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Jind News: केंद्रीय आर्य युवक परिषद ने 131 शिक्षकों को किया सम्मानित
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फोटो 05जेएनडी06-प्रांतीय शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यातिथि कुलपति प्रोफेसर डॉ. रामपाल सैनी क
जींद। अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर केंद्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में सोमवार को एक निजी स्कूल में प्रांतीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में सरकारी और निजी विद्यालयों में उत्कृष्ट सेवाओं, शैक्षणिक नवाचार और समर्पण के लिए 131 राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
स्वामी दिव्यानंद के सानिध्य में वेदों की ऋचाओं और महायज्ञ की आहुति के बीच हुए समारोह में सीआरएसयू कुलपति डॉ. रामपाल सैनी मुख्य अतिथि रहे।
कुलपति ने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षा परिणाम बेहतर करने तक सीमित नहीं है। एक शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर चरित्र, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है।
उन्होंने कहा कि सच्चा शिक्षक विद्यार्थियों को केवल कक्षा की चुनौतियों के लिए नहीं, बल्कि जीवन की विषम परिस्थितियों का सामना करने और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करता है। राष्ट्रीय महामंत्री महेंद्र भाई ने कहा कि शिक्षा अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने का माध्यम है। शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानते हैं और उसे सही दिशा देकर उनके भविष्य को आकार देते हैं।
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पिता की स्मृति में किया शिक्षकों का सम्मान
राष्ट्रीय अवॉर्डी शिक्षक मनोज कुमार लाकड़ा ने अपने पिता स्व. सूबेदार सूरत सिंह की स्मृति में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों और मुख्य अतिथियों को स्मृति पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञान के साथ चरित्र, कौशल, संस्कार और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना विकसित करना भी है। समारोह में डॉ. रमेश धारीवाल, अनिल कौशिक, अंजू दहिया, बसरूद्दीन खान, ममता पालीवाल, डॉ. ईश्वर चंद्र शर्मा, नरेंद्र गर्ग, राजेश कुमार और सत्यपाल समेत सभी शिक्षकों का विशेष अभिनंदन किया गया।
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स्वामी दिव्यानंद के सानिध्य में वेदों की ऋचाओं और महायज्ञ की आहुति के बीच हुए समारोह में सीआरएसयू कुलपति डॉ. रामपाल सैनी मुख्य अतिथि रहे।
कुलपति ने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षा परिणाम बेहतर करने तक सीमित नहीं है। एक शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर चरित्र, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है।
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उन्होंने कहा कि सच्चा शिक्षक विद्यार्थियों को केवल कक्षा की चुनौतियों के लिए नहीं, बल्कि जीवन की विषम परिस्थितियों का सामना करने और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करता है। राष्ट्रीय महामंत्री महेंद्र भाई ने कहा कि शिक्षा अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने का माध्यम है। शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानते हैं और उसे सही दिशा देकर उनके भविष्य को आकार देते हैं।
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पिता की स्मृति में किया शिक्षकों का सम्मान
राष्ट्रीय अवॉर्डी शिक्षक मनोज कुमार लाकड़ा ने अपने पिता स्व. सूबेदार सूरत सिंह की स्मृति में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों और मुख्य अतिथियों को स्मृति पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञान के साथ चरित्र, कौशल, संस्कार और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना विकसित करना भी है। समारोह में डॉ. रमेश धारीवाल, अनिल कौशिक, अंजू दहिया, बसरूद्दीन खान, ममता पालीवाल, डॉ. ईश्वर चंद्र शर्मा, नरेंद्र गर्ग, राजेश कुमार और सत्यपाल समेत सभी शिक्षकों का विशेष अभिनंदन किया गया।