहरी क्षेत्र की बसों में भारी अनियमितताएं मिली हैं, लेकिन आयोग की टीम ने ग्रामीण क्षेत्र की ओर रुख नहीं किया। ग्रामीण क्षेत्र में कई बसों पर बिना निर्धारित लाइसेंस के ही चालक हैं, ऐसे में नौनिहालों की जान खतरे में डाली जा रही है।
पूरी करने होंगे 22 नियम
आयोग की सदस्य ने बताया कि सुरक्षित वाहन पॉलिसी के अंतर्गत निजी स्कूलों की बसों को 22 नियमों को पूरा करना जरूरी है ताकि बच्चों को सुरक्षित तरीके से स्कूल में लाया व वापस छोड़ा जा सके। इसके तहत स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर होना चाहिए, जीपीएस सिस्टम, बस का कलर पीले रंग का होना, वाहन परमिट का होना, फर्स्ट एड बॉक्स का होना, फायर सेफ्टी यंत्र होना, चालक परिचालक का ड्रेस में होना, वाहन पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अंकित होना, वाहन में कैमरा होना, वाहन पर स्कूल का नाम, बस के मालिक का नाम, फोन नंबर अंकित होना, ड्राइवर को पांच साल के वाहन चलाने का अनुभव होना, ड्राइवर का मेडिकल फिट होना शामिल है।
ग्रामीण बसों की भी होगी जांच
यह अभियान शुक्रवार को भी जारी रहेगा। इसके तहत जिला भर के अलग-अलग क्षेत्रों में बसों की जांच की जाएगी। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल भी शामिल किए जाएंगे। जो स्कूल बसों के मानक पूरे नहीं कर रहे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
रमनदीप कौर, सदस्य राज्य बाल संरक्षण एवं अधिकार आयोग।
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आयोग की सदस्य रमनदीप कौर ने वीरवार सुबह अर्बन एस्टेट स्थित डीएवी स्कूल से बसों की जांच शुरू की। उनके साथ आरटीए, पुलिस विभाग तथा शिक्षा विभाग कार्यालय से कई अधिकारी साथ रहे। यहां कोई गंभीर खामी स्कूल बसों में नहीं मिली। हालांकि फर्स्ट एड बॉक्स में कुछ दवाइयां एक्सपायरी डेट की मिली। यहां कुछ चालक मौके पर नहीं मिले, जिन्हें बाद में बुलाया गया। वहीं, एक बस का गेट का शीशा टूटा मिला। इसके बाद टीम अर्बन इस्टेट स्थित मोतीलाल स्कूल में गई। यहां फर्स्ट एड बॉक्स की खामियों के साथ-साथ फायर सुरक्षा यंत्र भी बस में नहीं मिले। इस पर टीम ने नाराजगी जताई। एक बस में जीपीएस सिस्टम भी नहीं चल रहा था। इसके बाद टीम ने आधारशिला और डालमवाला स्कूल में भी जांच की।
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राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग की सदस्य रमन दीप कौर ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में सुरक्षित स्कूल वाहन नीति लागू की गई है। इस नीति के तहत स्कूली बसों के लिए 22 नियमों की पालना करने के आदेश दिए गए हैं।
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आठ बसों के कटे चालान
टीम ने जांच के दौरान विभिन्न स्कूलों की बसों में अनियमितताएं पाई गईं। इस पर आठ स्कूली बसों के चालान काटे गए। जिन बसों में छोटी-छोटी कमियां पाई गईं, उन बसों के मुखियाओं को आगामी 15 मार्च तक सभी खामियों को दूर कर रिपोर्ट भिजवाने के निर्देश दिए हैं।
कंडम बस में यात्रा कर रहे बच्चे
जांच के दौरान डालवाला गांव के पास टीम ने महावीर क्वालिटी हाई स्कूल की बस की जांच की। यह बस कंडम हालत में मिली। रमनदीप कौर के अनुसार इस बस के चालक के पास वैद्य लाइसेंस भी नहीं मिला। पुलिस विभाग के अधिकारियों ने ड्राइवर को निर्देश दिए कि वे बच्चों को निर्धारित स्थलों पर छोड़कर तुरंत बस को थाने में पहुंचाएं। वहीं, दिल्ली पब्लिक स्कूल की एक बस मोती लाल नेहरू पब्लिक स्कूल के पास खड़ी थी इस बस के शीशों पर ब्लैक फिल्म चढ़ी हुई पाई गई। पुलिस विभाग के अधिकारियों ने तुरंत बस का चालान काट दिया।
आपातकालीन दरवाजे पर जड़ा ताला
जांच के दौरान अधिकारियों ने एक स्कूल बस के आपातकालीन दरवाजे पर ताला लगा मिला। इस पर चेन लगाकर ताला लगाया गया था। पर टीम ने कड़ा एतराज जताया।
ग्रामीण क्षेत्र की बसों की नहीं हुई जांच
हालांकि, शहरी क्षेत्र की बसों में भारी अनियमितताएं मिली हैं, लेकिन आयोग की टीम ने ग्रामीण क्षेत्र की ओर रुख नहीं किया। ग्रामीण क्षेत्र में कई बसों पर बिना निर्धारित लाइसेंस के ही चालक हैं, ऐसे में नौनिहालों की जान खतरे में डाली जा रही है।
पूरी करने होंगे 22 नियम
आयोग की सदस्य ने बताया कि सुरक्षित वाहन पॉलिसी के अंतर्गत निजी स्कूलों की बसों को 22 नियमों को पूरा करना जरूरी है ताकि बच्चों को सुरक्षित तरीके से स्कूल में लाया व वापस छोड़ा जा सके। इसके तहत स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर होना चाहिए, जीपीएस सिस्टम, बस का कलर पीले रंग का होना, वाहन परमिट का होना, फर्स्ट एड बॉक्स का होना, फायर सेफ्टी यंत्र होना, चालक परिचालक का ड्रेस में होना, वाहन पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अंकित होना, वाहन में कैमरा होना, वाहन पर स्कूल का नाम, बस के मालिक का नाम, फोन नंबर अंकित होना, ड्राइवर को पांच साल के वाहन चलाने का अनुभव होना, ड्राइवर का मेडिकल फिट होना शामिल है।
ग्रामीण बसों की भी होगी जांच
यह अभियान शुक्रवार को भी जारी रहेगा। इसके तहत जिला भर के अलग-अलग क्षेत्रों में बसों की जांच की जाएगी। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल भी शामिल किए जाएंगे। जो स्कूल बसों के मानक पूरे नहीं कर रहे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
रमनदीप कौर, सदस्य राज्य बाल संरक्षण एवं अधिकार आयोग।