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आफत बने सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु
jind
Updated Wed, 03 Aug 2016 12:45 AM IST
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शहर की सड़कों पर वाहनों के बीच घूमते सांड़।
- फोटो : bureau
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शहर की सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु लोगों के लिए आफत बन गए हैं। इससे एक ओर जहां शहर में जाम की स्थिति बनी रहती है, वहीं हादसों का अंदेशा भी बना रहता है। पिछले तीन साल से जिला प्रशासन लावारिस पशुओं से निपटने की योजना बना रहा है, लेकिन अब तक इसका कोई परिणाम नहीं निकला है। हालत यह है कि जींद के विधायक से लेकर प्रतिष्ठित चिकित्सक और वकील तक लावारिस सांड़ और गायों की चपेट में आ चुके हैं। शहर में करीब पांच हजार लावारिस पशु घुम रहे हैं। इनमें अधिकतर गायें और सांड़ हैं। सफेद गायों को तो जैसे-तैसे गोशाला भेजने का इंतजाम किया जाता है, लेकिन काले सांड़ और गायों को गोशाला भी लेने से मना कर देते हैं। ऐसे में प्रशासन भी इसके आगे पस्त नजर आता है। शहर की सड़कों पर लगातार हो रहे हादसों के बावजूद प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
विधायक भी हो चुके हैं शिकार
शहर में लावारिस सांड़ों की हालत यह है कि विधायक डॉ. हरचिंद मिढ़ा करीब दो साल पहले सांड़ की चपेट में आ चुके हैं। इस हादसे के बाद से उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही है। डॉ. मिढ़ा के अनुसार सरकार और प्रशासन को लावारिस पशुओं पर लगाम लगाने के लिए यथाशीघ्र योजना बनानी चाहिए।
कई लोग गवा चुक हैं जान
सांड़ों के चपेट में आने से कई लोग अपनी जान तक गवा चुके हैं। इसमें सामान्य अस्पताल के डॉ. अश्वनी शर्मा, शहर के प्रतिष्ठित एडवोकेट कमल गोस्वामी की मौत हो चुकी है। वहीं जाट संस्था के महासचिव मास्टर रण सिंह भी सांड़ों की चपेट में आ चुके हैं। बीती 25 जुलाई को दालमवाला गांव का एक युवक भी सांड़ की चपेट में आने से घायल हो चुके हैं।
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रात को सड़कों पर डेरा
बारिश का मौसम आते ही सांड़ अब रात के समय सड़कों पर डेरा जमा रहे हैं। दरअसल मच्छरों से बचने के लिए सांड़ रात के समय सड़कों पर आते हैं, ताकि वाहनों की हवा के कारण मच्छर कम परेशान करें। ऐसे में काले सांड़ रात को दिखाई भी नहीं देते और हादसा होने का खतरा बना रहा है।
डालेंगे जनहित याचिका
शहर में सांड़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। एक ओर जहां शहर के साथ लगते गांवों के किसान इससे परेशान हैं, वहीं व्यापारियों के लिए भी यह आफत बने हुए हैं। आए दिन हादसे हो रहे हैं। इसको लेकर जल्द ही जनहित याचिका डाली जाएगी। सरकार को गोरक्षा कानून से पहले गायों और सांड़ों का इंतजाम करना चाहिए था।
- सुनील वशिष्ठ टीम अन्ना।
कोई समाधान नहीं
शहर में गायों और सांड़ों की समस्या गंभीर है, लेकिन गोशालाएं इनको लेने से साफ मना कर रही हैं। ऐसे में प्रशासन के पास अब इनका कोई समाधान नहीं है।
- अशोक सैनी, सफाई निरीक्षक, नगर परिषद जींद।
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विधायक भी हो चुके हैं शिकार
शहर में लावारिस सांड़ों की हालत यह है कि विधायक डॉ. हरचिंद मिढ़ा करीब दो साल पहले सांड़ की चपेट में आ चुके हैं। इस हादसे के बाद से उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही है। डॉ. मिढ़ा के अनुसार सरकार और प्रशासन को लावारिस पशुओं पर लगाम लगाने के लिए यथाशीघ्र योजना बनानी चाहिए।
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कई लोग गवा चुक हैं जान
सांड़ों के चपेट में आने से कई लोग अपनी जान तक गवा चुके हैं। इसमें सामान्य अस्पताल के डॉ. अश्वनी शर्मा, शहर के प्रतिष्ठित एडवोकेट कमल गोस्वामी की मौत हो चुकी है। वहीं जाट संस्था के महासचिव मास्टर रण सिंह भी सांड़ों की चपेट में आ चुके हैं। बीती 25 जुलाई को दालमवाला गांव का एक युवक भी सांड़ की चपेट में आने से घायल हो चुके हैं।
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रात को सड़कों पर डेरा
बारिश का मौसम आते ही सांड़ अब रात के समय सड़कों पर डेरा जमा रहे हैं। दरअसल मच्छरों से बचने के लिए सांड़ रात के समय सड़कों पर आते हैं, ताकि वाहनों की हवा के कारण मच्छर कम परेशान करें। ऐसे में काले सांड़ रात को दिखाई भी नहीं देते और हादसा होने का खतरा बना रहा है।
डालेंगे जनहित याचिका
शहर में सांड़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। एक ओर जहां शहर के साथ लगते गांवों के किसान इससे परेशान हैं, वहीं व्यापारियों के लिए भी यह आफत बने हुए हैं। आए दिन हादसे हो रहे हैं। इसको लेकर जल्द ही जनहित याचिका डाली जाएगी। सरकार को गोरक्षा कानून से पहले गायों और सांड़ों का इंतजाम करना चाहिए था।
- सुनील वशिष्ठ टीम अन्ना।
कोई समाधान नहीं
शहर में गायों और सांड़ों की समस्या गंभीर है, लेकिन गोशालाएं इनको लेने से साफ मना कर रही हैं। ऐसे में प्रशासन के पास अब इनका कोई समाधान नहीं है।
- अशोक सैनी, सफाई निरीक्षक, नगर परिषद जींद।