फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   Candy factory worker father, son found the 87th rank in the IES, jind news

पिता टॉफी फैक्टरी में मजदूर, बेटे ने पाई आईईएस में 87वीं रैंक

Sat, 03 Dec 2016 12:25 AM IST
नितिन आंतिल/ अमर उजाला, जींद
नितिन आंतिल/ अमर उजाला, जींद Updated Sat, 03 Dec 2016 12:25 AM IST
विज्ञापन
Candy factory worker father, son found the 87th rank in the IES, jind news
अमित सैनी - फोटो : jind
जब आदमी के हौसले बुलंद हों तो गरीबी या कोई अन्य बाधा उसे रोक नहीं सकती। हर विषम परिस्थिति को पार कर वह सफलता प्राप्त करता है। यह कर दिखाया है भिवानी रोड स्थित अजमेर बस्ती निवासी अमित सैनी ने। अमित ने इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस में 87वीं रैंक हासिल की है। अमित के पिता शहर की एक टॉफी बनाने की फैक्टरी में मजदूर हैं। अमित की इस सफलता से पूरे परिवार में खुशी की लहर है।
विज्ञापन


अमित की प्रारंभिक पढ़ाई जींद के ही नवदुर्गा स्कूल में हुई। अमित के अनुसार, शुरू से ही उसका इंजीनियर बनने का सपना था। इसके लिए स्कूल के संचालक और परिवार के लोगों पूरा सहयोग उसे मिला। फरीदाबाद के एक संस्थान से बीटेक मेकैनिकल करने के बाद अमित ने लगातार सफलता के पायदान पार किए। नेट परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल की। इसके बाद रेलवे में कनिष्ठ अभियंता के तौर पर उनका चुनाव हुआ। लेकिन, अमित यहीं नहीं रुके। अमित ने लगातार प्रयास जारी रखे और इंडियन इंजीनियरिंग सेवा की परीक्षा दी। 30 नवंबर को घोषित परिणाम में अमित को देश भर में 87वीं रैंक हासिल हुई है।
विज्ञापन


पिता की मेहनत आई काम
अमित के अनुसार, उसके घर की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। पिता उमेद सिंह टॉफी बनाने वाली एक फैक्टरी में मजदूरी करते हैं। लेकिन उनके पिता ने कभी अपनी मेहनत की परवाह नहीं की और बच्चों की पढ़ाई के लिए हर वक्त तैयार रहे। अमित के अनुसार, उन्होंने आज जो मुकाम हासिल किया है, इसके पीछे उनके पिता की अथक मेहनत छिपी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बच्चों की शिक्षा ही सबसे बड़ी कमाई
अमित के पिता उमेद सिंह कहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई ही उनके लिए सबसे बड़ी कमाई है। उन्होंने अपनी एक बेटी को अच्छी शिक्षा ग्रहण करवाई, जिसके बाद फिलहाल वह एसबीआई में सेवारत है। अमित के एक भाई और एक बहन अभी पढ़ रहे हैं।


दिल्ली में कोचिंग देकर की तैयारी
अमित ने बताया कि उनकी पढ़ाई से परिवार में आर्थिक संकट हो गया था। ऐसे में उसने दिल्ली के एक संस्थान में कोचिंग देने का काम किया और साथ ही आईईएस की तैयारी भी की। इससे परिवार को आर्थिक सहारा मिला, वहीं उसकी परीक्षा में सफलता भी तय हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed