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दिनभर शिवालयों में गूंजते रहे बम-बम भोले के जयकारे

Tue, 19 Jul 2022 12:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jul 2022 12:12 AM IST
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Cheers of Bam-bomb naive kept reverberating in pagodas throughout the day
सावन का पहला सोमवार, मंदिरों में शिवभक्तों की कतार... सावन के पहले सोमवार को अलसुबह ही मंदिरों में ? - फोटो : Jind
संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। सावन माह के पहले सोमवार को मंदिरों में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। सुबह से ही श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचे और भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में जुट गए। श्रद्धालु दूध-पानी व अन्य सामग्री शिवलिंग पर अर्पित की। कहा जाता है कि सावन के पहले सोमवार को अपना ही विशेष महत्व होता है।
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि शिव पुराण में वर्णित सावन मास भगवान शिव का मास है। पूरे सावन मास में जो भक्त भगवान आशुतोष की नियमित रूप से सच्चे हृदय व मन से पूजा करते हैं, उसके सारे कष्ट व पाप दूर हो जाते हैं। जो श्रद्धालु पूरे सावन मास में सच्चे मन से जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करता है, उस पर भगवान आशुतोष की विशेष कृपा होती है। इस मास में पंचामृत के द्वारा भगवान शिव की नियमित पूजा करनी चाहिए। दूध, दही, शहद, शक्कर, घी से महादेव की पूजा करनी चाहिए। शिव पर दूध का अभिषेक करने से शकल मनोरथ सिद्ध होते हैं। भगवान शिव की सावन मास में पूजा करने को श्रेष्ठफल मिलता है। जो मृत्यु तुल्य जीवन जी रहा है, यदि वह इस माह में महामृत्युंजय का जाप करे तो अन्य माह के मुकाबले दस गुना फल मिलता है। हर-हर महादेव के जयकारों के साथ सावन माह के पहले सोमवार को महाभारत कालीन जयंती देवी मंदिर में शिवलिंग का भव्य तरीके से रूद्राभिषेक शुरू हुआ। भगवान शिवजी को दूध-दही, शहठ्ठ, गंगाजल, घी से नहला कर और फल तथा फूल चढ़ा कर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मनोकामना मांगी।
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कैसे करें भोलेनाथ की पूजा
नवीन शास्त्री ने बताया कि सावन माह के इन पवित्र दिनों में प्रत्येक दिन सुबह रूद्राभिषेक करना चाहिए। जयंती देवी मंदिर में प्रतिदिन यह कार्यक्रम होता है। इस माह हर सोमवार को या फिर किसी भी दिन नहा धोकर दूध, दही, शहद, गंगाजल, घी से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करें। इसके बाद जनेऊ, वस्त्र, भांग, धतूरा, बेलपत्र, सुपाड़ी, पान के पत्ते, फूलमाला, फल आदि भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं। फिर ओम नम: शिवाय का जाप 108 या फिर 1008 बार करना चाहिए।
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हर सोमवार को शुभ संयोग
पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि सावन माह के हर सोमवार पर शुभ संयोग है। पहले सोमवार को नाग पंचमी का त्योहार है। सावन माह का दूसरा सोमवार 25 जुलाई को होगा, तब स्वार्थ सिद्धी योग में श्रद्धालु पूजा करेंगे। इसके बाद तीसरा सोमवार एक अगस्त होगा और उसमें श्रद्धालु वरद चतुर्थी के शुभ संयोग में पूजा करेंगे। आठ जुलाई को नंदा तिथि है, जिसमें प्रत्येक कार्य के लिए शुभ योग होता है। इसके बाद 12 अगस्त को सावन माह समाप्त होगा।
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